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जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है श्रीमद् भागवत कथा का स्मरण : कथाव्यास

Tue, 12 Aug 2025 02:24 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Tue, 12 Aug 2025 02:24 AM IST
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Recollection of Shrimad Bhagwat Katha liberates from the cycle of birth and death: Kathavyas
सरायतरीन (संभल)। गांव विक्रमपुर ताहरपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथाव्यास हेमेंद्र शास्त्री ने भगवान श्री कृष्णा और सुदामा की मित्रता और परीक्षित महाराज को मृत्यु से मुक्ति मिलने की कथा सुनाई। इससे पहले कन्याओं ने यज्ञ में आहुति देकर जीव हत्या और समाज से नशा दूर करने का संकल्प लिया।
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सातवें दिन कथाव्यास ने प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण और उनके मित्र सुदामा के बीच अटूट प्रेम और मित्रता थी। सुदामा चरित्र के माध्यम से भगवान श्री कृष्णा अपने भक्तों के प्रति असीम कृपा और प्रेम उजागर करते हैं। बताया कि सुदामा जो एक गरीब ब्राह्मण थे। सुदामा अपने मित्र से मिलने के लिए अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारका गए। जब भगवान श्री कृष्ण को द्वारका पर सुदामा के आने की जानकारी मिलती है, तो भगवान श्री कृष्ण अपने प्रिय मित्र से मिलने के लिए सिंहासन छोड़कर खुद ही दौड़े-दौड़े चलकर आए। सुदामा का आदर-सत्कार किया। उन्हें गरीबी से मुक्त किया। बताया कि राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप मिला था और श्रीमद्भागवत कथा सुनने के बाद ही उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ था। इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। इस दौरान महंत धर्म भारती महाराज, पूर्व प्रधान वीरभान सिंह यादव, वीरेश यादव, रविंद्र यादव, धर्मवीर यादव, प्रदीप यादव, देव पाल, पप्पू यादव, अवधेश यादव, शिवकुमार, ओमवीर यादव, मुनेंद्र यादव आदि रहे।
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