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अधिवक्ताओं ने उठाई वकीलों की समस्या
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चंदौसी। बार एसोसिएशन तहसील चंदौसी व तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से विभिन्न परेशानियों को अवगत कराया और उनके समाधान की मांग की।
बार एसोसिएशन तहसील चंदौसी के अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रदेश की सभी जिला अदालतों द्वारा एक परिचय पत्र जारी किया जा रहा है, जिसके द्वारा ही अधिवक्ता एक ही जिले के न्यायालय में जा सकते हैं। ऐसा होने पर अधिवक्ताओं का दायरा एक ही अदालत तक सीमित हो जाएगा, जबकि अधिवक्ता संपूर्ण उप्र में किसी भी न्यायालय में किसी भी मुकदमे की पैरवी कर सकता है। इसलिए जिला न्यायालयों द्वारा परिचय पत्र की बाध्यता समाप्त की जाए। क्योंकि बार काउंसिल ऑफ उप्र द्वारा जारी सीओपी नंबर ही अधिवक्ता की है। यही अधिवक्ताओं का परिचय पत्र है।
अधिवक्ताओं की आए दिन हत्याएं हो रही है, उन्हें सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अधिवक्ताओं के विरुद्ध आए दिन झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। बिना जांच किए कोई मुकदमा दर्ज न किया जाए। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष तेजेंद्र देव सिंह, महेश चंद्र वार्ष्णेय, अवधेश गुप्ता, वीरेंद्र कश्यप, रुकमेश, विनोद कुमार, अमित प्रताप सिंह, नरेश कुमार, प्रेमप्रकाश, राजीव कुमार सिंह, प्रमोद सक्सेना, मनोज कुमार, संजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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वहीं तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का कहना है कि उप्र में आए दिन अधिवक्ताओं के विरुद्ध दुर्व्यवहार, मारपीट व हत्या जैसी गंभीर घटनाएं हो रही हैं। अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इसके अतिरिक्त अधिवक्ता कल्यान निधि व बीमा क्लेम तथा सहायता निधि के तमाम केस लंबित है, लेकिन अभी तक कोई भी निस्तारण नहीं हो पाया है। ज्ञापन देने वालों में शिव ओम शर्मा, छत्रपाल सिंह, इशरत अली, दिनेश यादव, अरविंद भाटी, अमर सिंह यादव, राजकुमार, ओमप्रकाश, ब्रजेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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बार एसोसिएशन तहसील चंदौसी के अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रदेश की सभी जिला अदालतों द्वारा एक परिचय पत्र जारी किया जा रहा है, जिसके द्वारा ही अधिवक्ता एक ही जिले के न्यायालय में जा सकते हैं। ऐसा होने पर अधिवक्ताओं का दायरा एक ही अदालत तक सीमित हो जाएगा, जबकि अधिवक्ता संपूर्ण उप्र में किसी भी न्यायालय में किसी भी मुकदमे की पैरवी कर सकता है। इसलिए जिला न्यायालयों द्वारा परिचय पत्र की बाध्यता समाप्त की जाए। क्योंकि बार काउंसिल ऑफ उप्र द्वारा जारी सीओपी नंबर ही अधिवक्ता की है। यही अधिवक्ताओं का परिचय पत्र है।
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अधिवक्ताओं की आए दिन हत्याएं हो रही है, उन्हें सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अधिवक्ताओं के विरुद्ध आए दिन झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। बिना जांच किए कोई मुकदमा दर्ज न किया जाए। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष तेजेंद्र देव सिंह, महेश चंद्र वार्ष्णेय, अवधेश गुप्ता, वीरेंद्र कश्यप, रुकमेश, विनोद कुमार, अमित प्रताप सिंह, नरेश कुमार, प्रेमप्रकाश, राजीव कुमार सिंह, प्रमोद सक्सेना, मनोज कुमार, संजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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वहीं तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का कहना है कि उप्र में आए दिन अधिवक्ताओं के विरुद्ध दुर्व्यवहार, मारपीट व हत्या जैसी गंभीर घटनाएं हो रही हैं। अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इसके अतिरिक्त अधिवक्ता कल्यान निधि व बीमा क्लेम तथा सहायता निधि के तमाम केस लंबित है, लेकिन अभी तक कोई भी निस्तारण नहीं हो पाया है। ज्ञापन देने वालों में शिव ओम शर्मा, छत्रपाल सिंह, इशरत अली, दिनेश यादव, अरविंद भाटी, अमर सिंह यादव, राजकुमार, ओमप्रकाश, ब्रजेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।