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नंदरौली छोड़, नगरों में तलाश रहे आशियाना
राजीव ग्वाल/अमर उजाला संभल
Updated Sat, 13 May 2017 12:56 AM IST
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नंदरौली में सन्नाटा
- फोटो : amar ujala
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गांव में बवाल के बाद बहुत से परिवार गांव में लौटने से डर रहे हैं, वह नगर और दूसरे गांवों में किराये का कमरा तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि जब जक गांव में हालात सामान्य न हो जाएं, तब तक गांव में रहना ठीक नहीं है।
दस मई को पुलिस और पीएसी के सामने बवाल होने के बाद से दूसरे समुदाय के ग्रामीणों में दहशत है। उनका कहना है कि जो लोग पुलिस और पीएसी के सामने उनके घरों में तोड़फोड़-आगजनी कर सकते हैं तो वह कुछ भी कर सकते हैं। इसलिए अभी हालात गांव में रहने वाले नहीं है। गांव से बाहर कमरा किराये पर लेकर रह लेंगे। जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तभी गांव में लौटेंगे।
आखिरकार खेत खलिहानों में कब तक रहेंगे। कब तक नाते रिश्तेदारों के यहां शरण ली जाएगी। गांव के इकराम अली, अलीजान, कासमी, जैतून, मुन्नी, तनबि रेशमा, मस्तान अली आदि ने बताया कि हमारे गांव में हिंदू मुसलमानों में बड़ी एकता थी, न जाने किसकी नजर लग गई। हालात यह है कि हम अपने गांव में ही जाने से घबरा रहे हैं। हम करीब बीस लोग हैं जो कमरे की तलाश कर रहे हैं। मेहनत मजदूरी करके यहीं रहेंगे और बच्चों को पेट भरेंगे।
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दस मई को पुलिस और पीएसी के सामने बवाल होने के बाद से दूसरे समुदाय के ग्रामीणों में दहशत है। उनका कहना है कि जो लोग पुलिस और पीएसी के सामने उनके घरों में तोड़फोड़-आगजनी कर सकते हैं तो वह कुछ भी कर सकते हैं। इसलिए अभी हालात गांव में रहने वाले नहीं है। गांव से बाहर कमरा किराये पर लेकर रह लेंगे। जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तभी गांव में लौटेंगे।
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आखिरकार खेत खलिहानों में कब तक रहेंगे। कब तक नाते रिश्तेदारों के यहां शरण ली जाएगी। गांव के इकराम अली, अलीजान, कासमी, जैतून, मुन्नी, तनबि रेशमा, मस्तान अली आदि ने बताया कि हमारे गांव में हिंदू मुसलमानों में बड़ी एकता थी, न जाने किसकी नजर लग गई। हालात यह है कि हम अपने गांव में ही जाने से घबरा रहे हैं। हम करीब बीस लोग हैं जो कमरे की तलाश कर रहे हैं। मेहनत मजदूरी करके यहीं रहेंगे और बच्चों को पेट भरेंगे।
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