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मिलावट के साये से सहमी मैंथा इंडस्ट्री
राकेश कुमार/अमर उजाला संभल
Updated Sun, 03 Jul 2016 01:06 AM IST
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बहराइच के कृषि विभाग में बुधवार को मिट्टी का परीक्षण कराते अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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मिलावट के साये से मैंथा इंडस्ट्री सहमी हुई है। इसको लेकर कारोबारी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में स्टॉक रखने पर भी अंडरटेकिंग ली जा रही है ताकि किसी भी तरह की मिलावट पाए जाने पर माल रखने वाले व्यापारी से उसकी भरपाई कराई जा सके। इससे ईमानदारी से व्यापार करने वालों को भी परेशानी हो रही है।
हाल यह है कि, मैंथा कारोबारी अब माल खरीदने से पहले जीएलसी की जांच कराने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जिनके यहां यह सुविधा नहीं है, उनको कारोबार में दिक्कत आ रही है। पिछले दिनों रामपुर की स्वाती मैंथॉल कंपनी की ओर से नीदरलैंड से मंगाए गए मैंथॉल में मिलाए जाने वाले केमिकल के भुगतान के दौरान 39 लाख की ठगी से ये मामला फिर चर्चा में आ गया है।कारोबारियों के जेहन में सवाल उठ रहा है कि, आखिर ये कैसा केमिकल था जो मैंथॉल में मिलाया जाना था।
डी-मैंथॉल मिलाने के भी मामले आ चुके हैं सामने
इससे पहले गत वर्ष नेचुरल मैंथा आयल में डी-मैंथॉल की मिलावट के भी मामले पकड़े जा चुके हैं। डी-मैंथॉल एक केमिकल कंपोनेंट है। जर्मनी की एक कंपनी के अलावा भारत की कई कंपनियां केमिकल के माध्यम से डी-मैथॉल तैयार करती हैं।
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नेचुरल मैंथा ऑयल में एक निश्चित मात्रा तक डी-मैंथॉल मिलाकर जीएलसी बढ़ाई जाती है। नेचुरल मैंथा आयल में 70-72 जीएलसी होती है। लेकिन डी-मैंथाल में 97-99 जीएलसी पाई जाती है। मिलावट की जो मात्रा सामने आ रही उसके मुताबिक मिश्चित मात्रा में मिलावट से नेचुरल मैंथा आयल में एक जीएलसी बढ़े जाती है। मिलावटखोर को 15-20 रुपये प्रति किलोग्राम का फायदा मिलता है। लेकिन जब तेल ज्यादा मात्रा में होता है तो ज्यादा फायदा होता है।
मिलावट से निर्यातकों को उठाना पड़ा नुकसान
संभल। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मैंथा कारोबारियों की साख को मिलावट का झटका लग चुका है। गत वर्ष तमाम निर्यातकों के भुगतान भी फंस गए थे। कई जगह भुगतान में कटौती हुई और आर्डर मिलना मुश्किल हुआ। इसके बाद टेस्टिंग लैब में डी-मैंथाल की मिलावट को पकड़ने के लिए मशीनें अपडेट की गईं।
इसलिए इस बार फिलहाल डी-मैंथॉल की मिलावट के मामले सामने नहीं आ रहे हैं पर मैंथा इंडस्ट्री पर मिलावट का खतरा बरकरार है। रामपुर के प्रमुख मैंथा व्यापारी और निर्यातक एसके गुप्ता ने बताया कि इस बार जब से सीजन शुरू हुआ है तब से डी-मैंथॉल की मिलावट का कोई बड़ा मामला चेकिंग में सामने नहीं आया है लेकिन मिलावट का खतरा कम नहीं हुआ है।
पिछले दस वर्ष से पूरी इंडस्ट्री मिलावट से पीड़ित रही है लेकिन दो वर्ष में मिलावट से बड़ी जंग लड़ी गई। मिलावट खोरों की निंदा हुई। मिलावट पकड़ने के लिए चेकिंग बढ़ी। अब देश के ही नहीं विदेशी खरीदार भी सतर्क हैं। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स में माल रखते वक्त निर्यातकों को एक अंडरटेकिंग देनी पड़ रही है। इससे मिलावट खोरों को बढ़ा झटका लगा है।
अरविंद अरोरा, मैंथॉल प्रोडक्ट के निर्यातक।
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हाल यह है कि, मैंथा कारोबारी अब माल खरीदने से पहले जीएलसी की जांच कराने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जिनके यहां यह सुविधा नहीं है, उनको कारोबार में दिक्कत आ रही है। पिछले दिनों रामपुर की स्वाती मैंथॉल कंपनी की ओर से नीदरलैंड से मंगाए गए मैंथॉल में मिलाए जाने वाले केमिकल के भुगतान के दौरान 39 लाख की ठगी से ये मामला फिर चर्चा में आ गया है।कारोबारियों के जेहन में सवाल उठ रहा है कि, आखिर ये कैसा केमिकल था जो मैंथॉल में मिलाया जाना था।
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डी-मैंथॉल मिलाने के भी मामले आ चुके हैं सामने
इससे पहले गत वर्ष नेचुरल मैंथा आयल में डी-मैंथॉल की मिलावट के भी मामले पकड़े जा चुके हैं। डी-मैंथॉल एक केमिकल कंपोनेंट है। जर्मनी की एक कंपनी के अलावा भारत की कई कंपनियां केमिकल के माध्यम से डी-मैथॉल तैयार करती हैं।
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नेचुरल मैंथा ऑयल में एक निश्चित मात्रा तक डी-मैंथॉल मिलाकर जीएलसी बढ़ाई जाती है। नेचुरल मैंथा आयल में 70-72 जीएलसी होती है। लेकिन डी-मैंथाल में 97-99 जीएलसी पाई जाती है। मिलावट की जो मात्रा सामने आ रही उसके मुताबिक मिश्चित मात्रा में मिलावट से नेचुरल मैंथा आयल में एक जीएलसी बढ़े जाती है। मिलावटखोर को 15-20 रुपये प्रति किलोग्राम का फायदा मिलता है। लेकिन जब तेल ज्यादा मात्रा में होता है तो ज्यादा फायदा होता है।
मिलावट से निर्यातकों को उठाना पड़ा नुकसान
संभल। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मैंथा कारोबारियों की साख को मिलावट का झटका लग चुका है। गत वर्ष तमाम निर्यातकों के भुगतान भी फंस गए थे। कई जगह भुगतान में कटौती हुई और आर्डर मिलना मुश्किल हुआ। इसके बाद टेस्टिंग लैब में डी-मैंथाल की मिलावट को पकड़ने के लिए मशीनें अपडेट की गईं।
इसलिए इस बार फिलहाल डी-मैंथॉल की मिलावट के मामले सामने नहीं आ रहे हैं पर मैंथा इंडस्ट्री पर मिलावट का खतरा बरकरार है। रामपुर के प्रमुख मैंथा व्यापारी और निर्यातक एसके गुप्ता ने बताया कि इस बार जब से सीजन शुरू हुआ है तब से डी-मैंथॉल की मिलावट का कोई बड़ा मामला चेकिंग में सामने नहीं आया है लेकिन मिलावट का खतरा कम नहीं हुआ है।
पिछले दस वर्ष से पूरी इंडस्ट्री मिलावट से पीड़ित रही है लेकिन दो वर्ष में मिलावट से बड़ी जंग लड़ी गई। मिलावट खोरों की निंदा हुई। मिलावट पकड़ने के लिए चेकिंग बढ़ी। अब देश के ही नहीं विदेशी खरीदार भी सतर्क हैं। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स में माल रखते वक्त निर्यातकों को एक अंडरटेकिंग देनी पड़ रही है। इससे मिलावट खोरों को बढ़ा झटका लगा है।
अरविंद अरोरा, मैंथॉल प्रोडक्ट के निर्यातक।