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ईद की नमाज से पहले फितरे का अदा करना है अफजल : मुफ्ती सैय्यद रेहान मियां
Fri, 28 Mar 2025 12:18 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:18 AM IST
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चंदौसी/जनेटा।
रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना मुकम्मल होने वाला है। मुस्लिम इलाकों में ईद की तैयारियों में तेजी आ गई है। बृहस्पतिवार को रमजानुल मुबारक के 26 रोजे पूरे हो गए। लोगों में इबादत को लेकर जोश और उत्साह का माहौल है। जनेटा शरीफ के मुफ्ती सैय्यद रेहान मियां मौअज्जमी ने बताया कि रमजानुल मुबारक के रोजे रखने के साथ ही रमजानुल मुबारक में सदका ए ईदुल फितर यानी फितरा का अदा करना भी जरूरी है। फितरा हर साहिबे निसाब मालदार मुसलमान को अदा करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर रमजान का फितरा अदा न किया जाए तो रोजा नमाज और सारी इबादत जमीनों आसमान के दरमियान लटकी रहती है। जब तक फितरा अदा नहीं किया जाता इबादतें कबूल नहीं होती है। फितरा गरीब कमजोर यतीम बेवा और बे सहारा लोगों का हक है। सबसे पहले इन लोगों की फितरे से मदद करनी चाहिए। फितरे का मकसद यही है कि जो गरीब और कमजोर लोग हैं वो भी इस मदद के जरिए अपनी जरुरत की चीजें खरीद कर ईद की खुशी में शामिल हो सकें। इसलिए जहां तक मुमकिन हो अगर कोई मजबूरी नहीं है तो ईद से पहले ही फितरा अदा कर दें। फितरा खामोशी के साथ अदा करें। अपने मोहल्ले पड़ोस के जो मुस्तहिक कमजोर और गरीब लोग हों उनको खामोशी के साथ फितरा दे दें। ईद से पहले फितरा अदा करना अफजल अमल है अगर कोई मजबूरी है तो ईद की नमाज के बाद भी फितरा अदा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शरीयत के अनुसार फितरा एक व्यक्ति की तरफ से गेहूं दो किलो 47 ग्राम या उसकी कीमत अदा किया जाएगा। घर के प्रत्येक सदस्य की तरफ से फितरा अदा किया जाना जरूरी है। मालदार लोग गेंहू के स्थान पर चार किलो 94 ग्राम खजूर , किशमिश और जौ भी फितरे के रूप में अदा कर सकते हैं। गेंहू की तरह खजूर या किशमिश की भी कीमत भी फितरे के रूप में अदा की जा सकती है। फितरे को अल्लाह का हुक्म मानते हुए खुशी खुशी अदा करना चाहिए। इसके अतरिक्त भी ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की राह में सदका करके लोगों की इमदाद करें। गरीब और यातिमों का खास खयाल रखें।
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रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना मुकम्मल होने वाला है। मुस्लिम इलाकों में ईद की तैयारियों में तेजी आ गई है। बृहस्पतिवार को रमजानुल मुबारक के 26 रोजे पूरे हो गए। लोगों में इबादत को लेकर जोश और उत्साह का माहौल है। जनेटा शरीफ के मुफ्ती सैय्यद रेहान मियां मौअज्जमी ने बताया कि रमजानुल मुबारक के रोजे रखने के साथ ही रमजानुल मुबारक में सदका ए ईदुल फितर यानी फितरा का अदा करना भी जरूरी है। फितरा हर साहिबे निसाब मालदार मुसलमान को अदा करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर रमजान का फितरा अदा न किया जाए तो रोजा नमाज और सारी इबादत जमीनों आसमान के दरमियान लटकी रहती है। जब तक फितरा अदा नहीं किया जाता इबादतें कबूल नहीं होती है। फितरा गरीब कमजोर यतीम बेवा और बे सहारा लोगों का हक है। सबसे पहले इन लोगों की फितरे से मदद करनी चाहिए। फितरे का मकसद यही है कि जो गरीब और कमजोर लोग हैं वो भी इस मदद के जरिए अपनी जरुरत की चीजें खरीद कर ईद की खुशी में शामिल हो सकें। इसलिए जहां तक मुमकिन हो अगर कोई मजबूरी नहीं है तो ईद से पहले ही फितरा अदा कर दें। फितरा खामोशी के साथ अदा करें। अपने मोहल्ले पड़ोस के जो मुस्तहिक कमजोर और गरीब लोग हों उनको खामोशी के साथ फितरा दे दें। ईद से पहले फितरा अदा करना अफजल अमल है अगर कोई मजबूरी है तो ईद की नमाज के बाद भी फितरा अदा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शरीयत के अनुसार फितरा एक व्यक्ति की तरफ से गेहूं दो किलो 47 ग्राम या उसकी कीमत अदा किया जाएगा। घर के प्रत्येक सदस्य की तरफ से फितरा अदा किया जाना जरूरी है। मालदार लोग गेंहू के स्थान पर चार किलो 94 ग्राम खजूर , किशमिश और जौ भी फितरे के रूप में अदा कर सकते हैं। गेंहू की तरह खजूर या किशमिश की भी कीमत भी फितरे के रूप में अदा की जा सकती है। फितरे को अल्लाह का हुक्म मानते हुए खुशी खुशी अदा करना चाहिए। इसके अतरिक्त भी ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की राह में सदका करके लोगों की इमदाद करें। गरीब और यातिमों का खास खयाल रखें।