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हैंडीक्राफ्ट की पुरानी डिजाइन से विदेशी बॉयर्स का हुआ मोहभंग 

Tue, 05 Jul 2016 01:06 AM IST
राकेश कुमार/अमर उजाला संभल
राकेश कुमार/अमर उजाला संभल Updated Tue, 05 Jul 2016 01:06 AM IST
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हस्तशिल्प दिखाते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
 सरकार की उदासीनता संभल की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को भारी पड़ रही है। जिले से एक कैबिनेट मंत्री समेत चार विधायक सत्तारूढ़ दल के हैं, इसके बावजूद लोगों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन इंडस्ट्री के टेक्निकल सपोर्ट के लिए संस्थान स्थापित नहीं किया जा सका। 
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  नतीजतन सरायतरीन की परंपरागत हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री पुरानी डिजाइन के  भरोसे है, जिससे अब विदेशी उकता गए हैं। इससे विदेशों से नए आर्डर मिलना मुश्किल हो गया है।
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दक्षिण अफ्रीका की कंपनी ने तो यहां के विक्रेताओं को साफ लिखा है कि कुछ नया इनोवेशन हो तभी सैंपल भेजें अन्यथा समय व्यर्थ न गवाएं। इधर, संभल और सरायतरीन के निर्यातकों का कहना है कि पांच वर्ष में निर्यात लगातार घट रहा है।
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पांच वर्ष पहले करीब 500 करोड़ सालाना का कारोबार था जो घटकर अब करीब 100 करोड़ का ही रह गया है। इसकी मुख्य वजह यह यही है कि सरायतरीन की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री कुछ नया नहीं कर पा रही है। 

अमेरिकी कंपनी फॉर एवर-21 सरायतरीन में बनने वाली आर्टिफिशियल ज्वैलरी की एक बड़ी खरीदार थी लेकिन पिछले तीन वर्ष में इस कंपनी ने नाम मात्र की खरीदारी की है। नए आर्डर न मिलने से निर्यातकों को झटका लग रहा है। फॉर एवर -21 के स्टोर्स में अब चीन में बनी ज्वैलरी भरी है। यदि इनके स्टोर्स की वेबसाइट पर जाकर ज्वैलरी सेक्शन को देखेंगे तो वहां पर प्रदर्शित 95 प्रतिशत प्रोडक्ट चीन का है। पांच प्रतिशत प्रोडक्ट इंडिया में बनने वाली आर्टिफिशियल ज्वैलरी के नजर आएंगे।

साउथ अफ्रीका की कंपनी केप यूनियन मार्ट गत वर्ष तक सरायतरीन की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को आर्डर दिया करती थी। इस बार केप यूनियन मार्ट फ्यूटर मूड के लिए स्थानीय निर्यातकों ने सैंपल भेजे थे। इस पर उसकी ओर से जवाब दिया गया कि, रेजन, मैटल और हड्डी सींग के बेस पर तैयार आर्टिफिशियल ज्वैलरी को न भेजें। जाहिर है कि विदेशी बायर कुछ नया मांग रहे हैं। इसके लिए इंडस्ट्री में डिजाइन से लेकर मैटेरियल तक में कुछ नया लाने की जरूरत है। अगर इसमें इंडस्ट्री पीछे रह गई तो निर्यात घटेगा।


अगर केंद्र सरकार ने हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को सहूलियतें दीं होतीं तो यह दिन न देखना पड़ता। निर्यात घटने की सबसे प्रमुख वजह केंद्र सरकारी नीतियां हैं। संभल ही नहीं पूरे प्रदेश और देश में निर्यात को झटका लगा है। जहां तक राज्य सरकार का सवाल है बिजली, सड़क सफाई जैसी आधारभूत समस्याओं के समाधान के लिए समय समय पर काम कराए गए हैं। ईद के बाद प्रमुख हैंडीक्राफ्ट व्यापारियों साथ मैं खुद सीधा संवाद करूंगा ताकि यह देखा जा सके कि राज्य सरकार हैंडीक्राफ्ट के विकास के लिए क्या काम कर सकती है। इकबाल महमूद, कैबिनेट मंत्री,  उत्तर प्रदेश सरकार।  
 
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