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गेहूं-बाजरा देकर ग्रामीण खरीद रहे तेल-चीनी
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Thu, 24 Nov 2016 01:50 AM IST
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गेहूं 18 रुपये, लेकिन आटा 28 रुपये किलो
- फोटो : amar Ujala
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इतना ही मजदूरी के रूप में भी अनाज देने का चलन शुरू हो गया है।
नोटबंदी के बाद करेंसी की किल्लत से शहरी से लेकर ग्रामीण तक जूझ रहे हैं। बैंकों में लाइन लगने के बाद भी रकम नहीं मिलने से उनकी दिक्कत हुई तो ग्रामीण पुरानी व्यवस्था की ओर रुख करते नजर आए। अकरौली, बनियाखेड़ा और गोपालपुर में लोग अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अनाज देकर सामान की खरीदारी कर रहे हैं। इससे उनको करेंसी की किल्लत से एक ओर जहां निजात मिली है, वहीं उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो रही है। मजदूरों को नगदी न दे पाने की स्थिति में अनाज देकर उनका हिसाब चुकता किया जा रहा है। वहीं भाकियू(अअ) नेता चौधरी बृजपाल सिंह ने बताया कि कृषि प्रधान देश में भारत सरकार को कृषि पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है, बुवाई लेट हो रही है, ऐसे में कृषि उत्पादन निश्चित तौर पर प्रभावित हो जाएगा। इस पर तत्काल गौर करते हुए समस्या का निदान किया जाना चाहिए।
हजार पांच सौ रुपये से नहीं मिल रहा उर्वरक, कंपोस्ट की बढ़ी मांग ः किसानों के सामने नकदी की समस्या गहराती जा रही है। हजार पांच सौ रुपये के नोटों के बदले उवर्रक नहीं मिलने के कारण परेशानी बढ़ती जा रही है। गेहूं की बुबाई के लिए उवर्रक नहीं मिलने से फसल का समय निकला जा रहा है। ऐसे में किसान नकदी की समस्या से निजात के लिए कंपोस्ट उवर्रक का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव गांव कंपोस्ट उवर्रक की मांग में तेजी आ गई है। बनियाखेड़ा निवासी करन सिंह पाल ने बताया कि नकदी की कमी के कारण उवर्रक नहीं मिला तो देशी खाद से खेत तैयार किया है। बनियाखेड़ा निवासी तोताराम बैंक में खाद बीज के लिए रुपये जमा किए थे। निकाल गए तो मिल नहीं पाए। खेत में देशी खाद लगाया है और खाने के लिए रखे गेहूं बीज के तौर पर प्रयोग किए हैं।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने संभल के प्रमुख कारोबारियों और पेट्रोल पंपों पर स्वैप मशीनें लगा रखी हैं। खरीदारी के बाद लोग इनके माध्यम से आसानी से पेमेंट कर रहे हैं। एटीएम और डेबिट कार्ड के जरिए पेमेंट हो रहे हैं। जिन व्यापारियों के पास अभी धनराशि स्वैप करने वाली मशीनें नहीं हैं वे मशीनें लगवाने की तैयारी में हैं। पेट्रोल पंप स्वामी मोहम्मद कासिफ ने बताया कि पहले तो एक दो लोग ही धनराशि स्वैप कराने के लिए आते थे लेकिन अब हालात बदले हैं।
पढ़े लिखे लोग कार्ड से धनराशि स्वैप करा रहे हैं जबकि अनपढ़ लोगों और किसानों में थोड़ी सी हिचक हैं। सरायतरीन पेट्रोल पंप स्वामी नीलांशु वार्ष्णेय ने कहा कि करेंसी संकट में ऑनलाइन भुगतान के विकल्प पर अमल कर रहे हैं।
पेट्रोल पंप स्वामी संजय सांख्यधर ने बताया कि पंप पर एटीएम और डेबिट कार्ड से पेट्रोल ले ने वाले भी पहुंच रहे हैं। मेडिकल स्टोर के संचालक निर्देश वाषर्ग्णेय ने बताया कि उनके पास अभी तक स्वैप मशीन नहीं है लेकिन जब से संकट आया है वह मशीन को लगवाने की सोच रहे हैं।
इस संबंध में प्रवीण कुमार उर्फ गुल्लू ने बताया कि जिन लोगों के यहां शादियां हैं वे लोग जरूरत का सामान जेवर आदि खरीदने के लिए एटीएम और डेबिट कार्ड लेकर आ रहे हैं। हम उनके कार्ड से सामान के बदले धनराशि स्वैप कर लेते हैं लोग आसानी से खरीदारी करके लौट रहे हैं।
वहीं कपड़ा कारोबारी राधाकृष्ण मंगलम का कहना है कि जब से नोट बंद हुए तब से लोग एटीएम और डेबिट कार्ड के साथ साथ अपने स्मार्ट कार्ड भी इस्तेमाल कर रहे हैं। चलन बढ़ रहा है।
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नोटबंदी के बाद करेंसी की किल्लत से शहरी से लेकर ग्रामीण तक जूझ रहे हैं। बैंकों में लाइन लगने के बाद भी रकम नहीं मिलने से उनकी दिक्कत हुई तो ग्रामीण पुरानी व्यवस्था की ओर रुख करते नजर आए। अकरौली, बनियाखेड़ा और गोपालपुर में लोग अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अनाज देकर सामान की खरीदारी कर रहे हैं। इससे उनको करेंसी की किल्लत से एक ओर जहां निजात मिली है, वहीं उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो रही है। मजदूरों को नगदी न दे पाने की स्थिति में अनाज देकर उनका हिसाब चुकता किया जा रहा है। वहीं भाकियू(अअ) नेता चौधरी बृजपाल सिंह ने बताया कि कृषि प्रधान देश में भारत सरकार को कृषि पर ध्यान देना चाहिए, अन्यथा अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है, बुवाई लेट हो रही है, ऐसे में कृषि उत्पादन निश्चित तौर पर प्रभावित हो जाएगा। इस पर तत्काल गौर करते हुए समस्या का निदान किया जाना चाहिए।
हजार पांच सौ रुपये से नहीं मिल रहा उर्वरक, कंपोस्ट की बढ़ी मांग ः किसानों के सामने नकदी की समस्या गहराती जा रही है। हजार पांच सौ रुपये के नोटों के बदले उवर्रक नहीं मिलने के कारण परेशानी बढ़ती जा रही है। गेहूं की बुबाई के लिए उवर्रक नहीं मिलने से फसल का समय निकला जा रहा है। ऐसे में किसान नकदी की समस्या से निजात के लिए कंपोस्ट उवर्रक का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव गांव कंपोस्ट उवर्रक की मांग में तेजी आ गई है। बनियाखेड़ा निवासी करन सिंह पाल ने बताया कि नकदी की कमी के कारण उवर्रक नहीं मिला तो देशी खाद से खेत तैयार किया है। बनियाखेड़ा निवासी तोताराम बैंक में खाद बीज के लिए रुपये जमा किए थे। निकाल गए तो मिल नहीं पाए। खेत में देशी खाद लगाया है और खाने के लिए रखे गेहूं बीज के तौर पर प्रयोग किए हैं।
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कार्ड स्वैप कर खरीद रहे कपड़े और जेवर
नोटबंदी के बाद जिले में ऑनलाइन शापिंग और मशीनों से धनराशि स्वैप कराकर खरीदारी का चलन बढ़ा है। पेट्रोल पंप और बाइकों के शोरूमों से लेकर कपड़े और सर्राफा की दुकानों तक स्वैप मशीनें लगी हुईं हैं। नोटबंदी के बाद कारोबारियों मेें स्वैप मशीन लगवाने के प्रति रुझान बढ़ा है।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने संभल के प्रमुख कारोबारियों और पेट्रोल पंपों पर स्वैप मशीनें लगा रखी हैं। खरीदारी के बाद लोग इनके माध्यम से आसानी से पेमेंट कर रहे हैं। एटीएम और डेबिट कार्ड के जरिए पेमेंट हो रहे हैं। जिन व्यापारियों के पास अभी धनराशि स्वैप करने वाली मशीनें नहीं हैं वे मशीनें लगवाने की तैयारी में हैं। पेट्रोल पंप स्वामी मोहम्मद कासिफ ने बताया कि पहले तो एक दो लोग ही धनराशि स्वैप कराने के लिए आते थे लेकिन अब हालात बदले हैं।
पढ़े लिखे लोग कार्ड से धनराशि स्वैप करा रहे हैं जबकि अनपढ़ लोगों और किसानों में थोड़ी सी हिचक हैं। सरायतरीन पेट्रोल पंप स्वामी नीलांशु वार्ष्णेय ने कहा कि करेंसी संकट में ऑनलाइन भुगतान के विकल्प पर अमल कर रहे हैं।
पेट्रोल पंप स्वामी संजय सांख्यधर ने बताया कि पंप पर एटीएम और डेबिट कार्ड से पेट्रोल ले ने वाले भी पहुंच रहे हैं। मेडिकल स्टोर के संचालक निर्देश वाषर्ग्णेय ने बताया कि उनके पास अभी तक स्वैप मशीन नहीं है लेकिन जब से संकट आया है वह मशीन को लगवाने की सोच रहे हैं।
इस संबंध में प्रवीण कुमार उर्फ गुल्लू ने बताया कि जिन लोगों के यहां शादियां हैं वे लोग जरूरत का सामान जेवर आदि खरीदने के लिए एटीएम और डेबिट कार्ड लेकर आ रहे हैं। हम उनके कार्ड से सामान के बदले धनराशि स्वैप कर लेते हैं लोग आसानी से खरीदारी करके लौट रहे हैं।
वहीं कपड़ा कारोबारी राधाकृष्ण मंगलम का कहना है कि जब से नोट बंद हुए तब से लोग एटीएम और डेबिट कार्ड के साथ साथ अपने स्मार्ट कार्ड भी इस्तेमाल कर रहे हैं। चलन बढ़ रहा है।