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गंगा एक्सप्रेसवे भूमि खरीद घपला : डीडीसी कोर्ट से निर्णय राजपाल के पक्ष में, 1.40 करोड़ रुपये मिलेगा मुआवजा

Fri, 30 Sep 2022 05:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 30 Sep 2022 05:19 AM IST
सार

Ganga Expressway :गंगा एक्सप्रेसवे के लिए खरीदी गई भूमि में हुई घपलेबाजी के मामले में डीडीसी (उप संचालक चकबंदी) के न्यायालय ने अपना निर्णय दे दिया है। अब गांव मझोला निवासी किसान राजपाल को अपने हिस्से की 24 बीघा भूमि का मुआवजा करीब 1.40 करोड़ रुपये मिलेगा।

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Ganga Expressway land purchase scam: Decision from DDC court in favor of Rajpal
गंगा एक्सप्रेसवे - फोटो : Social Media

विस्तार

गंगा एक्सप्रेसवे के लिए खरीदी गई भूमि में हुई घपलेबाजी के मामले में डीडीसी (उप संचालक चकबंदी) के न्यायालय ने अपना निर्णय दे दिया है। अब गांव मझोला निवासी किसान राजपाल को अपने हिस्से की 24 बीघा भूमि का मुआवजा करीब 1.40 करोड़ रुपये मिलेगा। जो बैनामे उस भूमि के दूसरे खाताधारकों के नाम से हुए हैं उन्हें निरस्त किया जाएगा। उन खाताधारकों से बैनामे में लगे स्टांप शुल्क की भी वसूली हो सकती है।

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गंगा एक्सप्रेसवे में राजपाल के नाम की भूमि अन्य 17 खाताधारकों के नाम पर दर्ज थी। सभी खाताधारकों ने गंगा एक्सप्रेसवे के लिए बैनामा भी करा दिया। राजपाल ने इस मामले की अपील एसओसी (बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी) न्यायालय में की थी। जहां फाइल को खारिज कर दिया था। शिकायत जब एडीएम केके अवस्थी के न्यायालय में पहुंची तो उन्होंने स्टे कर दिया। बाद में नए सिरे से अपील और निगरानी शुरू कराई। बहस के बाद बुधवार को राजपाल के पक्ष में निर्णय दिया गया।
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कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
डीडीसी न्यायालय के निर्णय के बाद चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार फिर से लटक गई है।  इसमें राजपाल ने आरोप लगाया था कि उसका नाम रिकॉर्ड से गायब किया गया था। इसके बाद ही अन्य 17 खाताधारकों के नाम दर्ज किए गए। दत्तकपुत्र की हैसियत से जब भूमि पर अपना दावा किया तो फाइल को खारिज किया गया था। राजपाल के इस दावे के बाद ही जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच कराई थी। तीन अधिकारियों की टीम ने जांच रिपोर्ट में भी माना है कि फाइल को गलत तरीके से खारिज किया गया था।
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गंगा एक्सप्रेसवे संभल जिले के 31 गांवों से होकर गुजर रहा है। गांव मझौला में पहली गड़बड़ी सामने आई। जिसको प्रशासन ने गंभीरता से लिया। माना जा रहा है कि कई अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

क्या है मामला
जिले में गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इसमें गांव मझोला के किसानों की भी 43 बीघा भूमि की खरीद हुई है। इस भूमि में 17 खाताधारक थे। इस भूमि का मुआवजा करीब 2.17 करोड़ रुपये बनता है। इन 17 खाताधारकों में शामिल राजपाल ने दावा किया था कि वह 24 बीघा भूमि का स्वामी है। इसी विवाद में मामला चकबंदी न्यायालय पहुंचा और कई अधिकारियों के समक्ष सुनवाई की गई। भुगतान पर रोक लगा दी गई थी। एक खाताधारक पूनम देवी भुगतान न होने पर उच्च न्यायालय पहुंच गईं। 


उच्च न्यायालय ने उनके भुगतान के आदेश कर दिए थे। ब्याज समेत उन्हें भुगतान किया गया था। इसी दौरान अन्य 17 खाताधारकों में से 14 के खाते में 96 लाख रुपये इसी वर्ष सितंबर में ट्रांसफर किए गए थे। इसी भुगतान के बाद मामला तुल पकड़ गया। शिकायत होने पर जिलाधिकारी ने इसकी जांच कराई।

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