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Sambhal News: समिति पर खाद कम मिलने के मामले में सचिव के खिलाफ एफआईआर
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जुनावई। संभल जिले में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद की कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है। जांच के बाद रिबाड़ा समिति के सचिव महेश चंद्र के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। जांच में समिति सचिव की लापरवाही और बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर 16 अक्तूबर को एक संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया था। इस टीम में गुन्नौर तहसीलदार रवि सोनकर, उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी, नायब तहसीलदार अनुज कुमार और सहकारिता विभाग के एडीसीओ बीरेंद्र कुमार शामिल थे। टीम ने रिबाड़ा और नगला अजमेरी साधन सहकारी समितियों का औचक निरीक्षण किया।
उन्होंने पीओएस मशीन में दर्ज खाद वितरण के आंकड़ों का मौके पर रखे स्टॉक से मिलान किया। सत्यापन के दौरान रिबाड़ा समिति से एनपीके के 27 बैग मौके से गायब मिले। जांच में सामने आया कि दोनों समितियों का प्रभार अकेले सचिव महेश चंद्र के पास था। दोनों समितियों का संचालन एक ही जगह से और सारा स्टॉक एक ही गोदाम में रखा जा रहा था।
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नियमों को ताक पर रखकर ट्रक से सीधे पिकअप में खाद उतारकर बेचने का खेल चल रहा था। पूछताछ में सचिव ने पल्लेदारी का खर्च बचाने की दलील दी। सूत्रों के अनुसार, सचिव के रिश्तेदार भतीजे वीरेश को ट्रक से सीधे खाद बेचने की बात भी सामने आई है।
स्टॉक में कमी को लेकर सचिव कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच टीम ने सचिव को पूरी अनियमितता का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अपनी आख्या तैयार कर जिलाधिकारी को भेज दी। अधिकारियों ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की है।
अपर जिला सहकारी अधिकारी बीरेंद्र कुमार की तहरीर पर थाना पुलिस ने सचिव महेश चंद्र के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब विभागीय कार्रवाई शुरू होगी। लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू की जाएगी।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर 16 अक्तूबर को एक संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया था। इस टीम में गुन्नौर तहसीलदार रवि सोनकर, उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी, नायब तहसीलदार अनुज कुमार और सहकारिता विभाग के एडीसीओ बीरेंद्र कुमार शामिल थे। टीम ने रिबाड़ा और नगला अजमेरी साधन सहकारी समितियों का औचक निरीक्षण किया।
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उन्होंने पीओएस मशीन में दर्ज खाद वितरण के आंकड़ों का मौके पर रखे स्टॉक से मिलान किया। सत्यापन के दौरान रिबाड़ा समिति से एनपीके के 27 बैग मौके से गायब मिले। जांच में सामने आया कि दोनों समितियों का प्रभार अकेले सचिव महेश चंद्र के पास था। दोनों समितियों का संचालन एक ही जगह से और सारा स्टॉक एक ही गोदाम में रखा जा रहा था।
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नियमों को ताक पर रखकर ट्रक से सीधे पिकअप में खाद उतारकर बेचने का खेल चल रहा था। पूछताछ में सचिव ने पल्लेदारी का खर्च बचाने की दलील दी। सूत्रों के अनुसार, सचिव के रिश्तेदार भतीजे वीरेश को ट्रक से सीधे खाद बेचने की बात भी सामने आई है।
स्टॉक में कमी को लेकर सचिव कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच टीम ने सचिव को पूरी अनियमितता का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अपनी आख्या तैयार कर जिलाधिकारी को भेज दी। अधिकारियों ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की है।
अपर जिला सहकारी अधिकारी बीरेंद्र कुमार की तहरीर पर थाना पुलिस ने सचिव महेश चंद्र के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब विभागीय कार्रवाई शुरू होगी। लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू की जाएगी।