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फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाने वाली ग्राम प्रधान बर्खास्त
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Thu, 27 Oct 2016 01:04 AM IST
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चुनाव
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इसमें निर्णय देते हुए एसडीएम ने गीता देवी का नामांकन रद्द कर दिया है। साथ ही दूसरे स्थान पर रही बूंदा देवी को प्रधान घोषित कर दिया है।
हरगोविंदपुर ग्राम पंचायत का प्रधान पद अनुसूचित जाति महिला पद के लिए आरक्षित है। इसमें पांच दिसंबर-2015 को मतदान हुआ था। यहां से सात प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। इसमें 13 दिसंबर-2015 को मतगणना हुई। कुल मत 884 पड़े थे, जिसमें गीता देवी को 207 व बूंदा देवी को 149 मत मिले थे। 58 मतों से गीता देवी को प्रधान निर्वाचित घोषित किया गया था। इसके बाद दूसरे स्थान पर बूंदा देवी ने उप जिला मजिस्ट्रेट गुन्नौर के न्यायालय में रिट पिटीशन दायर करके गीता देवी के जाति प्रमाणपत्र को चुनौती दी थी।
आरोप लगाया गया था कि गीता देवी अनुसूचित जाति की न होकर अहेरिया जाति की हैं, जोकि सामान्य श्रेणी में है। मायके से पासी जाति का गलत तरीके से प्रमाणपत्र बनवाकर उन्होंने चुनाव लड़ा है। इस पर सुनवाई हुई, दोनों पक्षों से मिले साक्ष्यों के आधार पर उप जिला मजिस्ट्रेट गुन्नौर प्रतिपाल सिंह चौहान ने 25 अक्तूबर को आदेश सुनाया। इसमें बूंदा देवी के आरोपों को सही पाते हुए गीता देवी का नामांकन रद्द कर दिया। इसके साथ ही पंचायत राज अधिनियम-12सी के तहत दूसरे नंबर पर रही बूंदा देवी को ग्राम प्रधान घोषित कर दिया है।
हालांकि 21 अक्तूबर को गीता देवी ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई थी कि उन्हें एसडीएम गुन्नौर से न्याय की उम्मीद नहीं है, उनके मामले की सुनवाई, किसी अन्य एसडीएम कोर्ट में कराई जाए। जिलाधिकारी ने एसडीएम गुन्नौर से 22 से 28 अक्तूबर तक इस मामले की पत्रावलियां अपने कार्यालय भेजने के निर्देश दिए थे लेकिन इसे दरकिनार करके एसडीएम गुन्नौर ने 25 अक्तूबर को आदेश पारित कर दिया। जिससे गीता देवी प्रधान पद से बर्खास्त हो गई हैं, बूंदा देवी हरगोविंदपुर की नई ग्राम प्रधान बन गई हैं। हालांकि गीता देवी ने इस आदेश को पक्षपात पूर्ण बताते हुए डिस्ट्रिक न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।
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हरगोविंदपुर ग्राम पंचायत का प्रधान पद अनुसूचित जाति महिला पद के लिए आरक्षित है। इसमें पांच दिसंबर-2015 को मतदान हुआ था। यहां से सात प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। इसमें 13 दिसंबर-2015 को मतगणना हुई। कुल मत 884 पड़े थे, जिसमें गीता देवी को 207 व बूंदा देवी को 149 मत मिले थे। 58 मतों से गीता देवी को प्रधान निर्वाचित घोषित किया गया था। इसके बाद दूसरे स्थान पर बूंदा देवी ने उप जिला मजिस्ट्रेट गुन्नौर के न्यायालय में रिट पिटीशन दायर करके गीता देवी के जाति प्रमाणपत्र को चुनौती दी थी।
आरोप लगाया गया था कि गीता देवी अनुसूचित जाति की न होकर अहेरिया जाति की हैं, जोकि सामान्य श्रेणी में है। मायके से पासी जाति का गलत तरीके से प्रमाणपत्र बनवाकर उन्होंने चुनाव लड़ा है। इस पर सुनवाई हुई, दोनों पक्षों से मिले साक्ष्यों के आधार पर उप जिला मजिस्ट्रेट गुन्नौर प्रतिपाल सिंह चौहान ने 25 अक्तूबर को आदेश सुनाया। इसमें बूंदा देवी के आरोपों को सही पाते हुए गीता देवी का नामांकन रद्द कर दिया। इसके साथ ही पंचायत राज अधिनियम-12सी के तहत दूसरे नंबर पर रही बूंदा देवी को ग्राम प्रधान घोषित कर दिया है।
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हालांकि 21 अक्तूबर को गीता देवी ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई थी कि उन्हें एसडीएम गुन्नौर से न्याय की उम्मीद नहीं है, उनके मामले की सुनवाई, किसी अन्य एसडीएम कोर्ट में कराई जाए। जिलाधिकारी ने एसडीएम गुन्नौर से 22 से 28 अक्तूबर तक इस मामले की पत्रावलियां अपने कार्यालय भेजने के निर्देश दिए थे लेकिन इसे दरकिनार करके एसडीएम गुन्नौर ने 25 अक्तूबर को आदेश पारित कर दिया। जिससे गीता देवी प्रधान पद से बर्खास्त हो गई हैं, बूंदा देवी हरगोविंदपुर की नई ग्राम प्रधान बन गई हैं। हालांकि गीता देवी ने इस आदेश को पक्षपात पूर्ण बताते हुए डिस्ट्रिक न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।
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