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किसौली गांव में बुखार का प्रकोप, दो सप्ताह में दस लोगों की मौत
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संभल। गांव किसौली में डेंगू-मलेरिया और वायरल बुखार का प्रकोप है। ग्रामीणों का दावा है कि दो हफ्ते में दस लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है और फिलहाल गांव में बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही और ग्रामीणों की बढ़ती मुश्किलों के चलते ग्रामीणों ने आक्त्रसेश जाहिर करते हुए ग्राम पंचायत और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शन की जानकारी जिम्मेदारों को हुई तो फॉगिंग कराई गई और स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया। पांच लोग डेंगू से पीड़ित मिले हैं।
किसौली गांव की आबादी करीब 15 हजार से अधिक है। इसकी सफाई व्यवस्था के लिए एक ही सफाई कर्मचारी की तैनाती है। इससे गंदगी के ढेर लगे हैं। गंदगी होने से ही मच्छर पनप रहे हैं। बुधवार की रात किसौली निवासी सुरेंद्र यादव (45) पुत्र महेंद्र यादव की बुखार से उपचार के दौरान संभल के निजी अस्पताल में मौत हो गई। मृतक की पत्नी गुड्डू देवी ने बताया कि पिछले चार दिन से बुखार होने पर उपचार चल रहा था।
बताते चले कि गांव से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। प्रदर्शन करने वालों में राजेश कुमारए कल्लू सिंहए अखिलेश कुमारए जयपाल यादवए प्रेमपाल यादवए जगतपाल यादवए रमेश चंदए गौरव यादवए सोमवीर सिंहए सूखे सिंहए उदय पालए भूरे सिंह, मनीष यादव, राहुल यादव, भोला, आदित्य यादव, अवनीश कुमार आदि रहे। वहीं ग्रामीणों के आक्रोश की जानकारी सीएचसी पवांसा के प्रभारी को हुई तो उन्होंने टीम भेजकर जांच कराई।
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69 लोग बुखार से पीड़ित मिले। जिसमें पांच लोग पीड़ित मिले हैं। गांव बड़ा है इसलिए कई दिन तक शिविर लगाया जाएगा। ग्राम पंचायत अधिकारी भी फॉगिंग कराई है।
पिछले दो हफ्ते में बुखार की चपेट में आने से गांव के दस लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। अभी भी गांव में करीब 300 लोग बुखार की चपेट में हैं।
मुनेश यादव, किसौली
बुखार की चपेट में आने से गांव के लोगों की मौत होने की सूचना गांव में तैतान आशा और एएनएम ने भी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी। ऐसे में इन लोगों का क्या फायदा है। गांव में तमाम गंदगी और कीचड़ है। कूड़े के ढेर लगे हैं। महीने में दस दिन ही सफाई कर्मचारी गांव में साफ सफाई के लिए आता है। वेतन पूरे महीने का मिल रहा है।
सूखे सिंह, किसौली
वर्ष 2009 में 15 लाख रुपये की कीमत से स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया। मगर ग्रामीणों को उपचार बीते 11 वर्षों में नहीं मिला। इस ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी ध्यान नहीं दिया ऐसे स्वास्थ्य उपकेंद्र का क्या फायदा।
सोनू यादव, किसौली
बुखार से गांव में मौत हो जाने के बाद अब ग्रामीण एक दूसरे से बात करने में भी परेह कर रहे हैं। गांव में करीब अभी भी 300 लोगों से अधिक वायरल बुखार की चपेट में हैं। ज्यादातर लोगों का उपचार संभल और बहजोई के निजी अस्पताल में ही चल रहा है। लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।
भोला, किसौली
बुखार का प्रकोप गांव में बना हुआ है। कुछ ही दिनों बुखार से 10 लोगों की मौत होने की जानकारी भी गुरुवार की दोपहर मिली है। गांव में फॉगिंग कराई गई है और शुक्रवार को तीन अतिरिक्त सफाई कर्मचारी लगाकर सफाई कराई जाएगी।
अवनीश उपाध्याय, ग्राम पंचायत सचिव, गांव किसौली
सूचना मिलने पर गांव किसौली में स्वास्थ्य शिविर लगवाया गया था। पांच लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। कुल 69 लोग बुखार से पीड़ित मिले हैं। अन्य बीमारियों से भी पीड़ित लोग हैं। गांव बड़ा है इसलिए लगातार शिविर लगवाया जाएगा। जिससे बुखार की स्थिति को काबू किया जा सके। दस लोगों की मौत होने की जानकारी मुझे नहीं है।
डॉण् मनोज कुमार, सीएचसी प्रभारी, पवांसा
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किसौली गांव की आबादी करीब 15 हजार से अधिक है। इसकी सफाई व्यवस्था के लिए एक ही सफाई कर्मचारी की तैनाती है। इससे गंदगी के ढेर लगे हैं। गंदगी होने से ही मच्छर पनप रहे हैं। बुधवार की रात किसौली निवासी सुरेंद्र यादव (45) पुत्र महेंद्र यादव की बुखार से उपचार के दौरान संभल के निजी अस्पताल में मौत हो गई। मृतक की पत्नी गुड्डू देवी ने बताया कि पिछले चार दिन से बुखार होने पर उपचार चल रहा था।
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बताते चले कि गांव से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। प्रदर्शन करने वालों में राजेश कुमारए कल्लू सिंहए अखिलेश कुमारए जयपाल यादवए प्रेमपाल यादवए जगतपाल यादवए रमेश चंदए गौरव यादवए सोमवीर सिंहए सूखे सिंहए उदय पालए भूरे सिंह, मनीष यादव, राहुल यादव, भोला, आदित्य यादव, अवनीश कुमार आदि रहे। वहीं ग्रामीणों के आक्रोश की जानकारी सीएचसी पवांसा के प्रभारी को हुई तो उन्होंने टीम भेजकर जांच कराई।
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69 लोग बुखार से पीड़ित मिले। जिसमें पांच लोग पीड़ित मिले हैं। गांव बड़ा है इसलिए कई दिन तक शिविर लगाया जाएगा। ग्राम पंचायत अधिकारी भी फॉगिंग कराई है।
पिछले दो हफ्ते में बुखार की चपेट में आने से गांव के दस लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। अभी भी गांव में करीब 300 लोग बुखार की चपेट में हैं।
मुनेश यादव, किसौली
बुखार की चपेट में आने से गांव के लोगों की मौत होने की सूचना गांव में तैतान आशा और एएनएम ने भी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी। ऐसे में इन लोगों का क्या फायदा है। गांव में तमाम गंदगी और कीचड़ है। कूड़े के ढेर लगे हैं। महीने में दस दिन ही सफाई कर्मचारी गांव में साफ सफाई के लिए आता है। वेतन पूरे महीने का मिल रहा है।
सूखे सिंह, किसौली
वर्ष 2009 में 15 लाख रुपये की कीमत से स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया। मगर ग्रामीणों को उपचार बीते 11 वर्षों में नहीं मिला। इस ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी ध्यान नहीं दिया ऐसे स्वास्थ्य उपकेंद्र का क्या फायदा।
सोनू यादव, किसौली
बुखार से गांव में मौत हो जाने के बाद अब ग्रामीण एक दूसरे से बात करने में भी परेह कर रहे हैं। गांव में करीब अभी भी 300 लोगों से अधिक वायरल बुखार की चपेट में हैं। ज्यादातर लोगों का उपचार संभल और बहजोई के निजी अस्पताल में ही चल रहा है। लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।
भोला, किसौली
बुखार का प्रकोप गांव में बना हुआ है। कुछ ही दिनों बुखार से 10 लोगों की मौत होने की जानकारी भी गुरुवार की दोपहर मिली है। गांव में फॉगिंग कराई गई है और शुक्रवार को तीन अतिरिक्त सफाई कर्मचारी लगाकर सफाई कराई जाएगी।
अवनीश उपाध्याय, ग्राम पंचायत सचिव, गांव किसौली
सूचना मिलने पर गांव किसौली में स्वास्थ्य शिविर लगवाया गया था। पांच लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। कुल 69 लोग बुखार से पीड़ित मिले हैं। अन्य बीमारियों से भी पीड़ित लोग हैं। गांव बड़ा है इसलिए लगातार शिविर लगवाया जाएगा। जिससे बुखार की स्थिति को काबू किया जा सके। दस लोगों की मौत होने की जानकारी मुझे नहीं है।
डॉण् मनोज कुमार, सीएचसी प्रभारी, पवांसा