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Sambhal News: बच्चों को हलाल रिस्क खिलाओ, ताकि वह गुनाहों से बच सकें
Sat, 29 Mar 2025 12:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:50 AM IST
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सिरसी।
सिरसी के इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सय्यद फैजान रजा नकवी ने कहा कि जो नेक काम हमने रमजान महीने में किए हैं, वही काम पूरे साल करने चाहिए। कहा कि रमजान मुबारक का महीना खत्म होने वाला है। इस महीने हमने रोजे रखे और अल्लाह की इबादत की साथ ही जरूरतमंद लोगों की मदद भी। रमजान के बाद हमारे अंदर कितना बदलाव आया है यह देखना है। कहा कि इंसान को सुबह उठना चाहिए और फिर हलाल रोजी की तलाश में निकलना चाहिए। अपने बच्चों को ईमानदारी की कमाई का खिलाओ, जिससे वह गुनाहों से बचे और वह एक अच्छे समाज का निर्माण करें। कहा कि हजरत अली से किसी ने पूछा कि मौला हमें कैसे पता चले कि हमारी नमाज कबूल हुई या नहीं। हजरत अली ने कहा कि अगर सब वक्तों की नमाजों के बीच तुमसे कोई गुनाह नहीं हुआ है, तो समझ लेना तुम्हारी नमाज कबूल है।
मजलिस के अंत में मसाहिब बयान करते हुए कहा कि मस्जिदे कूफा में रमजान के महीने में हजरत अली के सिर पर नमाज पढ़ते हुए जालिम ने जहर में भीगी हुई तलवार से वार करके उन्हें शहीद कर दिया था। इसके बाद दस मोहर्रम को कर्बला के मैदान में उनके बेटे हजरत इमाम हुसैन को यजीद की जालिम फौज ने तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया था, यह सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं। मर्सिया अली कबीर उर्फ अजमल व उनके साथियों ने पढ़ा।
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सिरसी के इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सय्यद फैजान रजा नकवी ने कहा कि जो नेक काम हमने रमजान महीने में किए हैं, वही काम पूरे साल करने चाहिए। कहा कि रमजान मुबारक का महीना खत्म होने वाला है। इस महीने हमने रोजे रखे और अल्लाह की इबादत की साथ ही जरूरतमंद लोगों की मदद भी। रमजान के बाद हमारे अंदर कितना बदलाव आया है यह देखना है। कहा कि इंसान को सुबह उठना चाहिए और फिर हलाल रोजी की तलाश में निकलना चाहिए। अपने बच्चों को ईमानदारी की कमाई का खिलाओ, जिससे वह गुनाहों से बचे और वह एक अच्छे समाज का निर्माण करें। कहा कि हजरत अली से किसी ने पूछा कि मौला हमें कैसे पता चले कि हमारी नमाज कबूल हुई या नहीं। हजरत अली ने कहा कि अगर सब वक्तों की नमाजों के बीच तुमसे कोई गुनाह नहीं हुआ है, तो समझ लेना तुम्हारी नमाज कबूल है।
मजलिस के अंत में मसाहिब बयान करते हुए कहा कि मस्जिदे कूफा में रमजान के महीने में हजरत अली के सिर पर नमाज पढ़ते हुए जालिम ने जहर में भीगी हुई तलवार से वार करके उन्हें शहीद कर दिया था। इसके बाद दस मोहर्रम को कर्बला के मैदान में उनके बेटे हजरत इमाम हुसैन को यजीद की जालिम फौज ने तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया था, यह सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं। मर्सिया अली कबीर उर्फ अजमल व उनके साथियों ने पढ़ा।
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