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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   During the trial of Mulla Afroz and Ghulam Ali, there was a scuffle between the government lawyer and the Jama Masjid chief.

Sambhal News: मुल्ला अफरोज और गुलाम अली के मुकदमे के दौरान शासकीय अधिवक्ता व जामा मस्जिद सदर में नोकझोंक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 01:47 AM IST
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During the trial of Mulla Afroz and Ghulam Ali, there was a scuffle between the government lawyer and the Jama Masjid chief.
चंदौसी(संभल)। जिला न्यायालय में संभल हिंसा में मारे गए अयान की हत्या के मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज और गुलाम के खिलाफ वादी की गवाही के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर अधिवक्ता जफर अली और जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राहुल दीक्षित के बीच तीखी नोकझोंक हुई। डीजीसी ने सदर की ओर से मुल्ला अफरोज की पैरवी को लेकर न्यायालय में वकालतनामा लगाए जाने का विरोध किया। वहीं, जफर अली का कहना था कि वह अधिवक्ता हैं और किसी भी मुकदमे की पैरवी कर सकत हैं। डीजीसी का कहना है कि वकालतनामा लगाने वाले अधिवक्ता स्वयं संभल हिंसा को भड़काने के मामले में आरोपी हैं और हाईकोर्ट से सशर्त जमानत पर हैं। वह पैरवी नहीं कर सकते।
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जानकारी के अनुसार संभल हिंसा में हुई अयान की हत्या के मामले में उसके भाई कामिल की ओर से थाना संभल में दर्ज मुल्ला अफरोज और गुलाम के खिलाफ मुकदमा जिला न्यायाधीश के न्यायालय में चल रहा है। अभियोजन पक्ष के जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि शुक्रवार को न्यायालय में एवीडेंस की फाइल नियत थी। वादी कामिल की गवाही होनी थी।
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इसी दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली न्यायालय में पहुंच गए और जिरह सुनने लगे। उनको देखकर शासकीय अधिवक्ता ने विरोध किया। कहा कि साक्ष्य को प्रभावित करने के लिए जफर अली यहां नहीं बैठ सकते। इसी बात को लेकर जफर अली और राहुल दीक्षित के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। कुछ देर बाद इंतजामिया कमेटी के सदर अधिवक्ता जफर अली ने उक्त मुकदमे के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज की ओर से बहस करने की अनुमति के लिए वकालतानामा न्यायालय में लगा दिया।
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डीजीसी द्वारा वकालतनामा लगाए जाने का विरोध करते हुए कहा गया कि जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली खुद ही संभल हिंसा को भड़काने के आरोप में आरोपी है। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है और जेल भी जा चुके हें। उच्च न्यायालय ने सशर्त जमानत दी है। इस शर्त पर जमानत दी है कि जफर अली किसी भी मुकदमे में साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं कर सकते। इसी बात पर दोनों के बीच फिर से तीखी नोकझोंक हुई। वहीं इस मामले में डीजीसी ने न्यायालय में जफर अली को पैरवी की अनुमति न देने के लिए न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया है।
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इस मामले में आरोपी हैं इंतजामिया कमेटी के सदर
डीजीसी राहुल दीक्षित ने बताया कि जामा मस्जिद के इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली के खिलाफ संभल हिंसा को भड़काने के आरोप में थाना संभल में मुकदमा अपराध संख्या 335/2024 के खिलाफ संभल हिंसा को भड़काने के आरोप में 191(2), 193(3), 190, 221, 132, 125, 326, 324(5), 196, 223(ख) बीएनएस व 3/4 लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है। यह राजनीतिक लाभ लेने के लिए दूसरे मुकदमों में साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि इनके खिलाफ मजबूती से पैरवी की जाएगी। मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है।

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मैं एक अधिवक्ता हूं। अपने मुकदमे समेत किसी भी मुकदमे में पैरवी कर सकता हूं। मैं वहां खड़ा था। मेरा गवाह और मुल्जिम से कोई मतलब नहीं था। डीजीसी ने बेवजह विरोध किया कि मेरे यहां रहने से मामला गड़बड़ा जाता है। मैं वहां बैठ गया। मुल्जिम की ओर से पैरवी पत्र लगाया, जिसका डीजीसी ने विरोध किया। डीजीसी ने मेरे साथ संसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया। शुरुआत डीजीसी ने की थी।
-जफर अली, सदर, जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी
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