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Sambhal News: जिला अस्तपाल में नहीं हो रहे मोतियाबिंद के आपरेशन
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संभल। जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के होने के बावजूद मरीज अस्पताल से लौटने के लिए मजबूर हैं। मानक के अनुसार आपरेशन थियेटर, फेको मशीन और अन्य उपकरण नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं किए जा रहे। मरीजों को मुरादाबाद रेफर भी करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में रोजाना आंखों की बीमारी से संबंधित करीब 60 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें मोतियाबिंद के भी 10 से 12 मरीज आ जाते हैं। वैसे मरीजों नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार सिंह देखकर उपचार करते हैं लेकिन मोतियाबिंद के आपरेशन से संबंधित मरीजों को मुरादाबाद रेफर कर दिया जाता है। इसकी वजह यह है कि अस्पताल में ऐसे मरीजों के आपरेशन नहीं हो रहे हैं।
डॉ. राजेश कुमार सिंह का कहना है कि अस्पताल में मानक के अनुसार ओटी नहीं है। माइक्रोस्कोप भी नहीं है। ऑपरेशन करने में सहायक उपकरण की उपलब्धता भी नहीं है। जो मरीज मोतियाबिंद के आते हैं उन्हें मुरादाबाद भेजना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ओटी का कमरा थोड़ा बड़ा होना चाहिए। यहां जो कमरा दिया गया है उसमें बेड और कुर्सी डालने पर दो पार्ट में बंट जाता है। चलने-फिरने की जगह नहीं रहती है। इसके लिए करीब चार पांच बार अधिकारियों को पत्र दिया जा चुका है।
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फेको मशीन के लिए हर एक महीने शासन को पत्राचार किया जा रहा है। डॉक्टर का कहना है कि मशीन आने पर ही ऑपरेशन शुरू हो सकेंगे। मशीन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. राजेंद्र सैनी, कार्यवाहक सीएमएस जिला अस्पताल संभल
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जिला अस्पताल में रोजाना आंखों की बीमारी से संबंधित करीब 60 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें मोतियाबिंद के भी 10 से 12 मरीज आ जाते हैं। वैसे मरीजों नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार सिंह देखकर उपचार करते हैं लेकिन मोतियाबिंद के आपरेशन से संबंधित मरीजों को मुरादाबाद रेफर कर दिया जाता है। इसकी वजह यह है कि अस्पताल में ऐसे मरीजों के आपरेशन नहीं हो रहे हैं।
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डॉ. राजेश कुमार सिंह का कहना है कि अस्पताल में मानक के अनुसार ओटी नहीं है। माइक्रोस्कोप भी नहीं है। ऑपरेशन करने में सहायक उपकरण की उपलब्धता भी नहीं है। जो मरीज मोतियाबिंद के आते हैं उन्हें मुरादाबाद भेजना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ओटी का कमरा थोड़ा बड़ा होना चाहिए। यहां जो कमरा दिया गया है उसमें बेड और कुर्सी डालने पर दो पार्ट में बंट जाता है। चलने-फिरने की जगह नहीं रहती है। इसके लिए करीब चार पांच बार अधिकारियों को पत्र दिया जा चुका है।
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फेको मशीन के लिए हर एक महीने शासन को पत्राचार किया जा रहा है। डॉक्टर का कहना है कि मशीन आने पर ही ऑपरेशन शुरू हो सकेंगे। मशीन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. राजेंद्र सैनी, कार्यवाहक सीएमएस जिला अस्पताल संभल