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ओवरलोडिंग पर शिकंजा, ट्रांसपोर्ट कारोबार थमा
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Fri, 21 Apr 2017 12:48 AM IST
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संभल में मुरादाबाद रोड पर सड़क किनारे खाली खड़े ट्रक। अमर उजाला
- फोटो : amar ujala
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अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबार थम गया है। वर्तमान में 10-15 प्रतिशत ट्रक की चल रहे हैं। संभल की बात करें तो 100 से अधिक ट्रक खड़े हो गए हैं। मंडल की बात करें तो 300-400 ट्रक आफलाइन हैं। इन ट्रकों के मालिक अब दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं।
कुछ ट्रकों के मालिक वेट ऐंड वोच की स्थिति में हैं। इसलिए उनके ट्रक खड़े हो गए हैं। निर्माण इंडस्ट्री पर भी असर आया है। बजरी और बजरफुट के दाम बढ़ गए हैं। बिक्री घट गई है। बाजार में बजरी और बजरफुट के बायर्स न मिलने से तमाम ट्रक आपरेटर्स ने अपने ट्रक खड़े कर दिए हैं। वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।
ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री पर फिलहाल योगी सरकार का इंपैक्ट है। ओवरलोडिंग पर लगाम लग चुकी है। एंट्री फीस वसूलकर खुलेआम ओवरलोडिंग कराने वाले अफसर सकते में हैं। सरकार का रुख भांपने की कोशिश हो रही है। वहीं ट्रक आपरेटर वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। अधिकतर ट्रक जो उत्तराखंड से 45-50 मीट्रिक बजरी और बजरफुट भरकर लाते थे वे अब 15 टन माल ला रहे हैं।
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ट्रक आपरेटर्स ने बताया कि 45-50 मीट्रिक टन बजरफुट 30,000-35,000 रुपये तक में बिक जाता था। इस माल की बिक्री से एक चक्कर में ट्रक को एक चक्कर में तीन से पांच हजार रुपये तक की बचत होती थी और ट्रक का मेंटीनेंस करके कुछ पैसा बचाना आसान हो जाता था। लेकिन जब से ओवरलोडिंग बंद हुई है।
एक ट्रक में 15 टन बजट फुट आ रहा है। इसकी बिक्री 18,000-20,000 में हो रही है। अब इसमें खर्चे निकाल पाना भी कठिन हो गया है। वहीं बजरी बजरफुट के दाम भी बढ़ गए हैं। बिक्री घट गई है. जो बजरफुट फुटकर में 70-75 रुपये क्विंटल बिकता था वह बजरफुट अब 120-125 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे निर्माण लागत बढ़ गई है।
तमाम लोगों ने निर्माण रोक दिए हैं। वे भाव घटने का इंतजार कर रहे हैं जबकि डिमांड घटने से ट्रकों का संचालन प्रभावित हुआ है। संभल से 150 ट्रक रोजना बजरी बजर फुट लाते थे और आसपास के जनपदों में आपूर्ति करते थे जबकि मंडल से 500-600 ट्रक उत्तराखंड से बजरी बजरफुट लाने में लगे थे लेकिन जब से ओवरलोडिंग रोकी गई गई है। इस संबंध में ट्रांसपोर्ट कारोबारी कपिल सिंघल ने कहा कि अभी बजरी बजरफुट महंगे दाम पर बहुत कम लोग खरीद रहे हैं। आने वाले समय में डिमांड निकलेगी तो अंडरलोड ट्रकों को भी औसत लग जाएगा।
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कुछ ट्रकों के मालिक वेट ऐंड वोच की स्थिति में हैं। इसलिए उनके ट्रक खड़े हो गए हैं। निर्माण इंडस्ट्री पर भी असर आया है। बजरी और बजरफुट के दाम बढ़ गए हैं। बिक्री घट गई है। बाजार में बजरी और बजरफुट के बायर्स न मिलने से तमाम ट्रक आपरेटर्स ने अपने ट्रक खड़े कर दिए हैं। वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।
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ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री पर फिलहाल योगी सरकार का इंपैक्ट है। ओवरलोडिंग पर लगाम लग चुकी है। एंट्री फीस वसूलकर खुलेआम ओवरलोडिंग कराने वाले अफसर सकते में हैं। सरकार का रुख भांपने की कोशिश हो रही है। वहीं ट्रक आपरेटर वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। अधिकतर ट्रक जो उत्तराखंड से 45-50 मीट्रिक बजरी और बजरफुट भरकर लाते थे वे अब 15 टन माल ला रहे हैं।
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ट्रक आपरेटर्स ने बताया कि 45-50 मीट्रिक टन बजरफुट 30,000-35,000 रुपये तक में बिक जाता था। इस माल की बिक्री से एक चक्कर में ट्रक को एक चक्कर में तीन से पांच हजार रुपये तक की बचत होती थी और ट्रक का मेंटीनेंस करके कुछ पैसा बचाना आसान हो जाता था। लेकिन जब से ओवरलोडिंग बंद हुई है।
एक ट्रक में 15 टन बजट फुट आ रहा है। इसकी बिक्री 18,000-20,000 में हो रही है। अब इसमें खर्चे निकाल पाना भी कठिन हो गया है। वहीं बजरी बजरफुट के दाम भी बढ़ गए हैं। बिक्री घट गई है. जो बजरफुट फुटकर में 70-75 रुपये क्विंटल बिकता था वह बजरफुट अब 120-125 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे निर्माण लागत बढ़ गई है।
तमाम लोगों ने निर्माण रोक दिए हैं। वे भाव घटने का इंतजार कर रहे हैं जबकि डिमांड घटने से ट्रकों का संचालन प्रभावित हुआ है। संभल से 150 ट्रक रोजना बजरी बजर फुट लाते थे और आसपास के जनपदों में आपूर्ति करते थे जबकि मंडल से 500-600 ट्रक उत्तराखंड से बजरी बजरफुट लाने में लगे थे लेकिन जब से ओवरलोडिंग रोकी गई गई है। इस संबंध में ट्रांसपोर्ट कारोबारी कपिल सिंघल ने कहा कि अभी बजरी बजरफुट महंगे दाम पर बहुत कम लोग खरीद रहे हैं। आने वाले समय में डिमांड निकलेगी तो अंडरलोड ट्रकों को भी औसत लग जाएगा।