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अभी नहीं आया कोई मोबाइल एटीएम, न पेट्रोल पंप पर कैश
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sat, 19 Nov 2016 01:50 AM IST
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जो इलाके बैंको से दूर हैं वहां पर लोग अपनी पुरानी करेंसी हाथ में होने के वावजूद रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए तरस रहे हैं।
जिले का असमोली, कुढ़फतहेगढ़, जुनावाई, रजपुरा, गु्न्नौर और पवांसा ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर अभी तक पर्याप्त बैंकिंग सेवाएं नहीं हैं। नतीजा लोग परेशान हैं। इनके लिए बैंकिंग का विकल्प बैंक मित्र बन सकते थे। लेकिन इन्हें अभी तक इस संकट के मौके पर कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। न तो करेंसी एक्सचेंज बैंक मित्रों के काउंटर से हो रहा है और न ही कैश जमा हो रहा है। एसबीआई असमोली के बैंक मित्र प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक उनके पास एक्सचेंज के लिए बैंक से करेंसी नहीं आई है।
तमाम गांवों के लोग आते हैं और लौट जाते हैं। इसी तरह से बुकनाला के निवासी बैंक मित्र शकील अहमद ने बताया कि वह मढ़न में प्रथमा बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र चलाते हैं लेकिन अभी तक करेंसी नहीं मिली है।
संभल। भारतीय किसान यूनियन असली की बैठक हिसामपुर गांव में हुई। बैठक में किसानों ने ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में नई करेंसी न मिलने पर रोष व्यक्त किया। जिला महासचिव संजीव गांधी ने कहा कि ग्रामीण बैंकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। किसान को इस समय गेहूं की बुवाई करने के लिए रुपये की जरुरत है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में नोट बंदी के बाद से मात्र एक बार ही रुपये मिले है। उन्होंने कहा कि खिरनी बिजली घर की क्षमता वृद्घि भदरौला तक नई लाइन बनने का प्रस्ताव पास होना भाकियू की बड़ी जीत है। दिलदार हुसैन, अमर सिंह देवल, दीपक शर्मा, हाजी महबूब अली, जसवीर यादव, यशपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, हरिओम रहे।
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एलडीएम सतीश कुमार ने बताया कि सिंडीकेट बैंक का मोबाइल एटीएम लखनऊ से आना है। उसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत चल रही है। इसी तरह अन्य बैंकों को भी शहरों से एटीएम की मोबाइल वैन मंगवानी है जिसके लिए बैंकर्स प्रयास कर रहे हैं उन्होंने बताया कि गांवों में बैंकों के बिजनेस कॉरेसपांडेंड हैं और इनके माध्यम से गांवों में बैंकों को सेवाएं देनी हैं। सिंडीकेट बैंक के 11 बैंक मित्र हैं सभी को एक दिन के लिए 10,000- 10,000 रुपये कैश दिया जा रहा है। बाकी बैंकों को भी गाइडलाइन फॉलो करनी है।
चंदौसी। नोटबंदी के बाद लोगों की मुश्किलों को कम करने के लिए हुई महत्वपूर्ण घोषणाओं पर अमल होते नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को शादी के लिए ढाई लाख रुपये की निकासी और पेट्रोल पंपों पर नगदी मिलने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। किसी पर कैश मशीन ही नहीं लगी है। राहत मिलने की बात तो दूर बैंकों ने नोट बदलने के लिए साढ़े चार हजार रुपये की राशि को घटाकर दो हजार कर दिया। पेट्रोल पंपों पर भी पांच सौ - हजार रुपये के नोट नहीं लिए गए। कई बैंकों में नगदी नहीं होने के कारण केवल जमा करने का कार्य हुआ। स्टेट बैंक आफ इंडिया की मुख्य ब्रांच में नोट बदलने के लिए सुबह से ही लंबी कतारों का नजारा दिखा। हर तरफ नगदी के लिए मारा मारी दिखी।
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जिले का असमोली, कुढ़फतहेगढ़, जुनावाई, रजपुरा, गु्न्नौर और पवांसा ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर अभी तक पर्याप्त बैंकिंग सेवाएं नहीं हैं। नतीजा लोग परेशान हैं। इनके लिए बैंकिंग का विकल्प बैंक मित्र बन सकते थे। लेकिन इन्हें अभी तक इस संकट के मौके पर कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। न तो करेंसी एक्सचेंज बैंक मित्रों के काउंटर से हो रहा है और न ही कैश जमा हो रहा है। एसबीआई असमोली के बैंक मित्र प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक उनके पास एक्सचेंज के लिए बैंक से करेंसी नहीं आई है।
तमाम गांवों के लोग आते हैं और लौट जाते हैं। इसी तरह से बुकनाला के निवासी बैंक मित्र शकील अहमद ने बताया कि वह मढ़न में प्रथमा बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र चलाते हैं लेकिन अभी तक करेंसी नहीं मिली है।
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संभल। भारतीय किसान यूनियन असली की बैठक हिसामपुर गांव में हुई। बैठक में किसानों ने ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में नई करेंसी न मिलने पर रोष व्यक्त किया। जिला महासचिव संजीव गांधी ने कहा कि ग्रामीण बैंकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। किसान को इस समय गेहूं की बुवाई करने के लिए रुपये की जरुरत है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में नोट बंदी के बाद से मात्र एक बार ही रुपये मिले है। उन्होंने कहा कि खिरनी बिजली घर की क्षमता वृद्घि भदरौला तक नई लाइन बनने का प्रस्ताव पास होना भाकियू की बड़ी जीत है। दिलदार हुसैन, अमर सिंह देवल, दीपक शर्मा, हाजी महबूब अली, जसवीर यादव, यशपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, हरिओम रहे।
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एलडीएम सतीश कुमार ने बताया कि सिंडीकेट बैंक का मोबाइल एटीएम लखनऊ से आना है। उसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत चल रही है। इसी तरह अन्य बैंकों को भी शहरों से एटीएम की मोबाइल वैन मंगवानी है जिसके लिए बैंकर्स प्रयास कर रहे हैं उन्होंने बताया कि गांवों में बैंकों के बिजनेस कॉरेसपांडेंड हैं और इनके माध्यम से गांवों में बैंकों को सेवाएं देनी हैं। सिंडीकेट बैंक के 11 बैंक मित्र हैं सभी को एक दिन के लिए 10,000- 10,000 रुपये कैश दिया जा रहा है। बाकी बैंकों को भी गाइडलाइन फॉलो करनी है।
चंदौसी। नोटबंदी के बाद लोगों की मुश्किलों को कम करने के लिए हुई महत्वपूर्ण घोषणाओं पर अमल होते नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को शादी के लिए ढाई लाख रुपये की निकासी और पेट्रोल पंपों पर नगदी मिलने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। किसी पर कैश मशीन ही नहीं लगी है। राहत मिलने की बात तो दूर बैंकों ने नोट बदलने के लिए साढ़े चार हजार रुपये की राशि को घटाकर दो हजार कर दिया। पेट्रोल पंपों पर भी पांच सौ - हजार रुपये के नोट नहीं लिए गए। कई बैंकों में नगदी नहीं होने के कारण केवल जमा करने का कार्य हुआ। स्टेट बैंक आफ इंडिया की मुख्य ब्रांच में नोट बदलने के लिए सुबह से ही लंबी कतारों का नजारा दिखा। हर तरफ नगदी के लिए मारा मारी दिखी।