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Sambhal News: फर्जी बीमा कराकर रकम हड़पने वाले गिरोह का सदस्य गिरफ्तार, जेल भेजा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:13 AM IST
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A member of a gang involved in fraudulent insurance fraud has been arrested and sent to jail.
जुनावई(संभल)। फर्जी बीमा पॉलिसी करने वाले अंतर राज्यीय गिरोह का सफाया करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा चलाई जा रही मुहिम के तहत गिरोह के सदस्य थाना क्षेत्र के ग्राम तोतापुर निवासी हरिओम को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब तक इस मामले में दर्जनों लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
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तोतापुर गांव का रहने वाला फर्जी बीमा गिरोह का सदस्य हरिओम यादव बबराला थाना क्षेत्र के फरीदपुर के रहने वाले सचिन शर्मा के साथ रहकर फर्जी बीमा करने का काम करता था। थाना प्रभारी अखिलेश प्रधान ने बताया कि छह महीने पहले हरिओम का नाम प्रकाश में आया था, तभी इसकी तलाश जारी थी। यह फरार चल रहा था। पकड़े जाने पर इसने सचिन शर्मा के साथ काम करने की बात स्वीकार की। बीमा पॉलिसी को लेकर जो भी कागजात थे उन्हें इसने खुर्दबुर्द कर दिया।
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गिरोह में काफी लोग जुड़े हैं जो सुनियोजित तरीके से गरीब लोगों को माध्यम बनाते हुए फर्जी बीमा पॉलिसी करके विभिन्न जीवन बीमा कंपनी जैसे आईसीआईसीआई, पीएनबी मेटालाइफ, बजाज एलाइंस, एसबीआई, एलआईसी आदि को को आर्थिक हानि पहुंचाते हैं और बीमा का सारा पैसा हड़प लेते हैं।
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मरणासन्न लोगों की तलाश में रहते गिरोह के सदस्य
गिरोह के सदस्य मरणासन्न स्थिति में होने वाले लोगों की तलाश में रहते हैं, जो कि बीमारी की वजह से मरणासन्न स्थिति में होते है। ऐसे व्यक्तियों के परिवार वालों से बात कर मरणासन्न व्यक्तियों को स्वस्थ दिखाते हुए फर्जी तरीके से इनकी जीवन बीमा पॉलिसी कराई जाती है। यह लोग अक्सर गरीब होते है इनका प्रीमियम गिरोह के लोगों द्वारा ही भरा जाता है। इन लोगों को ज्यादा प्रीमियम नहीं भरना पड़ता क्योंकि यह लोग जल्दी मर जाते है और मरने के बाद ये सभी क्लेम का पैसा बांट लेते हैं।

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नॉमिनी के खाते का संचालन भी गिरोह के लोग करते
जो व्यक्ति मर गया हो उनकी भी बैक डेट में फर्जी तरीके से पॉलिसी कराकर उनका जो बीमा क्लेम का रुपया मिलता है, उसे भी आपस में बांट लेते हैं। दोनों ही स्थिति में नॉमिनी का जो खाता खुलवाया जाता है। उन खातों का संचालन गिरोह के सदस्यों द्वारा ही किया जाता है। खातों के एटीएम कार्ड इन्हीं के पास रहते हैं और खातों में मोबाइल नंबर भी इनका लिखा होता है। बीमित व्यक्ति की मौत के बाद जब बीमा का पैसा खातों में आता है तो उसमें कुछ हिस्सा यह लोग परिवार को दे देते हैं, बाकी समस्त राशि आपस में बांट लेते है। अगर परिवार नहीं पूछता है तो कोई भी राशि परिवार को नहीं देते हैं।
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