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Sambhal News: 250 वर्ष पुराना मौलागढ़ स्थित कंकाली देवी का मंदिर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 15 Oct 2023 01:06 AM IST
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250 years old Kankali Devi temple located in Maulagarh
चंदौसी। नगर से सटे गांव मौलागढ़ में प्राचीन कंकाली माता का मंदिर है। यह मंदिर 250 वर्ष पुराना है। मंदिर में देवी मां पिंडी के स्वरूप में विराजमान हैं। माता की यह पिंडी राजस्थान के माउंट आबू से लाकर स्थापित की गई है। यहां दूर-दूर से लोग नवरात्रि के अवसर पर आते हैं। नौ दिन तक मंदिर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। भक्त माता रानी से अपने परिवार के कल्याण के लिए मन्नतें मांगते हैं। साथ ही अपनी मनोवांछित इच्छा पूरी होने पर देवी को भोग लगाते हैं।
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पहले देवी मां का मढिया के स्वरूप में मंदिर था। पहले मंदिर के पास झील हुआ करती थी। श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती गई और धीरे-धीरे मंदिर का निर्माण होता रहा। आज मंदिर विशालकाय भवन में स्थापित है। शारदीय व चैत्र नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए यहां पहुंचते हैं। जानकारी के अनुसार 2007 मेें चंदौसी के मोहल्ला गोपाल के रहने वाले अनिल कुमार अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के सहयोग से इस मंदिर को भव्य रूप प्रदान किया। .
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माता पिंडी के रूप में हैं स्थापित
मंदिर के पुजारी पंडित भूपेंद्र कुमार गौड़ ने बताया कि उनके बाबा श्याम लाल गौड़ बताते थे कि 250 वर्ष पूर्व उनके पूर्वज पुजारी रामसुख दास को सपने में देवी ने दर्शन दिए थे और कहा कि पिंडी स्वरूप को राजस्थान के माउंट आबू से लाकर मंदिर बनाकर स्थापित कर दो। उनके पूर्वज रहे राम सुख दास माउंट आबू पहुंचे और सपने में बताए गए स्थान पर जाकर पिंडी स्वरूप देवी मां को निकाला और अपनी भूमि गांव मौलागढ़ में स्थापित कर दिया। तभी से पुजारी के वंशज ही माता रानी की सेवा करते चले आ रहे हैं। पहले यहां आम का बाग हुआ करता था।
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मन्नत पूरी होने पर चांदी के सतिये चढ़ाते हैं श्रद्धालु
मंदिर के पुजारी भूपेंद्र गौड़ ने बताया कि शादी, नौकरी और संतान प्राप्ति आदि की मन्नतें लेकर श्रद्धालु आते हैं। सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर चांदी के सतिये चढ़ाते हैं। ये परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
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