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संभल में बारह में दस प्रत्याशी नहीं बचा पाए जमानत, चौथे स्थान पर रहा नोटा
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चंदौसी। संभल लोक सभा सीट पर टॉप-3 प्रत्याशियों के बाद यानी गठबंधन, भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी के बाद चौथे नंबर पर नोटा रहा है। नौ प्रत्याशियों को नोटा ने पीछे छोड़ दिया है। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी सहित 12 में से दस प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए हैं। कांग्रेस से भी जोरदार तरीके से चुनाव प्रचार करने वाली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी पांचवें नंबर पर खिसक गया है।
2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सैनी को 360242 मत यानी 34.08 प्रतिशत मिले थे, लेकिन 2019 में भाजपा प्रत्याशी परमेश्वर लाल सैनी को 803180 मत यानी 40.83 प्रतिशत मिले है। कुल मिलाकर मोदी लहर का भाजपा को फायदा तो हुआ है, यही कारण है भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ा है लेकिन सपा, बसपा व रालोद के वोट बैंक के साथ साथ मुस्लिम मतदाताओं की इकतरफा वोटिंग ने इस बढे़ हुए मत प्रतिशत को भी पछाड़ दिया।
2014 के चुनाव में सपा के टिकट पर ही चुनाव लड़े डा. शफीकुर्रहमान बर्क को 355068 यानी 33.6 प्रतिशत वोट लिए थे और बसपा प्रत्याशी अकीलुर्रहमान खां को 252640 यानी 23.9 प्रतिशत मत लिए थे। अब इन दोनों पार्टियों के मत प्रतिशत को जोड़ दिया जाए तो जीत का आधार सुनिश्चित हो जाता है।
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2019 में महा गठबंधन प्रत्याशी को 658006 मत यानी रिकार्ड 55.6 प्रतिशत मत मिले हैं। लेकिन महा गठबंधन के परंपरागत मतों में कोई खास इजाफा नहीं दिख रहा है। इस बार चुनाव में बारह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जिसमें सिर्फ महा गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी अपनी जमानत बचा पाए हैं, कांग्रेस प्रत्याशी समेत सभी दस प्रत्याशियों की जमानत पर जब्त हो गई है।
कांग्रेस प्रत्याशी मेजर जगतपाल सिंह को 12105 यानी सिर्फ 1.02 प्रतिशत ही मत मिले हैं, इसके बाद चौथे नंबर पर नोटा ही रहा है। नोटा को चार पोस्टल बैलेट समेत कुल 7230 मत यानी 0.61 प्रतिशत मिले हैं, जो शेष नौ प्रत्याशियों से अधिक है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी करन सिंह यादव ने पूरा जोर लगाकर चुनाव लड़ा लेकिन फिर सिर्फ 4198 मत ही ले पाए हैं।
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2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सैनी को 360242 मत यानी 34.08 प्रतिशत मिले थे, लेकिन 2019 में भाजपा प्रत्याशी परमेश्वर लाल सैनी को 803180 मत यानी 40.83 प्रतिशत मिले है। कुल मिलाकर मोदी लहर का भाजपा को फायदा तो हुआ है, यही कारण है भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ा है लेकिन सपा, बसपा व रालोद के वोट बैंक के साथ साथ मुस्लिम मतदाताओं की इकतरफा वोटिंग ने इस बढे़ हुए मत प्रतिशत को भी पछाड़ दिया।
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2014 के चुनाव में सपा के टिकट पर ही चुनाव लड़े डा. शफीकुर्रहमान बर्क को 355068 यानी 33.6 प्रतिशत वोट लिए थे और बसपा प्रत्याशी अकीलुर्रहमान खां को 252640 यानी 23.9 प्रतिशत मत लिए थे। अब इन दोनों पार्टियों के मत प्रतिशत को जोड़ दिया जाए तो जीत का आधार सुनिश्चित हो जाता है।
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2019 में महा गठबंधन प्रत्याशी को 658006 मत यानी रिकार्ड 55.6 प्रतिशत मत मिले हैं। लेकिन महा गठबंधन के परंपरागत मतों में कोई खास इजाफा नहीं दिख रहा है। इस बार चुनाव में बारह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जिसमें सिर्फ महा गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी अपनी जमानत बचा पाए हैं, कांग्रेस प्रत्याशी समेत सभी दस प्रत्याशियों की जमानत पर जब्त हो गई है।
कांग्रेस प्रत्याशी मेजर जगतपाल सिंह को 12105 यानी सिर्फ 1.02 प्रतिशत ही मत मिले हैं, इसके बाद चौथे नंबर पर नोटा ही रहा है। नोटा को चार पोस्टल बैलेट समेत कुल 7230 मत यानी 0.61 प्रतिशत मिले हैं, जो शेष नौ प्रत्याशियों से अधिक है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी करन सिंह यादव ने पूरा जोर लगाकर चुनाव लड़ा लेकिन फिर सिर्फ 4198 मत ही ले पाए हैं।