{"_id":"626d7a25db313433582d5c57","slug":"wife-should-pay-her-own-sadaqa-e-fitr-saharanpur-news-mrt586729822","type":"story","status":"publish","title_hn":"पत्नी खुद अदा करे अपना सदका-ए-फितर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पत्नी खुद अदा करे अपना सदका-ए-फितर
विज्ञापन
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा सदका-ए-फितर (विशेष दान) वो रकम है, जो आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को देता है। सदका-ए-फितर उस पर वाजिब है, जिस पर जकात फर्ज है। जकात फर्ज होने के लिए यह जरूरी है कि माल-ए-निसाब पर चांद के हिसाब से एक साल गुजर जाए, लेकिन सदका-ए-फितर वाजिब होने के लिए यह जरूरी नहीं है। सदका-ए-फितर ईद की नमाज को जाने से पहले अदा करना चाहिए। सदका-ए-फितर की रकम गरीब, बेवा, यतीमों और जरूरतमंद लोगों को दी जाती है।
सवाल- मेहंदी सराय निवासी ऐमन ने पूछा कि मुझे अपना सदका-ए-फितर खुद अदा करना जरूरी है या इसकी जिम्मेदारी मेरे पति पर है।
जवाब- पत्नी को अपना सदका-ए- फितर खुद अदा करना चाहिए। अगर पति ने खुशी से अदा कर दिया तो भी अदा हो जाएगा।
सवाल- ताजपुरा निवासी अदनान ने पूछा कि क्या रोजे की हालत में दांत निकलवा सकते हैं। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब-जी हां, शरीयत के मुताबिक यदि खून या दवा हलक के अंदर न जाए तो रोजे की हालत में दांत निकलवाया जा सकता है।
सवाल- पुरकाजी निवासी नदीम ने पूछा कि साहिब-ए-निसाब पर अपने परिवार का सदका-ए- फितर किस-किस का अदा करना चाहिए।
जवाब- शरीयत के अनुसार मालदार व्यक्ति पर सदका-ए-फितर अपनी और अपनी नाबालिग औलाद की तरफ से अदा करना जरूरी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा सदका-ए-फितर (विशेष दान) वो रकम है, जो आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को देता है। सदका-ए-फितर उस पर वाजिब है, जिस पर जकात फर्ज है। जकात फर्ज होने के लिए यह जरूरी है कि माल-ए-निसाब पर चांद के हिसाब से एक साल गुजर जाए, लेकिन सदका-ए-फितर वाजिब होने के लिए यह जरूरी नहीं है। सदका-ए-फितर ईद की नमाज को जाने से पहले अदा करना चाहिए। सदका-ए-फितर की रकम गरीब, बेवा, यतीमों और जरूरतमंद लोगों को दी जाती है।
सवाल- मेहंदी सराय निवासी ऐमन ने पूछा कि मुझे अपना सदका-ए-फितर खुद अदा करना जरूरी है या इसकी जिम्मेदारी मेरे पति पर है।
जवाब- पत्नी को अपना सदका-ए- फितर खुद अदा करना चाहिए। अगर पति ने खुशी से अदा कर दिया तो भी अदा हो जाएगा।
सवाल- ताजपुरा निवासी अदनान ने पूछा कि क्या रोजे की हालत में दांत निकलवा सकते हैं। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब-जी हां, शरीयत के मुताबिक यदि खून या दवा हलक के अंदर न जाए तो रोजे की हालत में दांत निकलवाया जा सकता है।
सवाल- पुरकाजी निवासी नदीम ने पूछा कि साहिब-ए-निसाब पर अपने परिवार का सदका-ए- फितर किस-किस का अदा करना चाहिए।
जवाब- शरीयत के अनुसार मालदार व्यक्ति पर सदका-ए-फितर अपनी और अपनी नाबालिग औलाद की तरफ से अदा करना जरूरी है।