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कम पड़ गईं ट्रेन और बस
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 02 Nov 2016 12:43 AM IST
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अंबाला रोड पर बस अड्डे पर बसों में चढ़ते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भैया दूज पर बहनों के घर पहुंचे भाइयों के लिए बस और ट्रेनें कम पड़ गईं। आलम यह था कि ट्रेनों और बसों में सीट पाने को यात्रियों में मारामारी जैसी स्थिति रही। सीट कब्जाने के लिए भी यात्रियों में आपाधापी नजर आई। अनेक यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।
भैयादूज पर यात्रियों की संख्या को देखते हुए एक ओर जहां रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हुई हैं, वहीं परिवहन निगम ने भी रीजन की सभी 543 बसों को सेवा में लगा रखा है। चालकों और परिचालकों से 24 घंटे काम लेने के लिए प्रोत्साहन योजना चलाई हुई है।
इसमें आठ दिन तक प्रतिदिन कम से कम 300 किलोमीटर बस चलाने पर चालक और परिचालकों को 1200 रुपये ईनाम के तौर पर दिए जा रहे हैं। इसका मकसद यात्रियों को 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराना है। लेकिन, इसके बावजूद भैयादूज पर बसें कम पड़ती नजर आईं।
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रेलवे रोड और अंबाला रोड बस स्टैंड पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ जमा होना शुरू हो गई थी। सबसे अधिक यात्री दिल्ली रूट के रहे। ऐसे में दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाली बसों में सबसे अधिक मारामारी मची। अनेक यात्रियों को सीट तक नहीं मिली।
ऐसे में उन्हें खड़े होकर ही सफर करना पड़ा। उधर, ट्रेनों की भी हालत ऐसी ही रही। दिल्ली के लिए चलने वाली ऋषिकेश दिल्ली पैसेंजर में सवार होने के लिए 11 बजे से ही यात्री प्लेट फॉर्म नंबर दो पर इकट्ठा होना शुरू हो गए थे। जैसे ही ट्रेन प्लेट फॉर्म पर पहुंची तो सीट कब्जाने के लिए यात्रियों में आपाधापी मच गई। इससे पहले अमृतसर-दिल्ली के लिए चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में भी यही आलम रहा।
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भैयादूज पर यात्रियों की संख्या को देखते हुए एक ओर जहां रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हुई हैं, वहीं परिवहन निगम ने भी रीजन की सभी 543 बसों को सेवा में लगा रखा है। चालकों और परिचालकों से 24 घंटे काम लेने के लिए प्रोत्साहन योजना चलाई हुई है।
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इसमें आठ दिन तक प्रतिदिन कम से कम 300 किलोमीटर बस चलाने पर चालक और परिचालकों को 1200 रुपये ईनाम के तौर पर दिए जा रहे हैं। इसका मकसद यात्रियों को 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराना है। लेकिन, इसके बावजूद भैयादूज पर बसें कम पड़ती नजर आईं।
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रेलवे रोड और अंबाला रोड बस स्टैंड पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ जमा होना शुरू हो गई थी। सबसे अधिक यात्री दिल्ली रूट के रहे। ऐसे में दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाली बसों में सबसे अधिक मारामारी मची। अनेक यात्रियों को सीट तक नहीं मिली।
ऐसे में उन्हें खड़े होकर ही सफर करना पड़ा। उधर, ट्रेनों की भी हालत ऐसी ही रही। दिल्ली के लिए चलने वाली ऋषिकेश दिल्ली पैसेंजर में सवार होने के लिए 11 बजे से ही यात्री प्लेट फॉर्म नंबर दो पर इकट्ठा होना शुरू हो गए थे। जैसे ही ट्रेन प्लेट फॉर्म पर पहुंची तो सीट कब्जाने के लिए यात्रियों में आपाधापी मच गई। इससे पहले अमृतसर-दिल्ली के लिए चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में भी यही आलम रहा।