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स्मार्ट सिटी के लिए आगे आए लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 09 Jun 2016 12:38 AM IST
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Smart City suggest people.
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में स्मार्ट सिटी की होड़ में शामिल सहारनपुर को अपनी जगह बनाने के लिए नगर निगम को ज्यादा प्रभावी बनाना पड़ेगा। शहर के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए केंद्रीय कमेटी ने नगर निगम को विभिन्न विभागों के साथ करार करने के निर्देश दिए हैं।
इसके लिए बिजली, विकास प्राधिकरण, जल निगम सहित अन्य विभागों से करार के जरिए कुछ अधिकार नगर निगम को लेना होगा। ताकि शहर के विकास के लिए नगर निगम बिना किसी बाधा के उन कामों को पूरा कर सके।
बुधवार को दिल्ली के निर्माण भवन में हुई प्रजेंटेशन में नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला से केन्द्रीय कमेटी ने 42 साल पूछे और फिर उन जवाबों पर क्रॉस क्वेश्चनिंग भी की गई। अंतिम चरण में जगह बनाने के लिए नगर निगम को जल्द ही अपनी तैयारियां पूरी करनी होगी।
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नगर निगम की तैयारियों की समीक्षा के लिए बुधवार को दिल्ली के निर्माण भवन में केन्द्रीय कमेटी ने बैठक की। इसमें शहर में विकास संभावनाओं और स्मार्ट सिटी में चयनित होने के बाद यहां खर्च होने वाले बजट के बाद उन प्रोजेक्ट्स को मेंटेन करने की पुख्ता जानकारी ली।
नगर निगम के वुडकार्विंग प्रोजेक्ट पर रॉ मैटेरियल, एक्सपोर्ट की सुविधा, अलग मार्केट सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। शहर में अतिक्रमण, बिजली के तारों की शिफ्टिंग सहित अन्य कामों के लिए चर्चा की गई।
आपको बता दें कि इस पूरी चर्चा में केंद्रीय कमेटी इस मुद्दे पर फोकस थी कि स्मार्ट सिटी के तहत लगने वाले पांच हजार करोड़ से शहर का विकास होने के बाद उसे मेंटेन रखने के लिए क्या विकल्प होंगे।
नगर निगम ने शहर के विकास के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरटेकिंग) किया है। इसमें उन्हें सिंगल विंडो के जरिए सुविधा प्रदान करने का दावा किया गया है।
केन्द्रीय कमेेेटी ने नगर निगम से पूछा कि आखिर उन्हें सिंगल विंडों के जरिए कैसे सुविधा दी जाएगी। क्या सभी विभागों से एनओसी लिया गया है। एमओयू से जुड़े विभागों से नगर निगम को एनओसी लेना होगा।
स्मार्ट सिटी के लिए नगर निगम को अपनी बैंक गारंटी भी देनी होगी। इसके लिए नगर निगम को एजेंसी के जरिए अपनी हैसियत आंकनी होगी। ताकि यह पता रहे कि जरुरत पड़ने पर नगर निगम को बैंक से कितनी आर्थिक मदद मिल सकती है।
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इसके लिए बिजली, विकास प्राधिकरण, जल निगम सहित अन्य विभागों से करार के जरिए कुछ अधिकार नगर निगम को लेना होगा। ताकि शहर के विकास के लिए नगर निगम बिना किसी बाधा के उन कामों को पूरा कर सके।
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बुधवार को दिल्ली के निर्माण भवन में हुई प्रजेंटेशन में नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला से केन्द्रीय कमेटी ने 42 साल पूछे और फिर उन जवाबों पर क्रॉस क्वेश्चनिंग भी की गई। अंतिम चरण में जगह बनाने के लिए नगर निगम को जल्द ही अपनी तैयारियां पूरी करनी होगी।
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नगर निगम की तैयारियों की समीक्षा के लिए बुधवार को दिल्ली के निर्माण भवन में केन्द्रीय कमेटी ने बैठक की। इसमें शहर में विकास संभावनाओं और स्मार्ट सिटी में चयनित होने के बाद यहां खर्च होने वाले बजट के बाद उन प्रोजेक्ट्स को मेंटेन करने की पुख्ता जानकारी ली।
नगर निगम के वुडकार्विंग प्रोजेक्ट पर रॉ मैटेरियल, एक्सपोर्ट की सुविधा, अलग मार्केट सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। शहर में अतिक्रमण, बिजली के तारों की शिफ्टिंग सहित अन्य कामों के लिए चर्चा की गई।
आपको बता दें कि इस पूरी चर्चा में केंद्रीय कमेटी इस मुद्दे पर फोकस थी कि स्मार्ट सिटी के तहत लगने वाले पांच हजार करोड़ से शहर का विकास होने के बाद उसे मेंटेन रखने के लिए क्या विकल्प होंगे।
नगर निगम ने शहर के विकास के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरटेकिंग) किया है। इसमें उन्हें सिंगल विंडो के जरिए सुविधा प्रदान करने का दावा किया गया है।
केन्द्रीय कमेेेटी ने नगर निगम से पूछा कि आखिर उन्हें सिंगल विंडों के जरिए कैसे सुविधा दी जाएगी। क्या सभी विभागों से एनओसी लिया गया है। एमओयू से जुड़े विभागों से नगर निगम को एनओसी लेना होगा।
स्मार्ट सिटी के लिए नगर निगम को अपनी बैंक गारंटी भी देनी होगी। इसके लिए नगर निगम को एजेंसी के जरिए अपनी हैसियत आंकनी होगी। ताकि यह पता रहे कि जरुरत पड़ने पर नगर निगम को बैंक से कितनी आर्थिक मदद मिल सकती है।