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Saharanpur News: 11 साल पुराने मामले में घिरे सेवानिवृत्त खान अधिकारी, शासन ने किए आरोप तय

Thu, 11 Jun 2026 01:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 01:25 AM IST
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Retired mining officer embroiled in 11-year-old case, government frames charges
कलक्ट्रेट परिसर ​स्थित खनन कार्यालय
- पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के साथ मिलकर किया था पद का दुरुपयोग
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- दूसरे खनन कारोबारी को जारी किया था चार करोड़ 24 लाख का फर्जी रिकवरी नोटिस
- जून 2025 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं पूर्व खान अधिकारी राजकुमार संगम
विनीत तोमर
सहारनपुर। करीब 11 साल पुराने मामले में शासन ने पूर्व खान अधिकारी व वर्तमान में सेवानिवृत्त राजकुमार संगम के खिलाफ गंभीर आरोप तय किए हैं। शासन द्वारा जारी पत्र में उन पर पद के दुरुपयोग, फर्जी अभिलेख तैयार करने, अवैध खनन मामलों में लापरवाही बरतने तथा एक खनन कारोबारी को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से गलत कार्रवाई जैसे पांच गंभीर आरोप हैं। अब मंडलायुक्त की तरफ से इन आरोपों को लेकर पूर्व खान अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


- ऐसे है मामला
खान अधिकारी राजकुमार संगम की जिले में वर्ष 2015 में दौरान तैनाती थी। इन पर आरोप लगा था कि अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला व अन्य के साथ मिलीभगत की। इसके बाद नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दूसरे खनन कारोबारी रणवीर सिंह के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से चार करोड़ 24 लाख की फर्जी रिकवरी का नोटिस जारी किया गया। पीड़ित रणवीर सिंह की तरफ से मामले की शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
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आरोप नंबर : 1
आरोप पत्र के अनुसार, राजकुमार संगम पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला व अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर खनन कारोबारी रणवीर सिंह के खिलाफ फर्जी रिकवरी नोटिस तैयार कर उसका इस्तेमाल किया।
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आरोप नंबर : 2
दूसरे आरोप में कहा गया है कि वर्ष 2015 में अवैध खनन के एक मामले में बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए तथा सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नोटिस जारी कर जुर्माना आरोपित किया गया। शासन ने इसे नियमों के विपरीत और मनमाना कदम माना है।
आरोप नंबर : 3
तीसरे आरोप में अवैध खनन की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न करने का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि पुलिस को सूचना भेजने के बाद भी अवैध खननकर्ताओं के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही सामने आई।
आरोप नंबर : 4
चौथे आरोप में कार्यालयी अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर अनियमितताओं का जिक्र है। शासन का कहना है कि वसूली प्रमाणपत्रों से संबंधित मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले और केवल छायाप्रतियों के आधार पर कार्रवाई की गई। इससे रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।
आरोप नंबर : 5
पांचवें और सबसे गंभीर आरोप में एसएसपी की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज आपराधिक मामले का उल्लेख किया गया है। शासन के अनुसार, फर्जी रिकवरी नोटिस तैयार कर उपयोग करने के मामले में संबंधित अधिकारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोजन चलाने की स्वीकृति भी प्रदान की जा चुकी है।


वर्जन
शासन की तरफ से पांच बिंदुओं पर आरोप तय किए गए हैं। आरोप पत्र पर पूर्व खान अधिकारी से जवाब मांगा गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर शासन को अवगत करा दिया जाएगा। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
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