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जिले की औसत शुगर रिकवरी में आई कमी
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सहारनपुर। मौजूदा सीजन में जहां जिले में गन्ना उत्पादकता में कमी आई है, वहीं शुगर मिलों के औसत चीनी परता पर भी विपरीत असर पड़ा है। गन्ना विभाग के आंकडे़ इसकी तस्दीक कर रहे हैं। 20 नवंबर के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष की अपेक्षा इस बार औसत शुगर रिकवरी 0.74 प्रतिशत कम है। इसका असर चीनी उत्पादन पर पड़ना तय है।
मौसम और बीमारियों की मार का असर गन्ना उत्पादकता के साथ ही मिलों की शुगर रिकवरी पर दिखाई दे रहा है। पिछले चार वर्षों के 20 नवंबर के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में औसत शुगर रिकवरी सबसे कम है। गत वर्ष 20 नवंबर को औसत शुगर रिकवरी जहां 9.61 प्रतिशत थी जबकि इस बार 20 नवंबर को 8.87 प्रतिशत है। गत वर्ष की तुलना में इस बार चीनी परता में 0.74 फीसदी की कम दर्ज की गई है। कृषि वैज्ञानिक, किसानों और गन्ना अधिकारी इसका बड़ा कारण जनवरी से मार्च तक हुई बारिश और पोक्का बोईंग, रेड रॉट और तना छेदक जैसी बीमारियों का प्रकोप मान रहे हैं।
जनवरी से लेकर मार्च तक लगभग लगातार हुई बारिश और पोक्का बोईंग आदि बीमारियों के चलते गन्ना फसल की उत्पादकता के साथ ही शुगर रिकवरी में भी कमी आई है। 20 नवंबर के आंकड़े के अनुसार इस बार गत वर्ष की अपेक्षा इस बार शुगर रिकवरी 0.74 फीसदी कम है। लेकिन अभी पूरे सीजन की शुगर रिकवरी के बारे में कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि अभी शुगर मिलों में पेराई सत्र शुरू हुए कुछ ही दिन हुए हैं। - कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
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पोक्का बोईंग, टॉप बोरर, रेड रॉट आदि बीमारियों और मृदा में लगातार हो रही जीवांश कार्बन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से गन्ना फसल पर विपरीत असर पड़ा है। इसके चलते इस बार गन्ने की उत्पादकता घटी है। गन्ने में शुगर लेबल भी कम आ रहा है। - डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र।
सभी वर्षों की 20 नवंबर को औसत शुगर रिकवर
वर्ष-------------------शुगर रिकवरी
2017-18--------------9.37 प्रतिशत
2018-19--------------9.38 प्रतिशत
2019-20---------------9.61 प्रतिशत
2020-21---------------8.87 प्रतिशत
नोट: गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार।
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मौसम और बीमारियों की मार का असर गन्ना उत्पादकता के साथ ही मिलों की शुगर रिकवरी पर दिखाई दे रहा है। पिछले चार वर्षों के 20 नवंबर के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में औसत शुगर रिकवरी सबसे कम है। गत वर्ष 20 नवंबर को औसत शुगर रिकवरी जहां 9.61 प्रतिशत थी जबकि इस बार 20 नवंबर को 8.87 प्रतिशत है। गत वर्ष की तुलना में इस बार चीनी परता में 0.74 फीसदी की कम दर्ज की गई है। कृषि वैज्ञानिक, किसानों और गन्ना अधिकारी इसका बड़ा कारण जनवरी से मार्च तक हुई बारिश और पोक्का बोईंग, रेड रॉट और तना छेदक जैसी बीमारियों का प्रकोप मान रहे हैं।
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जनवरी से लेकर मार्च तक लगभग लगातार हुई बारिश और पोक्का बोईंग आदि बीमारियों के चलते गन्ना फसल की उत्पादकता के साथ ही शुगर रिकवरी में भी कमी आई है। 20 नवंबर के आंकड़े के अनुसार इस बार गत वर्ष की अपेक्षा इस बार शुगर रिकवरी 0.74 फीसदी कम है। लेकिन अभी पूरे सीजन की शुगर रिकवरी के बारे में कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि अभी शुगर मिलों में पेराई सत्र शुरू हुए कुछ ही दिन हुए हैं। - कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
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पोक्का बोईंग, टॉप बोरर, रेड रॉट आदि बीमारियों और मृदा में लगातार हो रही जीवांश कार्बन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से गन्ना फसल पर विपरीत असर पड़ा है। इसके चलते इस बार गन्ने की उत्पादकता घटी है। गन्ने में शुगर लेबल भी कम आ रहा है। - डॉक्टर आईके कुशवाहा, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र।
सभी वर्षों की 20 नवंबर को औसत शुगर रिकवर
वर्ष-------------------शुगर रिकवरी
2017-18--------------9.37 प्रतिशत
2018-19--------------9.38 प्रतिशत
2019-20---------------9.61 प्रतिशत
2020-21---------------8.87 प्रतिशत
नोट: गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार।