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Saharanpur News: शाकंभरी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में, ड्रोन से होगी निगरानी
Sat, 10 Oct 2026 01:41 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:41 AM IST
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शाकंभरी। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में शारदीय नवरात्र मेले की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए मेला क्षेत्र में ड्रोन व 86 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी।
11 अक्तूबर से शुरू होकर 26 अक्तूबर पूर्णिमा तक चलने वाले मेले की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिला पंचायत संभाल रही है। इस बार व्यवस्थाओं पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 अस्थायी शौचालय, पांच मोबाइल शौचालय, 25 स्नानागार और महिला शौचालयों की व्यवस्था की जा रही है। पेयजल के लिए 10 टैंकर और बैरिकेडिंग के साथ 150 टोंटियां लगाई जाएंगी। सिद्धपीठ से आमवाली तक बैरिकेडिंग होगी।
भवन के सामने लगी बैरिकेडिंग को भगवा कपड़े से सजाया गया है। रात में रोशनी के लिए मेला क्षेत्र में लाइटें लगाई जा रही हैं। बेहट से सिद्धपीठ तक सड़क पर रोशनी की व्यवस्था के लिए तीन मोबाइल वाहन लगाए गए हैं। जेसीबी से रास्तों को दुरुस्त करने और मेला क्षेत्र का समतलीकरण कराने का काम जारी है। मेले के बीच से बहने वाली खोल नदी के पानी की निकासी के लिए नाला बनाकर पानी को पहाड़ी के किनारे से निकाला गया है। उधर, एसडीएम बेहट सुबोध कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखकर सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे है।
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नवरात्र आत्मशुद्धि व धर्म की विजय का पर्व : सहजानंद
शाकंभरी। शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी एवं अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिद्ध भैरवतंत्राचार्य महंत सहजानंद महाराज ने कहा कि नवरात्र केवल पूजा-पाठ और व्रत का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति उपासना, आत्मशुद्धि और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देने वाला महापर्व है। भारतीय सनातन परंपरा में मां दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों के युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में विजयादशमी मनाई जाती है। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से आत्मबल, धैर्य, विवेक और सद्बुद्धि की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि मां भगवती की सच्ची आराधना तभी सार्थक है, जब व्यक्ति महिलाओं का सम्मान करे, जरूरतमंदों की सहायता करे और समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा व सदाचार को बढ़ावा दे।
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11 अक्तूबर से शुरू होकर 26 अक्तूबर पूर्णिमा तक चलने वाले मेले की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिला पंचायत संभाल रही है। इस बार व्यवस्थाओं पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 अस्थायी शौचालय, पांच मोबाइल शौचालय, 25 स्नानागार और महिला शौचालयों की व्यवस्था की जा रही है। पेयजल के लिए 10 टैंकर और बैरिकेडिंग के साथ 150 टोंटियां लगाई जाएंगी। सिद्धपीठ से आमवाली तक बैरिकेडिंग होगी।
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भवन के सामने लगी बैरिकेडिंग को भगवा कपड़े से सजाया गया है। रात में रोशनी के लिए मेला क्षेत्र में लाइटें लगाई जा रही हैं। बेहट से सिद्धपीठ तक सड़क पर रोशनी की व्यवस्था के लिए तीन मोबाइल वाहन लगाए गए हैं। जेसीबी से रास्तों को दुरुस्त करने और मेला क्षेत्र का समतलीकरण कराने का काम जारी है। मेले के बीच से बहने वाली खोल नदी के पानी की निकासी के लिए नाला बनाकर पानी को पहाड़ी के किनारे से निकाला गया है। उधर, एसडीएम बेहट सुबोध कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखकर सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे है।
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नवरात्र आत्मशुद्धि व धर्म की विजय का पर्व : सहजानंद
शाकंभरी। शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी एवं अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिद्ध भैरवतंत्राचार्य महंत सहजानंद महाराज ने कहा कि नवरात्र केवल पूजा-पाठ और व्रत का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति उपासना, आत्मशुद्धि और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देने वाला महापर्व है। भारतीय सनातन परंपरा में मां दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों के युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में विजयादशमी मनाई जाती है। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना से आत्मबल, धैर्य, विवेक और सद्बुद्धि की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि मां भगवती की सच्ची आराधना तभी सार्थक है, जब व्यक्ति महिलाओं का सम्मान करे, जरूरतमंदों की सहायता करे और समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा व सदाचार को बढ़ावा दे।