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पीएम की रैली के बाद बढ़ेगा सियासी ताप
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 25 May 2016 12:38 AM IST
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पीएम की रैली के स्थल का जायजा लेते सांसद राघव लखनपाल व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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केंद सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास पर्व महारैली के बाद वेस्ट यूपी में मुस्लिम वोटों के समीकरणों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
सियासी जमीन मजबूत करने के इरादे से सहारनपुर में हो रही 26 मई की रैली के बाद पश्चिमी यूपी का सियासी ताप भी बढ़ेगा। ऐसे में गैर भाजपा दल मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने और लामबंद करने में जुटेंगे। भाजपा का डर दिखाकर उन्हें अपने खेमे में लाने की भी पूरी कोशिश होगी। पश्चिमी यूपी में हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर होने के चलते यहां हर चुनाव में ध्रुवीकरण की आशंका रहती है।
पीएम की रैली भाजपा के लिए कई मायनों में खास है। पिछले दिनों जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदर अरशद मदनी ने खुले मंच से भाजपा के खिलाफ मतदान करने की अपील की थी। ऐसे में रैैली में भले केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाई जाएं, मगर कोशिश कहीं न कहीं हिंदू मतदाताओं को एकजुटता का संदेश देने की होगी। सहारनपुर में सात विधानसभा सीटें हैं।
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विधानसभा सीट नंबर-1 से लेकर सात तक होने के चलते पीएम की रैली को मिशन-2017 की शुरुआत माना जा रहा है। रैली के बाद भाजपा का चुनावी एजेंडा भी लगभग साफ हो जाएगा।
बता दें कि प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा मुस्लिम मतदाताओं को पश्चिमी यूपी में अपना बेस वोट मानती है तो बसपा इस बार दलित-मुस्लिम गठजोड़ का ताना-बाना बुन रही है। उधर, कांग्रेस भी मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के साथ ही दलितों पर फोकस कर रही है। 26 मई को होने वाली रैली के जरिये भाजपा की निगाह दलित मतों में सेंधमारी पर रहेगी।
भाजपा हर हाल में चाहेगी कि दलित मतों की सेंधमारी का संदेश देकर मुस्लिम मतदाताओं को असमंजस में रखा जाए। ताकि वे किसी एक पार्टी की ओर रुझान नहीं दिखा सकें। अगर भाजपा चुनाव से पहले तक ऐसा कर पाने में सफल होती है तो तेजी से बदलते समीकरणों में सियासी उठापठक से इनकार नहीं किया जा सकता।
सांसद राघव का बढ़ेगा कद
केंद्र सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर सहारनपुर में रैली का आयोजन करा सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने सरकार में दखल का परिचय दिया है। माना जा रहा है कि रैली की सफलता के बाद उनका कद बढ़ सकता है।
युवा होने के नाते उन्हें मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिल सकती है। ऐसा नहीं भी होता है तो रैली से पश्चिमी यूपी की सियासत में उनका कद बढ़ेगा। आपको बता दें कि सांसद राघव लखनपाल शर्मा के पिता स्वर्गीय निर्भयपाल शर्मा पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता थे। उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में सरसावा से राघव पहली बार विधानसभा पहुंचे थे।
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सियासी जमीन मजबूत करने के इरादे से सहारनपुर में हो रही 26 मई की रैली के बाद पश्चिमी यूपी का सियासी ताप भी बढ़ेगा। ऐसे में गैर भाजपा दल मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने और लामबंद करने में जुटेंगे। भाजपा का डर दिखाकर उन्हें अपने खेमे में लाने की भी पूरी कोशिश होगी। पश्चिमी यूपी में हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर होने के चलते यहां हर चुनाव में ध्रुवीकरण की आशंका रहती है।
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पीएम की रैली भाजपा के लिए कई मायनों में खास है। पिछले दिनों जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदर अरशद मदनी ने खुले मंच से भाजपा के खिलाफ मतदान करने की अपील की थी। ऐसे में रैैली में भले केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाई जाएं, मगर कोशिश कहीं न कहीं हिंदू मतदाताओं को एकजुटता का संदेश देने की होगी। सहारनपुर में सात विधानसभा सीटें हैं।
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विधानसभा सीट नंबर-1 से लेकर सात तक होने के चलते पीएम की रैली को मिशन-2017 की शुरुआत माना जा रहा है। रैली के बाद भाजपा का चुनावी एजेंडा भी लगभग साफ हो जाएगा।
बता दें कि प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा मुस्लिम मतदाताओं को पश्चिमी यूपी में अपना बेस वोट मानती है तो बसपा इस बार दलित-मुस्लिम गठजोड़ का ताना-बाना बुन रही है। उधर, कांग्रेस भी मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के साथ ही दलितों पर फोकस कर रही है। 26 मई को होने वाली रैली के जरिये भाजपा की निगाह दलित मतों में सेंधमारी पर रहेगी।
भाजपा हर हाल में चाहेगी कि दलित मतों की सेंधमारी का संदेश देकर मुस्लिम मतदाताओं को असमंजस में रखा जाए। ताकि वे किसी एक पार्टी की ओर रुझान नहीं दिखा सकें। अगर भाजपा चुनाव से पहले तक ऐसा कर पाने में सफल होती है तो तेजी से बदलते समीकरणों में सियासी उठापठक से इनकार नहीं किया जा सकता।
सांसद राघव का बढ़ेगा कद
केंद्र सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर सहारनपुर में रैली का आयोजन करा सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने सरकार में दखल का परिचय दिया है। माना जा रहा है कि रैली की सफलता के बाद उनका कद बढ़ सकता है।
युवा होने के नाते उन्हें मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिल सकती है। ऐसा नहीं भी होता है तो रैली से पश्चिमी यूपी की सियासत में उनका कद बढ़ेगा। आपको बता दें कि सांसद राघव लखनपाल शर्मा के पिता स्वर्गीय निर्भयपाल शर्मा पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता थे। उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में सरसावा से राघव पहली बार विधानसभा पहुंचे थे।