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युवक की हत्या में दो को आजीवन कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 05 May 2016 12:13 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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सहारनपुर में हत्या का दोष सिद्ध हो जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या आठ मुकेश कुमार सिंघल ने दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है। मामला गांव कैलाशपुर निवासी एक व्यक्ति की हत्या से जुड़ा है।
गांव कैलाशपुर निवासी खेसन खातून ने 20 अगस्त 2012 को थाना गागलहेड़ी में तहरीर देते हुए बताया था कि 18 अगस्त को गांव के ही रहने वाले शहजाद, मीर आलम, सलमान और गांव मोहम्मदपुर गाड़ा निवासी गुलबहार उसके घर आए थे।
वह उसके बेटे मूसा को बुलाकर अपने साथ ले गए थे। जब मूसा वापस नहीं आया तो उसने उसे तलाश किया, मगर नहीं मिला। इसके बाद 20 अगस्त को सूचना मिली कि मूसा की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
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उसका शव शत्रुघ्न कॉलोनी के पास एक खेत में पड़ा मिला था। पुलिस ने महिला की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार राठौर ने बताया कि पुलिस ने जांच के बाद सलमान और गुलबहार के खिलाफ धारा 302/201 आईपीसी में चार्जशीट दाखिल की थी।
मामले की सुनवाई के उपरांत गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल ने धारा 302 में सलमान और गुलबहार को आजीवन कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
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गांव कैलाशपुर निवासी खेसन खातून ने 20 अगस्त 2012 को थाना गागलहेड़ी में तहरीर देते हुए बताया था कि 18 अगस्त को गांव के ही रहने वाले शहजाद, मीर आलम, सलमान और गांव मोहम्मदपुर गाड़ा निवासी गुलबहार उसके घर आए थे।
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वह उसके बेटे मूसा को बुलाकर अपने साथ ले गए थे। जब मूसा वापस नहीं आया तो उसने उसे तलाश किया, मगर नहीं मिला। इसके बाद 20 अगस्त को सूचना मिली कि मूसा की गोली मारकर हत्या कर दी गई है।
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उसका शव शत्रुघ्न कॉलोनी के पास एक खेत में पड़ा मिला था। पुलिस ने महिला की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार राठौर ने बताया कि पुलिस ने जांच के बाद सलमान और गुलबहार के खिलाफ धारा 302/201 आईपीसी में चार्जशीट दाखिल की थी।
मामले की सुनवाई के उपरांत गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंघल ने धारा 302 में सलमान और गुलबहार को आजीवन कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई है।