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मेयर मिलने से विकास कार्यों में तेजी की उम्मीद
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:22 AM IST
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नौ साल बाद नगरनिगम को अपना पहला मेयर मिल ही गया। सहारनपुर शहर की पहली सरकार का नेतृत्व संजीव वालिया के हाथ में होगा। वर्षों से नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे कार्यों के अब सिस्टम में आने की उम्मीद जनता कर रही है।
साथ ही जनता को सुविधाएं बढ़ने तथा टैक्स आदि का बोझ कम होने की भी उम्मीदें हैं। जनता की उम्मीदों पर मेयर कितना खरा उतर पाते हैं या तो आने वाले पांच साल ही बताएंगे।
वर्ष 2008 में तत्कालीन बसपा सरकार ने शहर से सटे 32 गांवों को शहर में मिलाते हुए सहारनपुर को नगर निगम का दर्जा दिया था। मगर विवादों के चलते तब से यहां मेयर का चुनाव नहीं हो सका था।
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ऐसे में नगर निगम के अफसर और कर्मचारी नौ साल से मनमानी करते आ रहे थे। इस अंतराल में अनेक गड़बड़ी और बड़े घोटाले हुए। आम आदमी की ठीक से सुनवाई नहीं हो रही थी। इसके अलावा सफाईकर्मी तक परेशान थे।
मगर अब शहर की जनता की पहली सरकार बन चुकी है, जिसमें मेयर के साथ ही 70 पार्षद भी हैं, जो जनता की नुमाइंदगी करेंगे। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि नगर निगम के तहत होने वाले विकास कार्यों को अब गति मिलेगी।
जनता द्वारा चुने गए पार्षद और मेयर उनके दर्द और पीड़ा को समझकर समस्याओं का निराकरण कराएंगे। गौरतलब है कि नगर निगम ने करीब दो साल पहले हाउस टैक्स 15 से 20 गुना अधिक बढ़ा दिया, जिसका नगरवासी विरोध करते रह गए मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा शहर की जनता सीवर, सड़क, नाली, पेयजल समेत अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
नगर निगम के तमाम कार्यों में पारदर्शिता लाई जाएगी। आम नागरिक की सुविधाओं काध्यान रखना मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी। मेरा प्रयास बिना भेदभाव के सभी क्षेत्रों का बराबर विकास करने का रहेगा। तमाम पार्षदों को साथ लेकर चला जाएगा, तभी सबका साथ और सबका विकास की सोच सार्थक होगी।
- संजीव वालिया, मेयर।
मेयर और पार्षदों के लिए सदन तैयार करने में जुटा निगम
सहारनपुर। नगर का पहला मेयर चुने जाने के बाद नगर निगम प्रशासन मेयर और पार्षदों की बैठक के लिए सदन तैयार करने में जुटा है। मेयर के बैठने के लिए नगरायुक्त के ऑफिस की बराबर में व्यवस्था की गई है, जबकि पार्षदों के संयुक्त बैठने के लिए अलग से व्यवस्था चल रही है।
सदन तैयार न होने तक मेयर जनमंच प्रेक्षागृह में अपनी बैठक ले सकेंगे। शहर के निगम बनने के बाद अभी तक मेयर का चुनाव नहीं हो सका था। ऐसे में अभी तक मेयर या पार्षदों के बैठने या बैठक लेने की व्यवस्था करने की जरूरत महसूस नहीं की गई थी।
मगर अब जबकि मेयर और पार्षद चुने जा चुके हैं तो नगर निगम प्रशासन ने तमाम व्यवस्थाएं करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले मेयर के बैठने के लिए ऑफिस तैयार किया गया है, जो नगरायुक्त के दफ्तर के ठीक बराबर में है।
पार्षदों के संयुक्त बैठने के लिए नगरायुक्त कार्यालय के ऊपर बने हॉल में व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा बोर्ड की बैठकों के लिए सदन बनाया जाना है। इसके लिए भी अलग से हॉल को सुविधा संपन्न बनाने का काम किया जा रहा है। जब तक सदन तैयार नहीं हो जाता, तब तक मेयर पार्षदों के साथ बैठक जनमंच प्रेक्षागृह में ले सकेंगे।
जनता की प्रमुख समस्याएं
-50 फीसदी घरों में पेयजल की सुविधा न होना।
-60 फीसदी से अधिक क्षेत्र में सीवर लाइन न होना।
-हाउस टैक्स का 20 गुना तक बढ़ाया जाना।
-शहर की सभी प्रमुख और गलियों की सड़कें टूटी होना।
-पथ प्रकाश व्यवस्था ठीक न होना।
-आम आदमी की नगर निगम में सुनवाई न होना।
-तमाम नालियां और नाले कचरे से अटे होना।
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साथ ही जनता को सुविधाएं बढ़ने तथा टैक्स आदि का बोझ कम होने की भी उम्मीदें हैं। जनता की उम्मीदों पर मेयर कितना खरा उतर पाते हैं या तो आने वाले पांच साल ही बताएंगे।
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वर्ष 2008 में तत्कालीन बसपा सरकार ने शहर से सटे 32 गांवों को शहर में मिलाते हुए सहारनपुर को नगर निगम का दर्जा दिया था। मगर विवादों के चलते तब से यहां मेयर का चुनाव नहीं हो सका था।
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ऐसे में नगर निगम के अफसर और कर्मचारी नौ साल से मनमानी करते आ रहे थे। इस अंतराल में अनेक गड़बड़ी और बड़े घोटाले हुए। आम आदमी की ठीक से सुनवाई नहीं हो रही थी। इसके अलावा सफाईकर्मी तक परेशान थे।
मगर अब शहर की जनता की पहली सरकार बन चुकी है, जिसमें मेयर के साथ ही 70 पार्षद भी हैं, जो जनता की नुमाइंदगी करेंगे। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि नगर निगम के तहत होने वाले विकास कार्यों को अब गति मिलेगी।
जनता द्वारा चुने गए पार्षद और मेयर उनके दर्द और पीड़ा को समझकर समस्याओं का निराकरण कराएंगे। गौरतलब है कि नगर निगम ने करीब दो साल पहले हाउस टैक्स 15 से 20 गुना अधिक बढ़ा दिया, जिसका नगरवासी विरोध करते रह गए मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा शहर की जनता सीवर, सड़क, नाली, पेयजल समेत अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
नगर निगम के तमाम कार्यों में पारदर्शिता लाई जाएगी। आम नागरिक की सुविधाओं काध्यान रखना मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी। मेरा प्रयास बिना भेदभाव के सभी क्षेत्रों का बराबर विकास करने का रहेगा। तमाम पार्षदों को साथ लेकर चला जाएगा, तभी सबका साथ और सबका विकास की सोच सार्थक होगी।
- संजीव वालिया, मेयर।
मेयर और पार्षदों के लिए सदन तैयार करने में जुटा निगम
सहारनपुर। नगर का पहला मेयर चुने जाने के बाद नगर निगम प्रशासन मेयर और पार्षदों की बैठक के लिए सदन तैयार करने में जुटा है। मेयर के बैठने के लिए नगरायुक्त के ऑफिस की बराबर में व्यवस्था की गई है, जबकि पार्षदों के संयुक्त बैठने के लिए अलग से व्यवस्था चल रही है।
सदन तैयार न होने तक मेयर जनमंच प्रेक्षागृह में अपनी बैठक ले सकेंगे। शहर के निगम बनने के बाद अभी तक मेयर का चुनाव नहीं हो सका था। ऐसे में अभी तक मेयर या पार्षदों के बैठने या बैठक लेने की व्यवस्था करने की जरूरत महसूस नहीं की गई थी।
मगर अब जबकि मेयर और पार्षद चुने जा चुके हैं तो नगर निगम प्रशासन ने तमाम व्यवस्थाएं करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले मेयर के बैठने के लिए ऑफिस तैयार किया गया है, जो नगरायुक्त के दफ्तर के ठीक बराबर में है।
पार्षदों के संयुक्त बैठने के लिए नगरायुक्त कार्यालय के ऊपर बने हॉल में व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा बोर्ड की बैठकों के लिए सदन बनाया जाना है। इसके लिए भी अलग से हॉल को सुविधा संपन्न बनाने का काम किया जा रहा है। जब तक सदन तैयार नहीं हो जाता, तब तक मेयर पार्षदों के साथ बैठक जनमंच प्रेक्षागृह में ले सकेंगे।
जनता की प्रमुख समस्याएं
-50 फीसदी घरों में पेयजल की सुविधा न होना।
-60 फीसदी से अधिक क्षेत्र में सीवर लाइन न होना।
-हाउस टैक्स का 20 गुना तक बढ़ाया जाना।
-शहर की सभी प्रमुख और गलियों की सड़कें टूटी होना।
-पथ प्रकाश व्यवस्था ठीक न होना।
-आम आदमी की नगर निगम में सुनवाई न होना।
-तमाम नालियां और नाले कचरे से अटे होना।