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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Flee in fear from Kairana

खौफ में कैराना से किया पलायन  

Tue, 14 Jun 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 14 Jun 2016 12:32 AM IST
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Flee in fear from Kairana
Kairana came fleeing family. - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में कैराना में दहशत और गुंडागर्दी का माहौल नया नहीं है। यहां लगभग दो दशकों से लोग दहशत के साये में रह रहे हैं। सिर्फ सहारनपुर में ही कैराना से लगभग 150 परिवार पिछले 20 सालों में अपना रोजगार समेटकर आ चुके हैं। किसी को धमकी मिली तो किसी की आंखों के सामने खूनी खेल हुआ और कोई रंगदारी मांगने से आजिज होकर अपनी जन्मभूमि छोड़ने पर विवश हो गया।  
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घर के सामने कत्ल हुआ तो छोड़ दिया कैराना 
शहर के मिश्रान बाजार में रेडीमेड गारमेंट्स की दुकान करने वाले ऋषिपाल वर्मा की कैराना के मोहल्ला पीपलो तला में रेडीमेड गारमेंट्स की बड़ी दुकान थी। वहां हो रही आपराधिक घटनाओं से खौफ का माहौल था।
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ऋषिपाल बताते हैं कि एक दिन उनके घर के सामने रहने वाले जैन समाज के एक व्यक्ति को तड़के लगभग पांच बजे दूसरे संप्रदाय के 14 साल के किशोर ने सीने से सटाकर गोली मार दी थी। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि अब इस कस्बे से जाना ही बेहतर है।
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जहां दिनदहाड़े बिना किसी बात पर सीधे साधे व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया गया। वे तीनों भाई योगिंद्र, रविंद्र और पंकज के साथ कैराना को छोड़कर सहारनपुर चले आए। यहां नए सिरे से उन्होंने अपना काम शुरू किया।  

परिवार में मर्डर हुआ तो छोड़ दिया आशियाना 
शहर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी का कहना है कि कैराना में उनका अच्छा खासा कारोबार था लेकिन वहां के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे। एक दिन मामूली कहासुनी को लेकर दूसरे संप्रदाय के एक व्यक्ति ने उनके परिवार के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी।

हत्यारे का कुछ भी नहीं बिगड़ा और लगातार धमकी देता रहा। ऐसे हालातों में उनका कैराना में रहना मुश्किल हो गया और वहां से उन्हें पलायन कर सहारनपुर आना पड़ा। वहां उनका काफी पैसा फंसा रह गया। जो कई सालों में आधा अधूरा मिल पाया।  

ऐसे एक नहीं करीब 150 परिवार हैं। हालांकि वे खुलकर सामने आने से कतरा रहे हैं। वे अपनी पहचान तक नहीं बताना चाह रहे हैं। अब वे कैराना नहीं जाना देखना चाहते हैं। वहां दूसरे संप्रदाय के लोगों की गुंडागर्दी पूरी तरह हावी है।

जिसे राजनैतिक संरक्षण मिला हुआ है। छोटे छोटे बच्चे भी अपराध करने लगे हैं। कानून का किसी को डर नहीं है। वहां अब सभ्य परिवारों का रहना मुश्किल हो गया है। खासकर व्यापारिक एवं संपन्न लोग सुरक्षित नहीं रह गए है। 

मुर्गा और एक बोतल शराब के लिए कर देते हैं खून 
सहारनपुर। एक दशक पहले कैराना से सहारनपुर आए एक व्यापारी ने बताया कि 20 साल में कैराना के हालात बदतर हुए हैं।

उस समय भी शहर में एक हत्या हुई थी। दूसरे संप्रदाय के एक व्यक्ति को सिर्फ एक मुर्गा और एक बोतल देकर हत्या करा दी गई थी। अब तो वहां कोई न कोई वारदातें आए दिन हो रही हैं।

हालात बुरे थे, जान बचाने के लिए छोड़ दिया था कैराना
नानौता। कैराना में बढ़ती छेड़छाड़ और आपराधिक घटनाओं को लेकर असुरक्षित महसूस करने वाले दो परिवारों ने छह वर्ष पहले पलायन कर नानौता में आशियाना बनाया। आज भी कैराना की बात करने पर उनके आंसू बहने लगते हैं। 

चीनी मिल के पास स्थित राजीव गांधी कॉलोनी निवासी धन सिंह रोड बताते हैं कि उनका परिवार कैराना के मोहल्ला कायस्थान में रहकर खेती करता था। उन्हें अपने पशुओं को खेत से घर लाते ले जाते समय दूसरे संप्रदाय के लोगों के मोहल्ले से होकर गुजरना पड़ता था।

जहां उनके और परिजनों के साथ अभद्रता की जाती थी, जिसका विरोध करने पर उनके साथ मारपीट तक की गई। पुलिस में शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती थी।

धन सिंह की पत्नी प्रेमो देवी ने बताया पुलिस की लापरवाही से मनचले बेखौफ थे और महिलाओं को घर से बाहर निकला भी मुश्किल हो गया था। इन सब परेशानियों को देखते हुए उन्होंने 2010 में कैराना छोड़ने के लिए अपना मकान जिसकी कीमत उस समय 20 लाख रुपये थी,

उसको मात्र छह लाख रुपये में बेच दिया। 22 बीघे जमीन को भी कम कीमत पर बेचना पड़ा जबकि उनकी लगभग 20 बीघे जमीन आज भी कैराना में परिवार के दूसरे लोगों के पास है। 

वहीं कैराना के मोहल्ला बिसातियान निवासी सिलाई का काम करने वाले रवि कुमार कश्यप पुत्र नेहरुलाल कश्यप फिलहाल नानौता में दिल्ली रोड स्थित अनुभव गार्डन कालोनी में रहते हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते अपराध और छेड़छाड़ की घटनाओं से वहां रहना दूभर हो गया था।


उन्होंने कहा कि कैराना को छोड़ने का मुख्य कारण वहां दूसरे संप्रदाय के बदमाशों के भय और बच्चों को सुरक्षा को देखते हुए मजबूरी में कैराना से पलायन किया।
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