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तीन तलाक के विरोध में उतरी देवबंदी महिलाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 31 Dec 2017 12:03 AM IST
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तीन तलाक के विरोध में देवबंदी महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के देवबंद में ट्रिपल तलाक को लेकर लोकसभा में पेश किए गए तीन साल की सजा वाले बिल को लेकर मुस्लिम महिलाओं का विरोध जोर पकड़ता जा रहा है। शनिवार को ऑल इंडिया मजलिस तहाफ्फुज-ए-ख्वातीन ने इसका विरोध करते हुए दो टूक कहा केंद्र बिना वजह शरीयत में दखलअंदाजी कर रही है।
सरकार मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी रखती है तो उन्हें शिक्षा और रोजगार में आरक्षण क्यों नहीं देती। शनिवार को मौलाना मदनी मार्ग स्थित पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज में आयोजित बैठक में आलिमा सबा हसीब सिद्दीकी ने कहा कि केंद्र सरकार बिल के बहाने अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रही है।
मुल्क में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों को भारतीय संविधान से मजहबी आधार पर जिंदगी जीने का पूरा अधिकार प्राप्त है। उसके बावजूद केंद्र सरकार हठधर्मी करते हुए तीन तलाक को लेकर खामियों से भरा बिल लोकसभा में पेश किया। जिसमें मुस्लिम महिलाएं किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
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क्योंकि वे शरीयत पर यकीन रखती हैं और उसी के मुताबिक जिंदगी गुजर करेंगी। उन्होंने राज्यसभा के सदस्यों से मांग करते हुए कहा कि जब तक इस बिल में मौजूद खामियों को दूर नहीं किया जाता और शरीयत के मुताबिक इसमें संशोधन नहीं किया जाता तब तक इसे राज्यसभा में पारित न किया जाए।
रिफअत उस्मानी व रुबीना शहजाद ने संयुक्त रुप से केंद्र सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने तथा मुल्क की सेक्यूलर छवि को खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि तीन तलाक के शरई मसले में केंद्र सरकार बिना वजह दखलअंदाजी कर रही है।
जबकि सरकार में बैठे नुमाइंदों को यह तक पता नहीं किया तीन तलाक को लेकर शरीयत के क्या कानून हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उनकी रहनुमाई कर रहा है इसलिए वह बोर्ड के साथ खड़ी हैं।
बता दें कि शुक्रवार को नगर के बेरुन कोटला में महिलाओं ने बैठक कर लोकसभा में पेश किए गए बिल का पुरजोर विरोध करते हुए मोदी सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया था। इस मौके पर साजदा बेगम, साइमा महफूज, रुहीना परवीन, हफ्सा नाज, शाईस्ता परवीन, नुसरत जहां, जेबा नाज, शाकरा जिया, सादिया उस्मानी, आफरीन मौजूद रहीं।
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सरकार मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी रखती है तो उन्हें शिक्षा और रोजगार में आरक्षण क्यों नहीं देती। शनिवार को मौलाना मदनी मार्ग स्थित पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज में आयोजित बैठक में आलिमा सबा हसीब सिद्दीकी ने कहा कि केंद्र सरकार बिल के बहाने अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रही है।
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मुल्क में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों को भारतीय संविधान से मजहबी आधार पर जिंदगी जीने का पूरा अधिकार प्राप्त है। उसके बावजूद केंद्र सरकार हठधर्मी करते हुए तीन तलाक को लेकर खामियों से भरा बिल लोकसभा में पेश किया। जिसमें मुस्लिम महिलाएं किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
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क्योंकि वे शरीयत पर यकीन रखती हैं और उसी के मुताबिक जिंदगी गुजर करेंगी। उन्होंने राज्यसभा के सदस्यों से मांग करते हुए कहा कि जब तक इस बिल में मौजूद खामियों को दूर नहीं किया जाता और शरीयत के मुताबिक इसमें संशोधन नहीं किया जाता तब तक इसे राज्यसभा में पारित न किया जाए।
रिफअत उस्मानी व रुबीना शहजाद ने संयुक्त रुप से केंद्र सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने तथा मुल्क की सेक्यूलर छवि को खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि तीन तलाक के शरई मसले में केंद्र सरकार बिना वजह दखलअंदाजी कर रही है।
जबकि सरकार में बैठे नुमाइंदों को यह तक पता नहीं किया तीन तलाक को लेकर शरीयत के क्या कानून हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उनकी रहनुमाई कर रहा है इसलिए वह बोर्ड के साथ खड़ी हैं।
बता दें कि शुक्रवार को नगर के बेरुन कोटला में महिलाओं ने बैठक कर लोकसभा में पेश किए गए बिल का पुरजोर विरोध करते हुए मोदी सरकार पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया था। इस मौके पर साजदा बेगम, साइमा महफूज, रुहीना परवीन, हफ्सा नाज, शाईस्ता परवीन, नुसरत जहां, जेबा नाज, शाकरा जिया, सादिया उस्मानी, आफरीन मौजूद रहीं।