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डेयरी पर महंगाई की मार, घाटे का सौदा हो गया कारोबार
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डेयरी संचालक पप्पू चौधरी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। आज दूध क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन की जयंती को हम राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मना रहे हैं। दूध क्रांति के बावजूद में जनपद में डेयरी कारोबार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। कारोबारियों को लागत निकालना मुश्किल हो गया। इसी वजह से प्रतिदिन जिले में चार लाख लीटर से घटकर दूध का उत्पादन दो लाख ही रह गया है।
जिले में 50 प्रतिशत दूध की आपूर्ति पैकेट वाले दूध से तो 50 प्रतिशत डेयरियों से होती है। चार साल पहले तक छह हजार डेयरियां थी, जो घटकर करीब तीन हजार रह गई हैं। इसका कारण महंगाई को माना जा रहा है। एक तरफ जहां दुधारू पशुओं की कीमत बढ़ गई वहीं दूसरी तरफ चारा भी काफी महंगा हो गया है। इसके बाद लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। इसी वजह से डेयरियों पर संकट आ गया है। कारोबारी डेयरी बंद करने को मजबूर हैं। इसी वजह से दूध का उत्पादन भी आधा रह गया।
लगातार हो रहा नुकसान
डेयरी संचालक संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय वालिया का कहना है कि डेयरी कारोबार में लगातार घाटा हो रहा है। सरकार की तरफ से दिए जाने वाले ऋण में सब्सिडी नहीं दी जा रही है। सहकारी दूध संघों से उचित मूल्य व समय पर भुगतान न होने की वजह से पशुपालक निजी डेयरी संचालकों को दूध बेचने को मजबूर हैं, लेकिन उसके बाद भी लागत मूल्य निकलना मुश्किल हो गया है। शारदानगर के डेयरी संचालक रवि गवाला का कहना है कि बीते चार सालों में डेयरी कारोबार में मुनाफा नहीं हो रहा है। कोरोना काल के बाद से स्थिति ज्यादा खराब हुई। डेरा इलाहीपुरा निवासी संचालक पप्पू चौधरी ने बताया कि दूध के उचित दाम पशु पालकों को नहीं मिल पा रहे हैं। इसी वजह से डेयरियां बंद होती जा रही हैं। आने वाले दिनों उचित गुणवत्ता वाला दूध मिलना मुश्किल हो जाएगा।
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मेहनत व ईमानदारी से हुए सफल
छह साल पूर्व कामधेनु योजना के तहत जिले में डेयरियों की दस बड़ी यूनिट लगाई गई थी, लेकिन इनमें से मात्र एक यूनिट गांव गदनपुरा में बची है। यूनिट संचालक कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शशी वालिया का कहना है कि ईमानदारी और मेहनत बल पर उनकी यूनिट सफल हो पाई है। ऋण समय पर चुकाएं और सरकार की शर्तों का पालन करेंगे तो कारोबार जरूर सफल होगा। वह खुद ही डेयरी की देखरेख करते हैं, जहां से दूूध, मावा, घी, पनीर और दही सहित अन्य उत्पाद तैयार कर बेचे जाते हैं।
माइक्रो व मिनी कामधेनु में मर्ज हुई कई यूनिट
कामधेनु योजना बड़ा प्रोजेक्ट होने की वजह आवेदन करने वाले पशु पालकों के सामने दिक्कत आई। तब, इस योजना को मिनी कामधेनु में बदला गया है। मिनी कामधेनु में 18 और माइक्रो में दस डेयरियां संचालित हो रही हैं।
एक सहकारी क्षेत्र और एक चल रहा निजी प्लांट
जिले में चकहरेटी में सहकारी क्षेत्र डेयरी प्लांट चल रहा है। यहां करीब 15 हजार लीटर दूध का रोजाना उत्पादन होता है। इंचार्ज ओम कुमार ने बताया कि पूर्व की अपेक्षा उत्पादन घटा है। इसी तरह नानौता में एक निजी कंपनी का प्लांट चल रहा है।
लिए गए 60 नमूने, 40 पर कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अभिहित अधिकारी रणधीर सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष में दूध से संबंधित 60 नमूने लिए गए हैं, जिनमें 40 नमूने फेल हुए हैं। इन डेयरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
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जिले में 50 प्रतिशत दूध की आपूर्ति पैकेट वाले दूध से तो 50 प्रतिशत डेयरियों से होती है। चार साल पहले तक छह हजार डेयरियां थी, जो घटकर करीब तीन हजार रह गई हैं। इसका कारण महंगाई को माना जा रहा है। एक तरफ जहां दुधारू पशुओं की कीमत बढ़ गई वहीं दूसरी तरफ चारा भी काफी महंगा हो गया है। इसके बाद लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। इसी वजह से डेयरियों पर संकट आ गया है। कारोबारी डेयरी बंद करने को मजबूर हैं। इसी वजह से दूध का उत्पादन भी आधा रह गया।
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लगातार हो रहा नुकसान
डेयरी संचालक संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय वालिया का कहना है कि डेयरी कारोबार में लगातार घाटा हो रहा है। सरकार की तरफ से दिए जाने वाले ऋण में सब्सिडी नहीं दी जा रही है। सहकारी दूध संघों से उचित मूल्य व समय पर भुगतान न होने की वजह से पशुपालक निजी डेयरी संचालकों को दूध बेचने को मजबूर हैं, लेकिन उसके बाद भी लागत मूल्य निकलना मुश्किल हो गया है। शारदानगर के डेयरी संचालक रवि गवाला का कहना है कि बीते चार सालों में डेयरी कारोबार में मुनाफा नहीं हो रहा है। कोरोना काल के बाद से स्थिति ज्यादा खराब हुई। डेरा इलाहीपुरा निवासी संचालक पप्पू चौधरी ने बताया कि दूध के उचित दाम पशु पालकों को नहीं मिल पा रहे हैं। इसी वजह से डेयरियां बंद होती जा रही हैं। आने वाले दिनों उचित गुणवत्ता वाला दूध मिलना मुश्किल हो जाएगा।
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मेहनत व ईमानदारी से हुए सफल
छह साल पूर्व कामधेनु योजना के तहत जिले में डेयरियों की दस बड़ी यूनिट लगाई गई थी, लेकिन इनमें से मात्र एक यूनिट गांव गदनपुरा में बची है। यूनिट संचालक कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शशी वालिया का कहना है कि ईमानदारी और मेहनत बल पर उनकी यूनिट सफल हो पाई है। ऋण समय पर चुकाएं और सरकार की शर्तों का पालन करेंगे तो कारोबार जरूर सफल होगा। वह खुद ही डेयरी की देखरेख करते हैं, जहां से दूूध, मावा, घी, पनीर और दही सहित अन्य उत्पाद तैयार कर बेचे जाते हैं।
माइक्रो व मिनी कामधेनु में मर्ज हुई कई यूनिट
कामधेनु योजना बड़ा प्रोजेक्ट होने की वजह आवेदन करने वाले पशु पालकों के सामने दिक्कत आई। तब, इस योजना को मिनी कामधेनु में बदला गया है। मिनी कामधेनु में 18 और माइक्रो में दस डेयरियां संचालित हो रही हैं।
एक सहकारी क्षेत्र और एक चल रहा निजी प्लांट
जिले में चकहरेटी में सहकारी क्षेत्र डेयरी प्लांट चल रहा है। यहां करीब 15 हजार लीटर दूध का रोजाना उत्पादन होता है। इंचार्ज ओम कुमार ने बताया कि पूर्व की अपेक्षा उत्पादन घटा है। इसी तरह नानौता में एक निजी कंपनी का प्लांट चल रहा है।
लिए गए 60 नमूने, 40 पर कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अभिहित अधिकारी रणधीर सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष में दूध से संबंधित 60 नमूने लिए गए हैं, जिनमें 40 नमूने फेल हुए हैं। इन डेयरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

डेयरी संचालक रवि ग्वाला- फोटो : SAHARANPUR

डेयरी संचालक संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय वालिया- फोटो : SAHARANPUR