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आखिर किसने दी आतंकी अब्दुल्लाह के पासपोर्ट पर रिपोर्ट ?
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:36 AM IST
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आखिर किसने दी आतंकी अब्दुल्लाह के पासपोर्ट पर रिपोर्ट ?
सहारनपुर। बांग्लादेशी आतंकी को एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसके पास से मिले पासपोर्ट और आधार कार्ड को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। एलआईयू जैसी खुफिया एजेंसी ने भी बिना किसी जांच के अपनी रिपोर्ट लगा दी। पुलिस ने भी न जाने किस तरह पासपोर्ट का वेरिफिकेशन कर मुहर लगा दी।
एटीएस और एसटीएफ की पूछताछ में आतंकी अब्दुल्लाह ने देवबंद में रहते हुए सहारनपुर से पासपोर्ट बनाए जाने की बात स्वीकारी है। उसने एटीएस की पूछताछ में यह भी बताया कि पासपोर्ट बनवाने के लिए उसने 9000 रुपये एक व्यक्ति को दिए। इतनी राशि में जब अब्दुल्लाह ने जिस व्यक्ति से पासपोर्ट बनवा लिया। उसने न जाने कितने फर्जी पासपोर्ट बनवा लिए होंगे। इससे एलआईयू की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
खुफिया एजेंसी पर भरोसा किया जाता है। लेकिन वहां से बिना किसी वेरिफिकेशन के ही रिपोर्ट आखिर किसने लगा दी ? किसके दबाव में अधिकारियों ने जांच करना जरूरी नहीं समझा। एलआईयू जैसी संस्था से भी इतनी बड़ी लापरवाही हो गई। पुलिस को पब्लिक के सबसे नजदीक माना जाता है। संबंधित थाना पुलिस की रिपोर्ट भी लगती है और पासपोर्ट के लिए आवेदक के घर तक जाकर वेरिफिकेशन किया जाता है। लेकिन अब्दुल्लाह के मामले ने पुलिस की भी कार्यशैली दागदार नजर आ रही है। पुलिस ने किसके कहने पर अपनी मुहर पासपोर्ट के कागजों पर लगा दी। पुलिस अभी भी इस मामले में चुप्पी साधकर बैठी है। एटीएस और एसटीएफ की कार्रवाई ने पुलिस की कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी है।
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एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है। लापरवाही किस स्तर से हुई है, इसका पता लगाया जा रहा है। उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सहारनपुर। बांग्लादेशी आतंकी को एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसके पास से मिले पासपोर्ट और आधार कार्ड को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। एलआईयू जैसी खुफिया एजेंसी ने भी बिना किसी जांच के अपनी रिपोर्ट लगा दी। पुलिस ने भी न जाने किस तरह पासपोर्ट का वेरिफिकेशन कर मुहर लगा दी।
एटीएस और एसटीएफ की पूछताछ में आतंकी अब्दुल्लाह ने देवबंद में रहते हुए सहारनपुर से पासपोर्ट बनाए जाने की बात स्वीकारी है। उसने एटीएस की पूछताछ में यह भी बताया कि पासपोर्ट बनवाने के लिए उसने 9000 रुपये एक व्यक्ति को दिए। इतनी राशि में जब अब्दुल्लाह ने जिस व्यक्ति से पासपोर्ट बनवा लिया। उसने न जाने कितने फर्जी पासपोर्ट बनवा लिए होंगे। इससे एलआईयू की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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खुफिया एजेंसी पर भरोसा किया जाता है। लेकिन वहां से बिना किसी वेरिफिकेशन के ही रिपोर्ट आखिर किसने लगा दी ? किसके दबाव में अधिकारियों ने जांच करना जरूरी नहीं समझा। एलआईयू जैसी संस्था से भी इतनी बड़ी लापरवाही हो गई। पुलिस को पब्लिक के सबसे नजदीक माना जाता है। संबंधित थाना पुलिस की रिपोर्ट भी लगती है और पासपोर्ट के लिए आवेदक के घर तक जाकर वेरिफिकेशन किया जाता है। लेकिन अब्दुल्लाह के मामले ने पुलिस की भी कार्यशैली दागदार नजर आ रही है। पुलिस ने किसके कहने पर अपनी मुहर पासपोर्ट के कागजों पर लगा दी। पुलिस अभी भी इस मामले में चुप्पी साधकर बैठी है। एटीएस और एसटीएफ की कार्रवाई ने पुलिस की कार्यशैली की पोल खोल कर रख दी है।
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एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है। लापरवाही किस स्तर से हुई है, इसका पता लगाया जा रहा है। उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।