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हाईटेक युवाओं पर आतंकियों की नजर
Updated Mon, 07 Aug 2017 12:24 AM IST
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सहारनपुर। इंटेलीजेंस एजेंसियां अलर्ट कर चुकी हैं कि आतंकी संगठन देश के युवाओं को बरगला रही हैं। खुफिया सूचनाएं एकत्रित कराने के साथ साथ आतंकी गतिविधियों में इनका प्रयोग किया जा रहा है। खास बात यह है कि ऐसे युवाओं को टारगेट बनाया जा रहा है जो हाईटेक होने के साथ साथ गरीबी से तंग है। धर्म के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। साफ्टवेयर, सिविल इंजीनियर, मनोविज्ञानी और हैकिंग में एक्सपर्ट युवाओं की संलिप्तता पूर्व में हुई आतंकी गतिविधियों में उजागर भी हो चुकी है। देवबंद सहित पूरे वेस्ट यूपी में एटीएस की गिरफ्तारियों में ज्यादातर संदिग्धों की उम्र 20 से 25 साल की है।
देवबंद से पकड़े गए तीनों संदिग्धों
इसके पहले सहारनपुर से पकड़ा गया एजाज शेख पुत्र सईद शेख ने कंप्यूटर कोर्स कर रखा था। उस पर करीब दो लाख रुपये का कर्ज था। इसके अलावा सहारनपुर में आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़े गये शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल ने यहां के हकीकत नगर में कंप्यूटर सेंटर खोला था। पकड़े जाने से पूर्व वह यहां बच्चों को कंप्यूटर प्रशिक्षण भी देता था। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए लश्कर आतंकी अब्दुल सुभान को मनोविज्ञान में महारत हासिल थी। उसने मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा कर यहां के कई युवकों का ब्रेन वॉश कर संगठन से जोड़ा था। 2010 में भी रुड़की के गंगनहर थाना पुलिस के साथ एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आईएसआई एजेंट आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अबू बकर उर्फ अजीत सिंह निवासी हंजरवाल, थाना ठोकर न्याजबेग, लाहौर भी तकनीकी विशेषज्ञ बताया गया था। सबसे बड़ा खुलासा कुछ साल पहले ही मेरठ में पकड़े गए आईएसआई एजेंट आसिफ अली की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ के शिकंजे में फंसे भारतीय सेना के जवान सुनीत कुमार से हुआ था। सुनीत से सेना की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक का प्रयोग किया गया था। फेसबुक फ्रेंड पूनम प्रकाश उससे सेना पर रिसर्च के बहाने सैन्य जानकारी जुटाती रही थी। कई अन्य लोग भी उसके संपर्क में थे। ऐसे तमाम मामले सामने आ चुके हैं जब युवाओं को बरगला कर आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन आदि अपने नापाक इरादे दिखा चुके हैं। पकड़े गए संदिग्ध बांग्लादेश के अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के सदस्य माने जा रहे हैं। इस संगठन को अलकायदा से प्रेरित संगठन बताया जा रहा है। इस संगठन का टारगेट भी हाईटेक छात्र ही रहते हैं।
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देवबंद से पकड़े गए तीनों संदिग्धों
इसके पहले सहारनपुर से पकड़ा गया एजाज शेख पुत्र सईद शेख ने कंप्यूटर कोर्स कर रखा था। उस पर करीब दो लाख रुपये का कर्ज था। इसके अलावा सहारनपुर में आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़े गये शाहिद इकबाल भट्टी उर्फ देवराज सहगल ने यहां के हकीकत नगर में कंप्यूटर सेंटर खोला था। पकड़े जाने से पूर्व वह यहां बच्चों को कंप्यूटर प्रशिक्षण भी देता था। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए लश्कर आतंकी अब्दुल सुभान को मनोविज्ञान में महारत हासिल थी। उसने मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा कर यहां के कई युवकों का ब्रेन वॉश कर संगठन से जोड़ा था। 2010 में भी रुड़की के गंगनहर थाना पुलिस के साथ एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आईएसआई एजेंट आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अबू बकर उर्फ अजीत सिंह निवासी हंजरवाल, थाना ठोकर न्याजबेग, लाहौर भी तकनीकी विशेषज्ञ बताया गया था। सबसे बड़ा खुलासा कुछ साल पहले ही मेरठ में पकड़े गए आईएसआई एजेंट आसिफ अली की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ के शिकंजे में फंसे भारतीय सेना के जवान सुनीत कुमार से हुआ था। सुनीत से सेना की जानकारी हासिल करने के लिए फेसबुक का प्रयोग किया गया था। फेसबुक फ्रेंड पूनम प्रकाश उससे सेना पर रिसर्च के बहाने सैन्य जानकारी जुटाती रही थी। कई अन्य लोग भी उसके संपर्क में थे। ऐसे तमाम मामले सामने आ चुके हैं जब युवाओं को बरगला कर आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन आदि अपने नापाक इरादे दिखा चुके हैं। पकड़े गए संदिग्ध बांग्लादेश के अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के सदस्य माने जा रहे हैं। इस संगठन को अलकायदा से प्रेरित संगठन बताया जा रहा है। इस संगठन का टारगेट भी हाईटेक छात्र ही रहते हैं।
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