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इल्म हासिल करने में कोई रुकावट नहीं
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 09 Feb 2016 12:45 AM IST
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देवबंद में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि इस्लाम औरत और मर्द दोनों के लिए इल्म हासिल करने की दावत देता है। राजस्थान में दो महिलाओं के काजी बनने से तालीम को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए एक औरत का अच्छा आलिम-ए-दीन होना इसमें कोई रुकावट नहीं है।
सोमवार को विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि मौलाना अशरफ अली थानवी ने औरतों की दीनी तालीम के लिए बेशती जेवर भी लिखी है, जो दुनियाभर में पढ़ी जाती है। तारीखे इस्लाम में बड़ी बड़ी आलिमाओं का जिक्र मिलता है। इसलिए जहां तक एक औरत के आलिमा बनने की बात है, तो उसमें कुछ शर्त के साथ कोई पाबंदी नहीं है।
बनारसी ने कहा कि हिंदुस्तान में औरतों को आलिमा बनाने के बहुत से मदरसे चल रहे हैं। इनसे फारिग होकर बहुत सी औरतें आलिमा बन रही हैं। साथ ही कहा कि मां के पास अगर अच्छा इल्मेदीन है. तो उसके बच्चों में भी वो यकीनी तौर पर स्थानांतरित होगा। इसलिए इल्म हासिल करना इस्लाम के नजदीक औरत और मर्द दोनों पर लाजिम है। हालांकि औरत के लिए मजहबी पेशवाई (धार्मिक गुरु) की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि एक औरत अगर फिक्ह व कुरआन हदीस से वाकिफ है तो इस्लाम उसकी मुखालफत नहीं करता।
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सोमवार को विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि मौलाना अशरफ अली थानवी ने औरतों की दीनी तालीम के लिए बेशती जेवर भी लिखी है, जो दुनियाभर में पढ़ी जाती है। तारीखे इस्लाम में बड़ी बड़ी आलिमाओं का जिक्र मिलता है। इसलिए जहां तक एक औरत के आलिमा बनने की बात है, तो उसमें कुछ शर्त के साथ कोई पाबंदी नहीं है।
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बनारसी ने कहा कि हिंदुस्तान में औरतों को आलिमा बनाने के बहुत से मदरसे चल रहे हैं। इनसे फारिग होकर बहुत सी औरतें आलिमा बन रही हैं। साथ ही कहा कि मां के पास अगर अच्छा इल्मेदीन है. तो उसके बच्चों में भी वो यकीनी तौर पर स्थानांतरित होगा। इसलिए इल्म हासिल करना इस्लाम के नजदीक औरत और मर्द दोनों पर लाजिम है। हालांकि औरत के लिए मजहबी पेशवाई (धार्मिक गुरु) की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि एक औरत अगर फिक्ह व कुरआन हदीस से वाकिफ है तो इस्लाम उसकी मुखालफत नहीं करता।
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