फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Ambulance service not improving despite corona infection

कोरोना संक्रमण के बावजूद एंबुलेंस सेवा में सुधार नहीं

Sun, 26 Dec 2021 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Dec 2021 11:57 PM IST
विज्ञापन
Ambulance service not improving despite corona infection
सहारनपुर। कोरोना की दूसरी लहर सरकारी एंबुलेंस चालकों व स्टाफ के लिए चुनौती भरी रही। जिसका प्रमुख कारण जनपद में महज 65 सरकारी एंबुलेंस होना रहा। इसकी वजह से स्थिति यह रही कि एंबुलेंस के चालकों-परिचालकों को 24 घंटे काम करना पड़ा। एक-एक एंबुलेंस प्रतिदिन 400 से 500 किलोमीटर तक दौड़ी। इसके बावजूद तीसरी लहर से निपटने के लिए एंबुलेंस की दिशा में कोई सुधार नहीं किया। अमर उजाला ने एंबुलेंस के चालकों व स्टाफ से बात की तथा उनके अनुभव को जानने का प्रयास किया। पेश है रिपोर्ट...
विज्ञापन

जनपद में एंबुलेंस की स्थिति
एंबुलेंस--------संख्या
108------------33
102------------29
एएलएस-------03
कुल एंबुलेंस----65
एंबुलेंस पर स्टाफ की स्थिति
प्रत्येक सरकारी एंबुलेंस पर दो चालक और दो ईएमटी (आपातकालीन चिकित्सा टेक्नीशियन) की व्यवस्था है। इनकी 12-12 घंटे की ड्यूटी रहती है। इस प्रकार 65 गाड़ियों पर करीब 130 चालक और ईएमटी तैनात हैं।
विज्ञापन

40 लाख की आबादी पर महज 65 एंबुलेंस
जिले की आबादी करीब 40 लाख है। जिनके लिए स्वास्थ्य विभाग के पास महज 65 एंबुलेंस हैं। इन पर हादसों में घायलों को अस्पताल लाने व गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल पहुंचाने तथा छुट्टी के बाद घर छोड़ने की जिम्मेदारी है। जिले में पीड़ित तक जल्द से जल्द एंबुलेंस पहुंचे। इसके लिए जनपद में जगह-जगह हॉटस्पॉट बनाए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एंबुलेंस स्टाफ का पक्ष
500 किलोमीटर तक एंबुलेंस चलाई
अहमद अली 108 एंबुलेंस यूपी 32 ईजी 9775 चलाते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में 500 किलोमीटर तक गाड़ी चलाई।एक मरीज को कोविड अस्पताल छोड़कर आते थे। उससे पहले और दूसरे की सूचना आ जाती थी।
12-12 घंटे पीपीई किट पहनकर किया काम
प्रदीप कुमार एंबुलेंस यूपी 32 ईजी 1313 पर ईएमटी हैं। उन्होंने बताया कि दूसरी लहर में गर्मी के बावजूद 12-12 घंटे तक पीपीई किट पहनकर काम किया। चाहकर भी किट नहीं उतार सकते थे। मुश्किलों के साथ मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाया।
दो माह तक घर नहीं गए
पवन कुमार यूपी 32 ईजी 9263 के चालक हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में एंबुलेंस चालकों और स्टाफ पर बड़ी जिम्मेदारी थी। चिकित्सक मरीज को बाद में देखते थे, पहले एंबुलेंस स्टाफ को उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ता था। दो माह तक घर नहीं गए थे।
मरीज की खातिर नहीं की अपनी परवाह
ईएमटी राजकुमार एंबुलेंस यूपी 32 इजी 0486 पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में परिजन भी मरीज को छूने से डरते थे। ऐसी स्थिति में उन लोगों ने पीपीई किट पहनकर मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया।

हर स्थिति में काम को तैयार
सुधांशु सक्सेना एंबुलेंस सेवा के प्रभारी हैं। उनका कहना है कि दूसरी लहर में मरीजों की अधिक संख्या के कारण परेशानी रही परंतु इसकी जिम्मेदारी हमने ली है। ऐसे में अपनी परवाह न कर मरीजों को जल्द से जल्द इलाज दिलाने का प्रयास रहता है। हमारा स्टाफ हर स्थिति में काम करने के लिए तैैयार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed