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फजीहत के बाद कमेला सील
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:21 AM IST
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Putting in Kamelle seal.
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के गंगोह में आखिरकार बैकफुट पर आए प्रशासन को अवैध रूप से चल रहे नगर पालिका के कमेला पर सील लगानी ही पड़ी। अमर उजाला ने 11 जून को मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
बड़ा सवाल यह है कि जब आज भी पिछले आदेशों पर ही सील लगाई गई है तो करीब एक पखवाड़े से भी अधिक समय तक अवैध रूप से कमेला का संचालन क्यों करने दिया गया?
बृहस्पतिवार को एसडीएम मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर नायब तहसीलदार अशोक कुमार और कोतवाल यशपाल सिंह धामा पुलिस टीम को साथ लेकर तीतरों मार्ग स्थित कमेला पर पहुंचे।
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वहां टीम ने कमेला के भीतर मौजूद लोगों और पशुओं को बाहर निकालकर उसके मुख्य गेट पर सील लगा दी। इस दौरान संचालक और समर्थकों ने विरोध जताया लेकिन अधिकारियों ने उनकी कोई बात नहीं सुनी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत द्वारा 2 जून को पशु वधशाला के ठेकेदार को पुन: सहमति प्राप्त होने तक इस कमेला को तत्काल बंद करने के आदेश दिए गए थे।
आवश्यक कार्रवाई के लिए एसडीएम, सीओ और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भी निर्देशित किया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने गेंद को एक दूसरे के पाले में डालना आरंभ कर दिया और उनकी शह पर कमेला बदस्तूर चलता रहा।
आदेशों के एक सप्ताह बाद भी अवैध रूप से कमेला चलने पर अमर उजाला ने 11 जून को कमेला के संचालन में खेल की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आखिरकार मामले को लेकर अपनी फजीहत झेल रहा प्रशासन बृहस्पतिवार को नींद से जागा और कमेला पर सील लगा दी गई।
उधर, एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने बताया उन्होंने 10 दिन पूर्व ही ज्वाइन किया है। मामला उनके संज्ञान में नही था। कमेला के अवैध रूप से चलने की जानकारी होते ही उन्होंने कार्रवाई की है। अग्रिम आदेशों तक यह कमेला का संचालन बंद रहेगा।
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बड़ा सवाल यह है कि जब आज भी पिछले आदेशों पर ही सील लगाई गई है तो करीब एक पखवाड़े से भी अधिक समय तक अवैध रूप से कमेला का संचालन क्यों करने दिया गया?
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बृहस्पतिवार को एसडीएम मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर नायब तहसीलदार अशोक कुमार और कोतवाल यशपाल सिंह धामा पुलिस टीम को साथ लेकर तीतरों मार्ग स्थित कमेला पर पहुंचे।
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वहां टीम ने कमेला के भीतर मौजूद लोगों और पशुओं को बाहर निकालकर उसके मुख्य गेट पर सील लगा दी। इस दौरान संचालक और समर्थकों ने विरोध जताया लेकिन अधिकारियों ने उनकी कोई बात नहीं सुनी।
बता दें कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत द्वारा 2 जून को पशु वधशाला के ठेकेदार को पुन: सहमति प्राप्त होने तक इस कमेला को तत्काल बंद करने के आदेश दिए गए थे।
आवश्यक कार्रवाई के लिए एसडीएम, सीओ और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भी निर्देशित किया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने गेंद को एक दूसरे के पाले में डालना आरंभ कर दिया और उनकी शह पर कमेला बदस्तूर चलता रहा।
आदेशों के एक सप्ताह बाद भी अवैध रूप से कमेला चलने पर अमर उजाला ने 11 जून को कमेला के संचालन में खेल की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आखिरकार मामले को लेकर अपनी फजीहत झेल रहा प्रशासन बृहस्पतिवार को नींद से जागा और कमेला पर सील लगा दी गई।
उधर, एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने बताया उन्होंने 10 दिन पूर्व ही ज्वाइन किया है। मामला उनके संज्ञान में नही था। कमेला के अवैध रूप से चलने की जानकारी होते ही उन्होंने कार्रवाई की है। अग्रिम आदेशों तक यह कमेला का संचालन बंद रहेगा।