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यमुना में बाढ़ के बाद याद आई सहायक नदियां
Updated Mon, 30 Jul 2018 12:16 AM IST
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लखनौती (सहारनपुर)। यमुना नदी की सहायक नदियों का अतिक्रमण के कारण अस्तित्व समाप्त होने की तरफ है। इस बार यमुना में आई बाढ़ से खेतों में खड़ी फसलें बरबाद होने के बाद ग्रामीणों को अब इनकी याद आ रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र से गुजरने वाली दोनों सहायक नदियों की निशानदेही कराकर उन्हें अपने स्थान पर कायम कर खोदाई कराने की मांग की है।
तहसील नकुड़ के गांव लखनौती से होकर गुजरने वाली दो नदियां सिंधली और बूढ़ी यमुना नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। हालत यह है कि जहां जहां से सड़क गुजर रही है, वहां केवल पुल के पास ही इन नदियों के निशान बचे है। अन्यथा गांवों और जंगलों में नदियों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। गांव के 90 वर्षीय मसता, अजहर अब्बास, लालू खान, जनेश्वर आदि कहना है कि सिंधली नदी और बूढ़ी यमुना नदी यमुना नदी की सहायक नदियां थी। ये सरसावा, चिलकाना, नकुड़ क्षेत्र से शुरू होकर शामली क्षेत्र में जाकर यमुना नदी में मिल जाती थी। ये नदियां चिलकाना, सरसावा, नकुड़, लखनौती आदि क्षेत्र के बारिश का पानी और बाढ़ का अतिरिक्त पानी अपने अंदर समा लेती थी। पिछले कई सालों में बारिश कम होने के कारण इन नदियों का आवश्यकता ही नहीं पड़ी जिस कारण किसानों ने अतिक्रमण करके इन नदियों में खेती करनी आरंभ कर दी।
तीन दिन से लगातार हुई बारिश के बाद लुप्त हुई ये नदियां फिर से याद आ गई हैं। खालिद, आजम, नाथीराम, पूना, अमित कुमार आदि ग्रामीणों ने दोनों नदियों की खोदाई कराने की मांग है, ताकि यमुना नदी का पानी ओवर फ्लो होकर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान करने की बजाए इन नदियों में समा जाए। एसडीएम नकुड़ युगराज सिंह का कहना है कि जल्द ही राजस्व टीमें भेज कर नदियों की निशानदेही करा इनकी खोदाई का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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तहसील नकुड़ के गांव लखनौती से होकर गुजरने वाली दो नदियां सिंधली और बूढ़ी यमुना नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। हालत यह है कि जहां जहां से सड़क गुजर रही है, वहां केवल पुल के पास ही इन नदियों के निशान बचे है। अन्यथा गांवों और जंगलों में नदियों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। गांव के 90 वर्षीय मसता, अजहर अब्बास, लालू खान, जनेश्वर आदि कहना है कि सिंधली नदी और बूढ़ी यमुना नदी यमुना नदी की सहायक नदियां थी। ये सरसावा, चिलकाना, नकुड़ क्षेत्र से शुरू होकर शामली क्षेत्र में जाकर यमुना नदी में मिल जाती थी। ये नदियां चिलकाना, सरसावा, नकुड़, लखनौती आदि क्षेत्र के बारिश का पानी और बाढ़ का अतिरिक्त पानी अपने अंदर समा लेती थी। पिछले कई सालों में बारिश कम होने के कारण इन नदियों का आवश्यकता ही नहीं पड़ी जिस कारण किसानों ने अतिक्रमण करके इन नदियों में खेती करनी आरंभ कर दी।
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तीन दिन से लगातार हुई बारिश के बाद लुप्त हुई ये नदियां फिर से याद आ गई हैं। खालिद, आजम, नाथीराम, पूना, अमित कुमार आदि ग्रामीणों ने दोनों नदियों की खोदाई कराने की मांग है, ताकि यमुना नदी का पानी ओवर फ्लो होकर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान करने की बजाए इन नदियों में समा जाए। एसडीएम नकुड़ युगराज सिंह का कहना है कि जल्द ही राजस्व टीमें भेज कर नदियों की निशानदेही करा इनकी खोदाई का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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