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...लगता है मुहम्मद का दरबार मदीने में
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:27 AM IST
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...लगता है मुहम्मद का दरबार मदीने में
देवबंद (सहारनपुर)। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था जहान-ए-अदब के तत्वावधान में 12 रबिउल अव्वल के मौके पर नातिया महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने उम्दा कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मोहल्ला बैरून कोटला में कार्यक्रम का उद्घाटन ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल के चेयरमैन जमाल नासिर, शमा रोशन अपना विचार मंच के अध्यक्ष नजम उस्मानी और शाहिद सिद्दीकी ने की। तनवीर अजमल ने कहा दुनिया में कोई उनसा आया था ना आएगा, रहते हैं सभी के तो सरदार मदीने में, लौटा ना कभी अजमल उस दर से कोई खाली, लगता है मुहम्मद का दरबार मदीने में। वसीम झिंझानवी ने पढ़ा बशर तो क्या फरिश्ते तमाम करते हैं, नबी दोनों जहां अहतराम करते हैं। शमीम किरतपुरी ने कहा सारे जहां पर नूर के बादल से छा गए, दुनिया में जबसे सय्यदे जिशान आ गया। अदनान अनवर ने कहा ऐ खुदा मुझ में मुहब्बत का खजाना रख दे, दिल में काबा मेरी आंखों में मदीना रख दे। नफीस अहमद ने पढ़ा एक दर्द सा उठता है अक्सर मेरे सीने में, अल्लाह मुझ को बुला ले एक बार मदीने में। इनके अलावा नसीम सहारनपुरी, अंजुम देवबंदी, सुहेल अकमल, नूर अहमद, दिलशाद खुश्तर, रजी उस्मानी, अहसान इलाही, आजम साबरी आदि ने भी खूबसूरत कलाम प्रस्तुत किए। अध्यक्षता शमीम किरतपुरी और संचालन तनवीर अजमल ने किया। इस मौके पर रफी उस्मानी, नौशाद अंसारी, मौ. इरफान, शेख नजीर अहमद, नफीस खान, नदीम कुरैशी, मौ. इस्माइल, नबील उस्मानी, नवाज सिद्दीकी, अनस चौधरी आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था जहान-ए-अदब के तत्वावधान में 12 रबिउल अव्वल के मौके पर नातिया महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने उम्दा कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मोहल्ला बैरून कोटला में कार्यक्रम का उद्घाटन ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल के चेयरमैन जमाल नासिर, शमा रोशन अपना विचार मंच के अध्यक्ष नजम उस्मानी और शाहिद सिद्दीकी ने की। तनवीर अजमल ने कहा दुनिया में कोई उनसा आया था ना आएगा, रहते हैं सभी के तो सरदार मदीने में, लौटा ना कभी अजमल उस दर से कोई खाली, लगता है मुहम्मद का दरबार मदीने में। वसीम झिंझानवी ने पढ़ा बशर तो क्या फरिश्ते तमाम करते हैं, नबी दोनों जहां अहतराम करते हैं। शमीम किरतपुरी ने कहा सारे जहां पर नूर के बादल से छा गए, दुनिया में जबसे सय्यदे जिशान आ गया। अदनान अनवर ने कहा ऐ खुदा मुझ में मुहब्बत का खजाना रख दे, दिल में काबा मेरी आंखों में मदीना रख दे। नफीस अहमद ने पढ़ा एक दर्द सा उठता है अक्सर मेरे सीने में, अल्लाह मुझ को बुला ले एक बार मदीने में। इनके अलावा नसीम सहारनपुरी, अंजुम देवबंदी, सुहेल अकमल, नूर अहमद, दिलशाद खुश्तर, रजी उस्मानी, अहसान इलाही, आजम साबरी आदि ने भी खूबसूरत कलाम प्रस्तुत किए। अध्यक्षता शमीम किरतपुरी और संचालन तनवीर अजमल ने किया। इस मौके पर रफी उस्मानी, नौशाद अंसारी, मौ. इरफान, शेख नजीर अहमद, नफीस खान, नदीम कुरैशी, मौ. इस्माइल, नबील उस्मानी, नवाज सिद्दीकी, अनस चौधरी आदि मौजूद रहे।
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