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अनुशासन हीनता से बिगड़ता है जीवन का संतुलन: आत्मानुभवी--
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:22 PM IST
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अनुशासनहीनता से बिगड़ता है जीवन का संतुलन: आत्मानुभवी
सहारनपुर। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन की नितांत आवश्यकता है। अनुशासन हीनता से जीवन का संतुलन बिगड़ जाता है।
गिल कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में महाराज ने कहा कि जिस देश के लोग अनुशासित रहते हैं, वह देश हमेशा प्रगति करता है। इसलिए अनुशासन बद्घ रहकर जीवन यापन करना बड़ी बुद्धिमता है। भागवत पुराण भौतिक वादियों, मानवता वादियों, संतों एवं भक्त समाज के लिए अनुपम आनंद एवं प्रेरणा दायक ग्रंथ है। भागवत ज्ञान सकारात्मक विचार पैदा करता है, जिससे भारतीय समृद्धि की स्थापना होती है। मन की शांति और संतोष प्राप्ति के लिए परमात्मा का नाम एवं ध्यान चिंतन करना जीवन की सर्वोच्च जरूरत है। धर्म मर्यादाएं खंडित होने के कारण समाज में संकट और क्लेश बढ़ रहा है। अध्यात्म ज्ञान को जब-जब भी समाज ने अपना मूल आधार समझा, तब-तब भारत स्वर्णिम देश के नाम से जाना गया है। नि:स्वार्थ समाजसेवा, जन जन कल्याण एवं परोपकार की भावना जागृति होना ही धर्म का मूलमंत्र है। कुलदीप शर्मा, हरपाल सिंह, रामकुमार सिंह, अशोक कुमार, महेश, केशोराम शर्मा, कृष्णा देवी, सरोज, किरन, मूर्ति, पूनम, वीना, अनुराधा मौजूद रही।
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सहारनपुर। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन की नितांत आवश्यकता है। अनुशासन हीनता से जीवन का संतुलन बिगड़ जाता है।
गिल कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में महाराज ने कहा कि जिस देश के लोग अनुशासित रहते हैं, वह देश हमेशा प्रगति करता है। इसलिए अनुशासन बद्घ रहकर जीवन यापन करना बड़ी बुद्धिमता है। भागवत पुराण भौतिक वादियों, मानवता वादियों, संतों एवं भक्त समाज के लिए अनुपम आनंद एवं प्रेरणा दायक ग्रंथ है। भागवत ज्ञान सकारात्मक विचार पैदा करता है, जिससे भारतीय समृद्धि की स्थापना होती है। मन की शांति और संतोष प्राप्ति के लिए परमात्मा का नाम एवं ध्यान चिंतन करना जीवन की सर्वोच्च जरूरत है। धर्म मर्यादाएं खंडित होने के कारण समाज में संकट और क्लेश बढ़ रहा है। अध्यात्म ज्ञान को जब-जब भी समाज ने अपना मूल आधार समझा, तब-तब भारत स्वर्णिम देश के नाम से जाना गया है। नि:स्वार्थ समाजसेवा, जन जन कल्याण एवं परोपकार की भावना जागृति होना ही धर्म का मूलमंत्र है। कुलदीप शर्मा, हरपाल सिंह, रामकुमार सिंह, अशोक कुमार, महेश, केशोराम शर्मा, कृष्णा देवी, सरोज, किरन, मूर्ति, पूनम, वीना, अनुराधा मौजूद रही।