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संवेदनाओं और भावनाओं को जीवन में उतारता है साहित्य : राम नाईक

Sun, 26 Aug 2018 12:14 AM IST
Updated Sun, 26 Aug 2018 12:14 AM IST
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संवेदनाओं और भावनाओं को जीवन में उतारता है साहित्य : राम नाईक
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि साहित्य से समाज को प्रेरणा मिलती है। खुशी, पीड़ा और संवेदनाओं को समझने का भाव रखने वाला व्यक्ति ही समाज के सामने साहित्य के माध्यम से दिशा प्रदान करता है।
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राज्यपाल राम नाइक शनिवार को कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर की 112वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 15वें शैलीकार सम्मान समारोह में साहित्यकार शोभा त्रिपाठी को शैलीकार सम्मान से सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर साहित्यिक क्षेत्र का बड़ा नाम है। उनके साहित्य मेें शब्दों की ताकत का पता चलता है। अच्छे साहित्य का हमेशा सम्मान होता है। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने शोभा त्रिपाठी की रचना अभी नहीं पढ़ी है, लेकिन उन्हें इतनी जानकारी है कि यह महिलाओं के उत्पीड़न और भावनाओं को लेकर है। शोभा त्रिपाठी ने मार्मिक शब्दों का प्रयोग कर महिला की विवशता को दर्शाया है। अब काफी कुछ बदल गया है। जब वह पढ़ते थे, उस समय उनकी कक्षा में डेढ़ सौ में से मात्र चार ही छात्राएं थीं, लेकिन इस बार संपन्न हुए 26 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में 15 लाख 60 हजार को उपाधि प्रदान की गई। जिनमें 51 प्रतिशत लड़कियां थीं। जिनको मेडल प्रदान किए गए उनमें 66 प्रतिशत लड़कियां शामिल थीं। पहले सिर्फ शिक्षिका और नर्स बनने तक ही लड़कियां सीमित थीं, लेकिन अब हर क्षेत्र में लड़कियां आगे आ चुकी हैं। पायलट तक बन चुकीं हैं। लड़ाकू विमान उड़ाने पर बहस चल ही रही थी, तब तक देश की रक्षा मंत्री भी महिला बन चुकीं थीं। उन्होंने शोभा त्रिपाठी के दंश के बारे में चर्चा सुनी है। जिसका विमोचन पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने किया था। उस किताब को वह अपने साथ ले जाएंगे और उसे पढे़ंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि साहित्य की पहचान उनके शब्द से हैं। शब्द बोधक भी हैं और शब्द बेधक भी हैं। शब्द सम्मान भी बढ़ाते हैं और शब्द जहरीले तीर के समान भी होते हैं। शब्द साहित्य से जुड़ेंगे तो सम्मान होगा। यह सम्मान किसी अर्थ से प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को चलते रहना चाहिए। व्यक्ति चलेगा तो भाग्य भी चलता रहेगा। कार्यक्रम में अखिलेश प्रभाकर, सांसद राघव लखनपाल शर्मा, मेयर संजीव वालिया ने भी लोगों को संबोधित किया।
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-- मुंबई के एक अखबार के लिए लिखे थे संस्मरण
राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि उन्होंने अपनी किताब चरैवेति चरैवेति की रचना एक अखबार के संपादक के कहने पर की थी। उन्होंने कहा कि मुंबई के एक अखबार के संपादक ने चार लोगों से अपने-अपने संस्मरण लिखने के लिए कहा था। जिसमें कांग्रेस के सुशील शिंदे, शिवसेना के मनोहर जोशी, नेशनल कांग्रेस पार्टी के शरद पंवार और उन्हें भाजपा का संबोधित करते हुए संस्मरण लिखने के लिए कहा। उन्होंने मना भी किया कि वह राज्यपाल हैं, लेकिन उक्त संपादक ने उन्हें भाजपा के समय के संस्मरण लिखने के लिए कहा। दो-दो लेखकों के संस्मरण हर रविवार को छपे। एक साल तक उनके लेख छपते रहे। कुल 27 लेख छपे। जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया। उसके बाद उन्हें संकलित किया और मराठी के साथ-साथ हिंदी, अंग्रेजी तथा उर्दू में अनुवाद किया। बाद में अन्य भाषाओं में अनुवाद किया गया। राज्यपाल ने कहा कि उनकी रचना चरैवेति, चरैवेति का मतलब है चलते रहो, चलते रहो। जो सो गया तो उसका भाग्य भी सो गया, जो बैठ गया, उसका भाग्य भी बैठ गया, जो उठ गया उसका भाग्य उठ गया और जो चल पड़ा, तो उसका भाग्य भी चल पड़ेगा।
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-- रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं
राज्यपाल राम नाईक ने लोगों को रक्षाबंधन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुंबई में आज कोकोनट डे मनाया जा रहा है। इसे नारियल पूर्णिमा भी कहा जाता है। मुंबई में विशेषकर मच्छीमार इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। समुद्र की पूजा की जाती है, जबकि रविवार को पूरे देश में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। रक्षाबंधन भाई और बहन के अटूट प्रेम का त्योहार है ।

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- पूर्व प्रधानमंत्री ने प्रभाकर का साहित्य मांगा था
पद्मभूषण डाक्टर भारत भूषण ने कहा कि कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर जी जीवन शिल्पी थे। उन्होंने समाज की संवेदनाओं को समझा, समाज जख्मों को भरने के लिए रचनाएं कीं। उन्होंने कहा कि 1990 में जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सरसावा के अतिथिगृह में रखा गया था तो उन्हें लेने के लिए तत्कालीन डीएम पहुंचे थे। डीएम ने अटल बिहारी वाजपेयी से कहा था कि किसी भी चीज की जरूरत हो तो उन्हें बता दें। तो अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे कहा कि उन्हें तो सिर्फ कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का साहित्य मंगवा दो फिर किसी चीज की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज और देश के विकास के साथ साहित्य का विकास हो रहा है। व्यवस्थाएं बढ़ेंगी तो साहित्य भी आगे बढ़ेगा। उन्होंने राज्यपाल राम नाईक से सहारनपुर को हवाई यात्रा की सुविधा दिलाए जाने की मांग की।
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