{"_id":"5a2448214f1c1bc45b8ba025","slug":"121512327201-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कारों से ही होता है सद्गुणों का संचार: आत्मानुभवी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कारों से ही होता है सद्गुणों का संचार: आत्मानुभवी
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:27 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि शुद्ध धार्मिक संस्कार ही क्षमा, शीलता, धैर्य और विवेक को जन्म देते हैं। संस्कारों से ही सद्गुणों का संचार होता है।
गिल कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि अध्यात्म ऊर्जा मनुष्य की चेतना को जागृत करती है। क्योंकि भक्ति की पराकाष्ठा से ही सच्ची शांति व आनंद की प्राप्ति होती है। भागवत ज्ञान अध्यात्म साधना का प्रवेश द्वार है। मानव जीवन ईश्वर का दिया हुआ अनमोल खजाना है। देव दुर्लभ मनुष्य तन को पाकर भी हताश और अशांत है। इसका एक मूल कारण अज्ञानता है। इसके कारण मनुष्य धन में मानसिक सुख व शांति ढूंढ रहा है। धन साध्य है, पर साधन नहीं है। धन से भौतिक सुख तो मिल सकता है, लेकिन शांति नहीं। इसलिए ईमानदारी से उतना ही धन अर्जित करना चाहिए, जिससे कि हमारी आवश्यकता की पूर्ति हो। महाराज शुकदेव के जन्म की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि संत पुरुषों और गुरुजनों के संपर्क में आते ही ही मनुष्य का विकार ग्रस्त मन पवित्र हो जाता है। अश्वनी शर्मा, रामकुमार शर्मा, अवनीश, केशो शर्मा, अशोक, रविंद्र पुंडीर, अजीत शर्मा, सरला किरन, सोमा, प्रीति, सीमा, कल्पना, प्रिया, कमलेश, मूर्ति आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
गिल कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आत्मानुभवी महाराज ने कहा कि अध्यात्म ऊर्जा मनुष्य की चेतना को जागृत करती है। क्योंकि भक्ति की पराकाष्ठा से ही सच्ची शांति व आनंद की प्राप्ति होती है। भागवत ज्ञान अध्यात्म साधना का प्रवेश द्वार है। मानव जीवन ईश्वर का दिया हुआ अनमोल खजाना है। देव दुर्लभ मनुष्य तन को पाकर भी हताश और अशांत है। इसका एक मूल कारण अज्ञानता है। इसके कारण मनुष्य धन में मानसिक सुख व शांति ढूंढ रहा है। धन साध्य है, पर साधन नहीं है। धन से भौतिक सुख तो मिल सकता है, लेकिन शांति नहीं। इसलिए ईमानदारी से उतना ही धन अर्जित करना चाहिए, जिससे कि हमारी आवश्यकता की पूर्ति हो। महाराज शुकदेव के जन्म की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि संत पुरुषों और गुरुजनों के संपर्क में आते ही ही मनुष्य का विकार ग्रस्त मन पवित्र हो जाता है। अश्वनी शर्मा, रामकुमार शर्मा, अवनीश, केशो शर्मा, अशोक, रविंद्र पुंडीर, अजीत शर्मा, सरला किरन, सोमा, प्रीति, सीमा, कल्पना, प्रिया, कमलेश, मूर्ति आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन