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सच्चे मन से करें आराधना, नौ दिन मां जगदंबा बरसाएंगी कृपा
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सच्चे मन से करें आराधना, नौ दिन मां जगदंबा बरसाएंगी कृपा
सहारनपुर। चैत्र नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। नवरात्र के नौ दिन मां जगदंबा की विधिपूर्वक आराधना करना बहुत फलदायी है। श्रद्धालु नौ दिन में अपने घरों में घट और अखंड ज्योत की स्थापना कर उपवास रखेंगे। इसके साथ ही मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। नवरात्र के लिए बाजारों में श्रद्धालुओं ने खरीदारी करनी शुरू कर कर दी है।
पेपर मिल रोड स्थित ब्रह्मपुरी कालोनी स्थित सिद्धपीठ शिव बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता और ज्योतिषाचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्र का आगमन होता है। शनिवार से शुरू होने वाले नवरात्र को चैत्र नवरात्र के नाम से जाना जाता है। नवरात्र भगवती की नौ रात्रियों से संबंधित है। नौ दिन तक मां भगवती के अलग-अलग रूप में पूजा-अर्चना होगी जो विशेष फलदायी होगी।
उधर, बाजारों में लोगों ने कलश स्थापना और पूजा अर्चना का सामान खरीदना शुरू कर दिया है। महानगर के प्रमुख मंदिरों में नवरात्र के नौ दिनों में विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके लिए मंदिरों की प्रबंध समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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पूजा करने पर मां के नौ रूप कर देते हैं कल्याण
सहारनपुर। पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि प्रथम नवरात्र पर देवी शैलपुत्री, दूसरे नवरात्र पर देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। तीसरे पर देवी चंद्रघंटा, चौथे पर देवी कुष्मांडा, पांचवें पर देवी स्कंदमाता है। छठे पर देवी कात्यायनी है। सातवें पर देवी कालरात्रि, आठवें पर देवी महागौरी, नौवें पर देवी सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। नौ दिनों में भगवती के नौ रूपों की पूजा कर भक्त अपने जीवन में सुख शांति और आनंद की प्राप्ति करता है। भगवती के नाम और रूप अलग अलग हैं। लेकिन इनका संबंध वास्तव में माता पार्वती से है। माता पार्वती ने अपने भक्तों के कल्याण के लिए अलग-अलग रूप धारण कर संसार में प्रकट होकर लीला की।
विधिपूर्वक ऐसे करें पूजा अर्चना
सहारनपुर। सर्वप्रथम पूजा के लिए स्थान का चयन करें। वह स्थान पवित्र होना चाहिए। पूरब दिशा को पूजा के लिए शुभ माना जाता है। मां भगवती की पूजा में उपयोग की जाने वाली सामग्री का संग्रह सावधानी पूर्वक करना चाहिए। शुभ स्थान ,शुद्ध भाव से पवित्र वस्तुओं के साथ विधिपूर्वक की गई पूजा अवश्य ही मनोवांछित फल प्रदान करती है । मां की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम तो किसी योग्य ब्राह्मण को निमंत्रण देना चाहिए। सात्विक ब्राह्मण के द्वारा की गई पूजा अवश्य ही यजमान का कल्याण करती है। ब्राह्मण के न मिलने पर स्वयं भी भगवती की पूजा कर सकते हैं। देवी भागवत में कहा गया है भगवती का आह्वान और विसर्जन प्रात:काल ही करना चाहिए। कलश स्थापना, ज्योत स्थापना के लिए सुबह का समय उपयुक्त है।
पूजा की सामग्री अपने सम्मुख रखकर सबसे पहले पूजा घर में पूरब और उत्तर के कोने में रेत या मिट्टी में जौ बोएं। उसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश रखें। इसमें में एक सुपारी, दो लौंग, दो इलायची, दूर्वा, एक जायफल, एक पान का पत्ता, एक आम की टहनी, पिसी हुई थोड़ी हल्दी, रोली व गंगाजल डालें। आम के पत्ते कलश के ऊपर रखें। पत्तों की संख्या पांच, सात, नौ या 11 होनी चाहिए। एक पात्र में चावल भरकर कलश के ऊपर रखें। नारियल के ऊपर लाल चुनरी लपेटकर उसमें कुछ दक्षिणा रखें। कलश को ऊपर इस प्रकार रखें कि नुकीला भाग पूरब की ओर होना चाहिए। एक लाल पुष्प कलश पर चढ़ाकर कलश को प्रणाम करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर मां भगवती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। मां को लाल चुनरी अर्पण करें। यदि संभव हो तो नौ दिन के लिए अखंड ज्योत जगाएं। घर में मां जगदंबा की ज्योत स्थापित करने के बाद घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए। घर में किसी न किसी व्यक्ति का होना आवश्यक है। यदि ऐसा संभव नहीं है तो अखंड ज्योत न जलाकर केवल पूजा के समय ही ज्योत जलाएं। अखंड ज्योत के लिए शुद्ध देसी घी, तिल का तेल और सरसों का तेल प्रयोग करना उचित रहता है। मां के सम्मुख दीपक जलाकर लाल पुष्प लेकर के भगवती दुर्गा का ध्यान करें। पुष्प मां के चरणों में अर्पण करें। मां को रोली से सुंदर तिलक करें। मां को अक्षत और एक लाल फूल चढ़ाएं। मां को धूप दीप दिखाएं, मावे से बना भोग अर्पण करें। दो लाल फल चढ़ाएं। पान अर्पण करने के साथ दो लौंग, दो इलायची और एक सुपारी भी चढ़ाएं। मां के चरणों में दक्षिणा अर्पण करें और लाल पुष्प लेकर के मां से प्रार्थना करें ।
इस मंत्र से प्रसन्न होती हैं मां भगवती
प्रार्थना करते समय मां को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय मंत्रों का जाप करना चाहिए। श्रद्धालु को या देवी सर्वभूतेषु, मातृरुपेण संस्थिता:। नमस्तस्यै-नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:। यदि संभव हो तो मां के सम्मुख बैठकर के 108 बार मां के प्रिय मंत्र ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै’ का जप करें।
कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त
शनिवार को कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7:40 से 9:14 बजे तक है। इसके बाद दोपहर 12:23 से 13:57 बजे तक है। सुबह 09:14 से 10:48 के बीच में राहु काल रहेगा। इस समय कलश स्थापित नहीं किया जाएगा।
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सहारनपुर। चैत्र नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। नवरात्र के नौ दिन मां जगदंबा की विधिपूर्वक आराधना करना बहुत फलदायी है। श्रद्धालु नौ दिन में अपने घरों में घट और अखंड ज्योत की स्थापना कर उपवास रखेंगे। इसके साथ ही मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। नवरात्र के लिए बाजारों में श्रद्धालुओं ने खरीदारी करनी शुरू कर कर दी है।
पेपर मिल रोड स्थित ब्रह्मपुरी कालोनी स्थित सिद्धपीठ शिव बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता और ज्योतिषाचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्र का आगमन होता है। शनिवार से शुरू होने वाले नवरात्र को चैत्र नवरात्र के नाम से जाना जाता है। नवरात्र भगवती की नौ रात्रियों से संबंधित है। नौ दिन तक मां भगवती के अलग-अलग रूप में पूजा-अर्चना होगी जो विशेष फलदायी होगी।
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उधर, बाजारों में लोगों ने कलश स्थापना और पूजा अर्चना का सामान खरीदना शुरू कर दिया है। महानगर के प्रमुख मंदिरों में नवरात्र के नौ दिनों में विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके लिए मंदिरों की प्रबंध समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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पूजा करने पर मां के नौ रूप कर देते हैं कल्याण
सहारनपुर। पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि प्रथम नवरात्र पर देवी शैलपुत्री, दूसरे नवरात्र पर देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। तीसरे पर देवी चंद्रघंटा, चौथे पर देवी कुष्मांडा, पांचवें पर देवी स्कंदमाता है। छठे पर देवी कात्यायनी है। सातवें पर देवी कालरात्रि, आठवें पर देवी महागौरी, नौवें पर देवी सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। नौ दिनों में भगवती के नौ रूपों की पूजा कर भक्त अपने जीवन में सुख शांति और आनंद की प्राप्ति करता है। भगवती के नाम और रूप अलग अलग हैं। लेकिन इनका संबंध वास्तव में माता पार्वती से है। माता पार्वती ने अपने भक्तों के कल्याण के लिए अलग-अलग रूप धारण कर संसार में प्रकट होकर लीला की।
विधिपूर्वक ऐसे करें पूजा अर्चना
सहारनपुर। सर्वप्रथम पूजा के लिए स्थान का चयन करें। वह स्थान पवित्र होना चाहिए। पूरब दिशा को पूजा के लिए शुभ माना जाता है। मां भगवती की पूजा में उपयोग की जाने वाली सामग्री का संग्रह सावधानी पूर्वक करना चाहिए। शुभ स्थान ,शुद्ध भाव से पवित्र वस्तुओं के साथ विधिपूर्वक की गई पूजा अवश्य ही मनोवांछित फल प्रदान करती है । मां की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम तो किसी योग्य ब्राह्मण को निमंत्रण देना चाहिए। सात्विक ब्राह्मण के द्वारा की गई पूजा अवश्य ही यजमान का कल्याण करती है। ब्राह्मण के न मिलने पर स्वयं भी भगवती की पूजा कर सकते हैं। देवी भागवत में कहा गया है भगवती का आह्वान और विसर्जन प्रात:काल ही करना चाहिए। कलश स्थापना, ज्योत स्थापना के लिए सुबह का समय उपयुक्त है।
पूजा की सामग्री अपने सम्मुख रखकर सबसे पहले पूजा घर में पूरब और उत्तर के कोने में रेत या मिट्टी में जौ बोएं। उसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश रखें। इसमें में एक सुपारी, दो लौंग, दो इलायची, दूर्वा, एक जायफल, एक पान का पत्ता, एक आम की टहनी, पिसी हुई थोड़ी हल्दी, रोली व गंगाजल डालें। आम के पत्ते कलश के ऊपर रखें। पत्तों की संख्या पांच, सात, नौ या 11 होनी चाहिए। एक पात्र में चावल भरकर कलश के ऊपर रखें। नारियल के ऊपर लाल चुनरी लपेटकर उसमें कुछ दक्षिणा रखें। कलश को ऊपर इस प्रकार रखें कि नुकीला भाग पूरब की ओर होना चाहिए। एक लाल पुष्प कलश पर चढ़ाकर कलश को प्रणाम करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर मां भगवती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। मां को लाल चुनरी अर्पण करें। यदि संभव हो तो नौ दिन के लिए अखंड ज्योत जगाएं। घर में मां जगदंबा की ज्योत स्थापित करने के बाद घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए। घर में किसी न किसी व्यक्ति का होना आवश्यक है। यदि ऐसा संभव नहीं है तो अखंड ज्योत न जलाकर केवल पूजा के समय ही ज्योत जलाएं। अखंड ज्योत के लिए शुद्ध देसी घी, तिल का तेल और सरसों का तेल प्रयोग करना उचित रहता है। मां के सम्मुख दीपक जलाकर लाल पुष्प लेकर के भगवती दुर्गा का ध्यान करें। पुष्प मां के चरणों में अर्पण करें। मां को रोली से सुंदर तिलक करें। मां को अक्षत और एक लाल फूल चढ़ाएं। मां को धूप दीप दिखाएं, मावे से बना भोग अर्पण करें। दो लाल फल चढ़ाएं। पान अर्पण करने के साथ दो लौंग, दो इलायची और एक सुपारी भी चढ़ाएं। मां के चरणों में दक्षिणा अर्पण करें और लाल पुष्प लेकर के मां से प्रार्थना करें ।
इस मंत्र से प्रसन्न होती हैं मां भगवती
प्रार्थना करते समय मां को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय मंत्रों का जाप करना चाहिए। श्रद्धालु को या देवी सर्वभूतेषु, मातृरुपेण संस्थिता:। नमस्तस्यै-नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:। यदि संभव हो तो मां के सम्मुख बैठकर के 108 बार मां के प्रिय मंत्र ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै’ का जप करें।
कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त
शनिवार को कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7:40 से 9:14 बजे तक है। इसके बाद दोपहर 12:23 से 13:57 बजे तक है। सुबह 09:14 से 10:48 के बीच में राहु काल रहेगा। इस समय कलश स्थापित नहीं किया जाएगा।