वाराणसी: डीरेका में जलने को खड़ा हुआ सबसे बड़ा रावण का पुतला, इतनी है ऊंचाई
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मंगलवार को डीरेका के खेल मैदान में दशहरा मेला की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खेल मैदान पर सोमवार को रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतलों को देर रात तक खड़ा किया गया। दशहरे मेले की सुरक्षा के लिए रात तक पुलिस फोर्स चेकिंग में व्यस्त रही।
विजयादशमी समिति कमेटी की तरफ से बताया गया कि पूरे मेला परिक्षेत्र में हाई रिजोल्यूशन के कैमरे लगाए गए हैं। मेला परिक्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर कंट्रोल रूम से निगरानी की जाती रहेगी। मेला परिसर में साफ-सफाई के लिए जगह-जगह कूड़ेदान की व्यवस्था की गई है। विजयादशमी समिति ने प्राथमिक चिकित्सा के साथ ही एंबुलेंस की व्यवस्था मैदान के चारों कोनों पर की है। आपातकाल के लिए मैदान के पूर्वी दीवाल में एक और गेट का निर्माण किया गया है।
इस बार शहर का सबसे ऊंचा 60 फीट का रावण डीरेका में जलेगा। खास बात है कि दशानन का पुतला मंडुवाडीह के शमशाद खान के परिवार ने तैयार किया है। कुंभकर्ण के पुतले की ऊंचाई 55 फीट और मेघनाद की ऊंचाई 50 फीट की है। कारीगरों की मानें तो तीनों पुतलों को तैयार करने में लगभग दो लाख रुपये का खर्चा हुआ है।
आठ अक्तूबर को विजय दशमी पर डीरेका में पुतला दहन के पहले तीन घंटे के रूपक का मंचन होता है। मैदान में अयोध्या, लंका, किष्किंधा पर्वत, समुद्र, अशोक वाटिका समेत कई स्थानों को तैयार किया गया है। तीनों पुतलों को तैयार करने में दो कुंतल कागज, 25 लीटर पेंट, एक कुंतल मैदे की लेई, एक कुंतल तांत और 90 बांस का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्टेडियम के पूर्वी छोर पर बैरिकेडिंग के सहारे पुतलों को खड़ा किया जाएगा। स्टेडियम के भीतर तीनों दिशा में बैरिकेडिंग कर दर्शक दीर्घा तैयार की जा रही है।
मंडुवाडीह के शमशाद खान उर्फ गुड्डू का परिवार हर साल की तरह पुतलों को बनाने में तल्लीन हैं। पुतले बनाने वाले शमशाद खान और असलम का कहना है कि वे इसे पेशे के तौर पर न लेकर सांस्कृतिक सौहार्द के रूप में देखते हैं। असलम बताते हैं कि उनकी दूसरी पीढ़ी इसे तैयार कर रही है। करीब 30 साल से उनका परिवार ही इसे बनाता है। पुतला बनाने वालों में बाबू, चट्टी, असलम, शाहिद, आर्यन, शिवनाथ, सुबराती, बनारसी, सन्नो, रेहाना, सलमा शामिल हैं।