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Sardar Patel Jayanti: रामपुर का भारत में विलय कराने में पटेल की अहम भूमिका, आजादी के दो साल बाद हुआ था शामिल

Tue, 31 Oct 2023 11:23 AM IST
विमल शर्मा मोहित सक्सेना, रामपुर
मोहित सक्सेना, रामपुर Published by: विमल शर्मा Updated Tue, 31 Oct 2023 11:23 AM IST
सार

आजादी के बाद देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को 565 से ज्यादा रियासतों को स्वतंत्र भारत में विलय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद सरदार पटेल ने रामपुर रियासत का विलय नवाब परिवार से बातचीत के बाद भारत में कराया। एक जुलाई 1949 को रामपुर का भारत में विलय हुआ था।

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Sardar Patel played important role merger Rampur with India, he involved two years after independence
रामपुर में बना गेट - फोटो : संवाद

विस्तार

देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का रामपुर की आजादी में बड़ा योगदान रहा। उनके प्रयासों से देश की 565 रियासतों का भारत गणराज्य में विलय हुआ था, इनमें से एक रामपुर रियासत थी। सरदार पटेल ने इसके लिए नवाब परिवार से कई दौर की वार्ता के साथ पत्राचार भी किया। इसके बाद रामपुर नवाब रजा अली खां विलय के राजी हो गए। देश की आजादी के करीब दो साल बाद रामपुर को आजादी मिली थी।

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सरदार पटेल - फोटो : Social Media

भारत अंग्रेजों की हुकूमत से 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था, जिसका जश्न देश भर में मनाया गया था, लेकिन रामपुर के हालात उस समय अलग थे। रामपुर का इतिहास लिखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता शौकत अली खां ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि रामपुर में 15 अगस्त, 1947 को लोग आजादी की मांग करते हुए आंदोलन कर रहे थे।

इससे पहले चार अगस्त को रामपुर में बवाल हुआ था। तब रजा अली खां यहां के नवाब थे। बशीर हुसैन जैदी रामपुर रियासत के मुख्यमंत्री थे। नवाब रजा अली खां के बड़े बेटे मुर्तजा अली खां आर्मी चीफ थे। नवाब और उनके बेटे में भी कुछ अनबन रहती थी।

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रामपुर की रजा लाइब्रेरी - फोटो : मोहम्मद फहीम

इसको लेकर मुख्यमंत्री बशीर हुसैन जैदी ने कुछ लोगों को उकसा दिया और बवाल हो गया। लोगों ने कोर्ट, तहसील और मालखाना फूंक दिया था। 12 आंदोलनकारियों की मौत हुई और अनेक लोगों को जेल में बंद कर दिया गया था। आजादी के बाद देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को 565 से ज्यादा रियासतों को स्वतंत्र भारत में विलय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जिसके बाद सरदार पटेल ने रामपुर रियासत का विलय नवाब परिवार से बातचीत के बाद भारत में कराया। एक जुलाई 1949 को रामपुर का भारत में विलय हुआ था। इसके बाद रामपुर केंद्र सरकार के अधीन हो गया था। एक दिसंबर, 1949 को रामपुर को उत्तर प्रदेश का जिला घोषित किया गया।

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रामपुर की रजा लाइब्रेरी - फोटो : मोहम्मद फहीम

ये है रामपुर का इतिहास

  • 1300 ईसवीं में कटेहर राजा राम सिंह ने रामपुर बसाया।
  • 7 अक्तूबर 1774 को नवाब फैजुल्ला खां रामपुर के पहले नवाब बने।
  • 15 मई 1949 नवाब रजा अली खां ने विलय के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।
  • 30 जून 1949 रामपुर के नवाब की हुकूमत का आखिरी दिन।
  • 1 जुलाई 1949 रामपुर रियासत का आजाद भारत में विलय।
  • 30 नवंबर 1949 तक विलय के बाद रामपुर केंद्र सरकार के अधीन रहा।
  • 1 दिसंबर 1949 को रामपुर उत्तर प्रदेश का जिला बना।


देश आजाद होने के बाद से ही रामपुर को स्वतंत्र भारत में विलय कराने के लिए वार्ता शुरू हो गई थी। नवाब रजा अली के सामने विलय का प्रस्ताव लाया गया, जिस पर उन्होंने सहमति जताई। कुछ मुद्दों पर सहमति होने के बाद रामपुर का स्वतंत्र भारत में विलय हो गया। - नफीसउद्दीन सिद्दीकी, इतिहासकार।

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रामपुर की रजा लाइब्रेरी - फोटो : मोहम्मद फहीम

नवाबी राज से पहले था राजा कटेहर राजपूत का शासन

इतिहासकार बताते हैं कि नवाबों के शासन से पहले रामपुर में कटेहर राजपूत का शासन था। 1200-1300 ईसवीं के बीच रामपुर के राजा राम सिंह रहे। इन्हीं के नाम पर चार छोटे-छोटे गांवों के समूह बनाए गए, जिसको राजा राम सिंह ने रामपुर का नाम दिया। शासन बदलने के बाद 1774 में पहले नवाब फैजुल्ला खां को रामपुर का नाम पसंद नहीं आया, जिस पर इसका नाम फैजाबाद कर दिया।

 

मगर, बताया गया कि फैजाबाद नाम का शहर भारत में है। इसके बाद उसका नाम मुस्तफाबाद कर दिया गया। मगर, बाद में जब उन्हें यह पता चला कि मुस्तफाबाद नाम से भी भारत में शहर है तो उन्होंने फिर नाम बदलकर रामपुर ही कर दिया। तब से यही नाम देश दुनिया में प्रसिद्ध हो गया।

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