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Rampur News: आजम खां पर दर्ज मामले में पुलिस ने ईडी से मांगा रिकाॅर्ड
Fri, 16 Oct 2026 01:52 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Fri, 16 Oct 2026 01:52 AM IST
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रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब न मिलने के मामले में पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। अजीमनगर थाने में दर्ज मामले की जांच के लिए पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से साक्ष्य और संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। ईडी की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले अभिलेख विवेचना की दिशा तय करने में अहम होंगे। जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च, धन के स्रोत और सरकारी धन के कथित इस्तेमाल से जुड़े बिंदुओं को खंगाला जाएगा।
ईडी की ओर से अजीमनगर थाने में बीते मंगलवार की आधी रात में दर्ज कराई गई एफआईआर में यूनिवर्सिटी के निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जिला स्तरीय मूल्यांकन रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि ट्रस्ट के लेखा अभिलेखों में 416.14 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब नहीं मिला। इसी आधार पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामले में दर्ज एफआईआर में जौहर ट्रस्ट, एसएस एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स समेत पांच आरोपियों के नाम शामिल हैं। पुलिस अब मामले से संबंधित दस्तावेजों, निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। इस प्रकरण की विवेचना सीओ टांडा पंकज पंत की ओर से जा रही है। पुलिस ने ईडी से अभिलेख मांगे हैं। इसी के आधार पर यह जांच की जाएगी कि निर्माण कार्यों में कितनी रकम खर्च हुई, उसका लेखा-जोखा कहां दर्ज है और धनराशि के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं।
यह है मामला
ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय के उप निदेशक पीयूष एस. थोरेट की ओर से अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित यूनिवर्सिटी के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब न मिलने का आरोप लगाया गया है। ईडी ने इस मामले में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, एसएस इंटरप्राइजेज व एसएससीके एसोसिएट व अन्य को आरोपी बनाया है। दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर में बने भवनों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक के आयकर रिटर्न में केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया। इस तरह निर्माण लागत और घोषित खर्च के बीच 416.14 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया। ईडी ने इसे अघोषित निर्माण खर्च बताते हुए इसके स्रोतों की जांच की। ईडी की रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों ने निर्माण सामग्री विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचाई।
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ईडी की ओर से अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर की जांच सीओ टांडा पकंज पंत को सौंपी गई है। मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। विवेचना के तहत अब ईडी से लगाए गए आरोपों का रिकार्ड तलब किया गया है। रिकार्ड आने के बाद इस मामले की विवेचना को आगे बढ़ाया जाएगा।
- अनुराग सिंह, एएसपी
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चार साल की जांच और आजम खां से पूछताछ के बाद दर्ज हुई एफआईआर
रामपुर। ईडी ने 2022 में मामले की जांच शुरू की थी। इस दौरान ईडी ने ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ ही ठेकेदारों व दानदाताओं से पूछताछ की। चमरौवा के विधायक नसीर अहमद से भी पूछताछ की गई थी। इसके बाद ईडी ने सपा नेता आजम खां से जेल के भीतर पूछताछ की, जिसके बाद ईडी ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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ईडी की ओर से अजीमनगर थाने में बीते मंगलवार की आधी रात में दर्ज कराई गई एफआईआर में यूनिवर्सिटी के निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, जिला स्तरीय मूल्यांकन रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि ट्रस्ट के लेखा अभिलेखों में 416.14 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब नहीं मिला। इसी आधार पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामले में दर्ज एफआईआर में जौहर ट्रस्ट, एसएस एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स समेत पांच आरोपियों के नाम शामिल हैं। पुलिस अब मामले से संबंधित दस्तावेजों, निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। इस प्रकरण की विवेचना सीओ टांडा पंकज पंत की ओर से जा रही है। पुलिस ने ईडी से अभिलेख मांगे हैं। इसी के आधार पर यह जांच की जाएगी कि निर्माण कार्यों में कितनी रकम खर्च हुई, उसका लेखा-जोखा कहां दर्ज है और धनराशि के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं।
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यह है मामला
ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय के उप निदेशक पीयूष एस. थोरेट की ओर से अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की ओर से संचालित यूनिवर्सिटी के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब न मिलने का आरोप लगाया गया है। ईडी ने इस मामले में आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, एसएस इंटरप्राइजेज व एसएससीके एसोसिएट व अन्य को आरोपी बनाया है। दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर में बने भवनों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक के आयकर रिटर्न में केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया। इस तरह निर्माण लागत और घोषित खर्च के बीच 416.14 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया। ईडी ने इसे अघोषित निर्माण खर्च बताते हुए इसके स्रोतों की जांच की। ईडी की रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों ने निर्माण सामग्री विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचाई।
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ईडी की ओर से अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर की जांच सीओ टांडा पकंज पंत को सौंपी गई है। मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। विवेचना के तहत अब ईडी से लगाए गए आरोपों का रिकार्ड तलब किया गया है। रिकार्ड आने के बाद इस मामले की विवेचना को आगे बढ़ाया जाएगा।
- अनुराग सिंह, एएसपी
चार साल की जांच और आजम खां से पूछताछ के बाद दर्ज हुई एफआईआर
रामपुर। ईडी ने 2022 में मामले की जांच शुरू की थी। इस दौरान ईडी ने ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ ही ठेकेदारों व दानदाताओं से पूछताछ की। चमरौवा के विधायक नसीर अहमद से भी पूछताछ की गई थी। इसके बाद ईडी ने सपा नेता आजम खां से जेल के भीतर पूछताछ की, जिसके बाद ईडी ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई है।