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Rampur News: नवाब रजा अली खां ने शुरू कराया था रामलीला का मंचन
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रामपुर। रामपुर के आखिरी नवाब रजा अली खां की भगवान श्रीराम में बड़ी आस्था थी। उन्होंने रामपुर में रामलीला के मंचन की शुरुआत कराई थी। इसके लिए उन्होंने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा जमीन उपलब्ध कराई थी। रामलीला का इतना बड़ा मैदान आसपास के किसी जिले में नहीं है। दशहरा पर यहां रामलीला देखने जिलेभर से लोग आते हैं। रामपुर में लंबे समय तक नवाबों का राज रहा। नवाबों ने सभी धर्मों का सम्मान करते हुए उनके धार्मिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का भी प्रयास किया। नवाब रजा अली खां ने खुद होली गीत लिखे। भमरौआ में श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर के लिए भूमि उपलब्ध कराई तो शहर में रामलीला के लिए 80 बीघा जमीन दी थी। श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी के महामंत्री वीरेंद्र गर्ग कहते हैं कि रामलीला का इतना बड़ा मैदान कहीं और होगा। यहां मैदान बड़ा होने के कारण दूर-दूर से लोग रामलीला देखने आते थे। पहले 30-35 हजार लोग यहां पहुंचते थे। उस समय सभी लोग जमीन पर बैठते थे।
नवाब रजा अली खां ने 1947 में पहली दफा रामलीला का मंचन शुरू कराया था। उस वक्त पनवड़िया के पास नुमाइश मैदान में इसकी शुरुआत की गई, लेकिन शहर से दूर होने के कारण दर्शकों को वहां पहुंचने में परेशानी होती थी। इसके बाद 1949 में नवाब रजा अली खां ने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा जमीन उपलब्ध कराई। तब भी रामपुर में नवाबों का राज था। तब से ही यहां लगातार मंचन होता आ रहा है।
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कई बार अयोध्या से भी आए कलाकार
रामलीला कमेटी के महामंत्री वीरेंद्र कुमार गर्ग बताते हैं कि रामपुर में रामलीला मंचन के लिए नामचीन कलाकार आते रहे हैं। अयोध्या से भी कई बार कलाकार आए। इसके बाद मथुरा से और अब कई साल से वृंदावन से कलाकार आ रहे हैं। वृंदावन और मथुरा के कलाकार तो रामपुर में आने के लिए बहुत इच्छुक रहते हैं।
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गंगा जमुनी तहजीब को दिया बढ़ावा
नवाब परिवार ने हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब को बढ़ावा दिया। मेरे दादा नवाब रजा अली खां ने शहर में रामलीला के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। ब्रिटिश राज में 28 मुस्लिम राजघराने थे। इनमें रामपुर अकेला ऐसा राजघराना था, जहां नवाब को गद्दी पर बैठाने वाले ब्राह्मण होते थे। रामपुर रियासत के आखिरी राजपुरोहित भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के ससुर थे। उन्होंने ही अंतिम शासक रजा अली खां को गद्दी पर बैठाया था।
- नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां, पूर्व मंत्री
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नवाब रजा अली खां ने 1947 में पहली दफा रामलीला का मंचन शुरू कराया था। उस वक्त पनवड़िया के पास नुमाइश मैदान में इसकी शुरुआत की गई, लेकिन शहर से दूर होने के कारण दर्शकों को वहां पहुंचने में परेशानी होती थी। इसके बाद 1949 में नवाब रजा अली खां ने कोसी मंदिर मार्ग पर 80 बीघा जमीन उपलब्ध कराई। तब भी रामपुर में नवाबों का राज था। तब से ही यहां लगातार मंचन होता आ रहा है।
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कई बार अयोध्या से भी आए कलाकार
रामलीला कमेटी के महामंत्री वीरेंद्र कुमार गर्ग बताते हैं कि रामपुर में रामलीला मंचन के लिए नामचीन कलाकार आते रहे हैं। अयोध्या से भी कई बार कलाकार आए। इसके बाद मथुरा से और अब कई साल से वृंदावन से कलाकार आ रहे हैं। वृंदावन और मथुरा के कलाकार तो रामपुर में आने के लिए बहुत इच्छुक रहते हैं।
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गंगा जमुनी तहजीब को दिया बढ़ावा
नवाब परिवार ने हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब को बढ़ावा दिया। मेरे दादा नवाब रजा अली खां ने शहर में रामलीला के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। ब्रिटिश राज में 28 मुस्लिम राजघराने थे। इनमें रामपुर अकेला ऐसा राजघराना था, जहां नवाब को गद्दी पर बैठाने वाले ब्राह्मण होते थे। रामपुर रियासत के आखिरी राजपुरोहित भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के ससुर थे। उन्होंने ही अंतिम शासक रजा अली खां को गद्दी पर बैठाया था।
- नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां, पूर्व मंत्री