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विधि विधान से करें पूजन, मिलेगा अभीष्ट फल
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रामपुर। कृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनेगी। कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए ये त्योहार बेहद ही खास होता है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं और रात के 12 बजे कृष्ण जी की पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं। हिंदू मान्यता अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए ये त्योहार बेहद ही खास होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनेगी। अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अगस्त को रात 11.25 बजे से होगी और इसकी समाप्ति 31 अगस्त को 01.59 बजे पर होगी। रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ 30 अगस्त को सुबह 06.39 बजे पर होगा और इसकी समाप्ति 31 अगस्त को सुबह 09.44 बजे होगी। पूजा का समय 30 अगस्त की रात 11.59 बजे से 12.44 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 45 मिनट की है। इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। ये व्रत एक निश्चित अवधि में तोड़ा जाता है। यदि सूर्योदय के बाद इन दोनों में से कोई भी मुहूर्त सूर्यास्त से पहले समाप्त नहीं होता तो व्रत सूर्यास्त के बाद तोड़ा जाता है। अगर इन दोनों में से कोई भी एक मुहूर्त पहले समाप्त हो जाए तो उस समय के बाद जन्माष्टमी व्रत का पारण किया जा सकता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनेगी। अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अगस्त को रात 11.25 बजे से होगी और इसकी समाप्ति 31 अगस्त को 01.59 बजे पर होगी। रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ 30 अगस्त को सुबह 06.39 बजे पर होगा और इसकी समाप्ति 31 अगस्त को सुबह 09.44 बजे होगी। पूजा का समय 30 अगस्त की रात 11.59 बजे से 12.44 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 45 मिनट की है। इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। ये व्रत एक निश्चित अवधि में तोड़ा जाता है। यदि सूर्योदय के बाद इन दोनों में से कोई भी मुहूर्त सूर्यास्त से पहले समाप्त नहीं होता तो व्रत सूर्यास्त के बाद तोड़ा जाता है। अगर इन दोनों में से कोई भी एक मुहूर्त पहले समाप्त हो जाए तो उस समय के बाद जन्माष्टमी व्रत का पारण किया जा सकता है।
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