अजहर अहमद खां को झटका: सपा नेता आजम खां के करीबी पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष की जमानत खारिज, हत्या और बलवा कराने का है आरोप
अदालत ने आजम खां के करीबी अजहर अहमद खां की जमानत याचिका खारिज कर दी है। खान के खिलाफ हत्या और बलवे के आरोप में दर्ज मुकदमे में जमानत प्रार्थना पत्र पर कोर्ट में सुनवाई हुई।
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समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां के करीबी पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां के खिलाफ हत्या और बलवे के आरोप में दर्ज मुकदमे में जमानत प्रार्थना पत्र पर कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उनका जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। मामला कोतवाली थाने से जुड़ा है।
21 दिसंबर 2019 को शहर में नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के विरोध बंद का आह्वान किया गया था। ईदगाह पर बड़ी तादात में भीड़ एकत्र हो गई और हाथीखाना चौराहे तक बढ़ गई। आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर फायरिंग, पथराव, सुतली बम फेंककर लोक संपत्ति को क्षति पहुंचाई। जिसमें छह बाइक और कई लोग घायल हो गए। जबकि, फैज नामक युवक की गोली लगने से मौत हो गई थी।
घटना की रिपोर्ट कोतवाल राजकुमार शर्मा ने 116 को नामजद करते हुए हजारों अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसमें पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अजहर अहमद खां को भी आरोपी बनाया गया था। पिछले दिनों उन्होंने मुरादाबाद कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। जिसके बाद से ही वह जेल में बंद हैं।
शुक्रवार को उनके जमानत प्रार्थना पत्र पर कोर्ट में सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरूण प्रकाश सक्सेना ने दलील दी कि आरोपी द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया गया है। इसके सुबूत पत्रावली पर मौजूद हैं। लिहाजा, जमानत निरस्त की जाए। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। जो भी गवाह हैं पुलिस कर्मी हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद प्रभारी जिला जज नीलू मोघा ने अजहर अहमद खां का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।