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Rampur News: आजम-अब्दुल्ला की जमानत पर सुनवाई टली
Sat, 15 Feb 2025 11:16 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sat, 15 Feb 2025 11:16 PM IST
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रामपुर। सीतापुर जेल में बंद सपा नेता आजम खां और हरदोई जेल में बंद उनका बेटा पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम की जमानत याचिका पर शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अभियोजन की ओर से कोर्ट में स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया, जिस पर कोर्ट ने सूुनवाई के लिए अगली तारीख 17 फरवरी नियत की है।
शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के आरोप से घिरे सपा नेता आजम खां व अब्दुल्ला आजम को रामपुर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी। शासन ने मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ला के खिलाफ जांच बैठाने के साथ ही दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए थे। एसपी ने मामले की विवेचना अपराध शाखा के इंस्पेक्टर नवाब सिंह को सौंपी थी। नवाब सिंह इस वक्त शहर कोतवाल हैं। इस मामले में पिता पुत्र को कोर्ट में आरोपी बनाया जा चुका है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में अब सपा नेता व उनके बेटे ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट की शरण ली है। कोर्ट में उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। मामले में शनिवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी स्वदेश शर्मा ने कोर्ट में स्थगन दिया। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब इस मामले की सुनवाई 17 फरवरी को होगी। इसके साथ ही विवेचक के धारा बढ़ाने के प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई होगी।
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यह है मामला
रिकार्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में नौ मई 2020 को लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद व अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 218, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने का आरोप लगा है। दरअसल यह मामला मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के अंतर्गत आने वाली भूमि का है जो कि इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी। इमामुद्दीन कुरैशी 1947- 48 में भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। यह संपत्ति शत्रु संपत्ति के रूप में 2006 में भारत सरकार के कस्टोडियन विभाग के अंतर्गत दर्ज कर ली गई थी। रिकॉर्ड की जांच करने पर यह मामला प्रकाश में आया कि शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के लिए आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में अंकित कर दिया गया था। साथ ही रिकॉर्ड के पन्ने भी गायब मिले थे। सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम का नाम निकाल देने के मामले का खुलासा होने के बाद शासन ने तत्कालीन एसपी अशोक कुमार शुक्ला के खिलाफ जांच बैठा थी। यह जांच अलीगढ़ की मंडलायुक्त चैत्रा वी और आईजी सतर्कता मंजिल सैनी को सौंपी गई है।जांच में एसपी को क्लीन चिट दे दी गई थी।
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शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के आरोप से घिरे सपा नेता आजम खां व अब्दुल्ला आजम को रामपुर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी। शासन ने मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ला के खिलाफ जांच बैठाने के साथ ही दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए थे। एसपी ने मामले की विवेचना अपराध शाखा के इंस्पेक्टर नवाब सिंह को सौंपी थी। नवाब सिंह इस वक्त शहर कोतवाल हैं। इस मामले में पिता पुत्र को कोर्ट में आरोपी बनाया जा चुका है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में अब सपा नेता व उनके बेटे ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट की शरण ली है। कोर्ट में उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। मामले में शनिवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी स्वदेश शर्मा ने कोर्ट में स्थगन दिया। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब इस मामले की सुनवाई 17 फरवरी को होगी। इसके साथ ही विवेचक के धारा बढ़ाने के प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई होगी।
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यह है मामला
रिकार्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में नौ मई 2020 को लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद व अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 218, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने का आरोप लगा है। दरअसल यह मामला मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के अंतर्गत आने वाली भूमि का है जो कि इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी। इमामुद्दीन कुरैशी 1947- 48 में भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। यह संपत्ति शत्रु संपत्ति के रूप में 2006 में भारत सरकार के कस्टोडियन विभाग के अंतर्गत दर्ज कर ली गई थी। रिकॉर्ड की जांच करने पर यह मामला प्रकाश में आया कि शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के लिए आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में अंकित कर दिया गया था। साथ ही रिकॉर्ड के पन्ने भी गायब मिले थे। सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम का नाम निकाल देने के मामले का खुलासा होने के बाद शासन ने तत्कालीन एसपी अशोक कुमार शुक्ला के खिलाफ जांच बैठा थी। यह जांच अलीगढ़ की मंडलायुक्त चैत्रा वी और आईजी सतर्कता मंजिल सैनी को सौंपी गई है।जांच में एसपी को क्लीन चिट दे दी गई थी।
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