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जिस ट्रेन में नहीं मिलती थी जगह, अब उनमें खाली रहती हैं सीटें

Thu, 22 Apr 2021 09:04 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 09:04 PM IST
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Train
रिजर्वेशन काउंटर पर सन्नाटा। - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। जिन ट्रेनों में पहले सीट नहीं मिलती थी। यहां तक कि खड़े होने तक जगह नहीं मिल पाती थी। अब उन ट्रेनों में ज्यादातर सीटें खाली रहती हैं। ट्रेन के आने के पहले टिकट काउंटरों पर पहले जैसी लाइन नहीं दिखती। रिजर्वेशन काउंटर पर भी ज्यादातर समय सन्नाटा पसरा रहता है।
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पिछले वर्ष देशभर में लॉकडाउन लगाया गया तो ट्रेनों का संचालन भी ठप हो गया। अनलॉक के दौरान ट्रेनें चलनी शुरू हुईं। धीरे-धीरे 23 जोड़ी गाड़ियां पटरी पर लौंटी, लेकिन इनमें ज्यादातर साप्ताहिक या हफ्ते में दो-तीन दिन चलती हैं।
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प्रतिदिन दौड़ने वाली गाड़ियों की संख्या कम है। अब तक चलाई गई ट्रेनें में रायबरेली जंक्शन से होकर गुजरने वाली सिर्फ एक ट्रेन इंटरसिटी एक्सप्रेस ही अनारक्षित है, जो प्रतापगढ़ से कानपुर के बीच फर्राटा भरती है। बाकी सभी ट्रेनें आरक्षित हैं।
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यह इंटरसिटी ट्रेन ऐसी है, जिसमें इतनी भीड़ होती थी कि लोगों को खड़े होने की जगह मिलना मुश्किल रहता था। अब ऐसा नहीं नजर आता है। यहां से इस ट्रेन में सफर करने वालों की संख्या बमुश्किल 8-10 ही रहती है।
अनारक्षित टिकट प्रणाली का एक काउंटर खोला जाता है, लेकिन सुबह और शाम को चलने वाली इंटरसिटी ट्रेन के लिए टिकटों की बिक्री दहाई का अंक भी पार नहीं कर पाती है। कुछ ऐसी ही हालत रिजर्वेशन काउंटर की है।
सुबह भले ही कुछ लोग लाइन में लगे नजर आ जाएं, लेकिन दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते यहां से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या कम रहती है।
आने वाले यात्रियों की संख्या रहती अधिक
ट्रेन से जाने वाले यात्रियों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन आने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दूसरे प्रांतों में काम करने वाले लोग घरों को लौट रहे हैं।
सबसे ज्यादा भीड़ मुंबई से आने वाली उद्योग नगरी में रहती है। हफ्ते में दो दिन आने वाली इस ट्रेन में हर बार 100 से अधिक यात्री आ रहे हैं। यही हाल पंजाब मेल और अन्य प्रांतों से आने वाली ट्रेनों का रहता है, जिनमें जाने वाले यात्रियों की अपेक्षा आने वाले मुसाफिरों की संख्या ज्यादा रहती है।

महज आठ जोड़ी ट्रेनें ही चलती हैं रोजाना
वर्तमान में जिले से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या 23 जोड़ी है। इनमें से महज आठ जोड़ी ट्रेनें ही ऐसी हैं, जो रोजाना आती जाती हैं। बाकी ट्रेनें साप्ताहिक हैं या फिर हफ्ते में दो या तीन दिन चलती हैं। किसी भी ट्रेन के आते ही रेलवे स्टेशन पर अफरातफरी मच जाती है। भले ही प्लेटफार्म पर या चलती हुई ट्रेन में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बैठते हों, लेकिन स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूल जाते हैं। यहां तक कि धक्कामुक्की भी होने लगती है।
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